वृद्ध व महिलाओं को पेंशन मामला : लिस्टों का सत्यापन न करने पर दिल्ली सरकार को फटकार
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हाईकोर्ट ने बुजुर्गों व महिलाओं को पेंशन देने में कौताही बरतने पर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि हो सकता है कि इन दो लाख लोगों में से कुछ की पेंशन की आस में मौत हो चुकी हो। अदालत ने कहा कि यदि आप सही लोगों की जांच नहीं कर पा रहे तो फंड एमसीडी को स्थानांतरित कर दें वहीं पुन: पेंशन प्रदान कर देगी।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने दिल्ली सरकार व एमसीडी के खिलापफदायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहाकि यह खेद की बात है कि सरकार ने स्वयं कहा था कि एमसीडी के पेंशन प्रदान करने में असफल रहने पर वह पेंशन देगी लेकिन अभी तक सरकार लिस्टों का सत्यापन ही नहीं कर पाई।
अदालत ने कहा कि यदि आपसे पेंशनधारियों की लिस्ट का सत्यापन नहीं हो पा रहा तो आप फंड पुन: तीनों एमसीडी को स्थानांतरित कर दे और पेंशन की जिम्मेदारी भी उन्हीं को सौंप दे।
इससे पहले याची सोशल ज्युरिस्ट के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि कई बार आदेश के बावजूद दिल्ली सरकार ने अभी तक इस दिशा में कुछ नहीं किया। ऐसे में संबधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की जाए।
अदालत ने एक जून को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि तुंरत एक कमेटी बनाकर पेंशन पाने वाले लोगों का सत्यापन करने व जल्द से जल्द पेंशन प्रदान करने की दिशा में काम शुरू करे। अदालत ने यह भी कहा था कि यह काफी गंभीर मामला है कि करीब तीन वर्ष से जरूरतमंद लोगों को पेंशन नहीं मिल रही।
अदालत ने सरकार को कमेटी बनाकर सोमवार यानि 6 जून से पेंशन पाने वाले लोगों का सत्यापन शुरू करने का निर्देश दिया था। अदालत ने सरकार को कहा था कि कम से कम प्रति दिन 500 लोगों का सत्यापन होना चाहिए। अदालत ने कहा कि पूरी प्रक्रिया छह माह में पूरी हो जानी चाहिए।
क्या है मामला
पेश मामले में अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया था कि उन्होंने इससे पूर्व अदालत में ईडीएमसी द्वारा पिछले दो वर्ष से पेंशन प्रदान न करने के मामले को लेकर याचिका दायर की थी। उसी दौरान पता चला कि एनडीएमसी ने भी जुलाई 2014 से वृद्घों व अन्य को पेंशन नहीं दी है।
यही हाल साउथएमसीडी का है। उन्होंने कहा कि तीनों निगम ने तर्क रखा है कि वित्तिय संकट के चलते वह पेंशन नहीं दे पा रहें हैं। उन्होंने कहा कि पेंशन पाने के हकदारों को पेंशन न मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एक मात्र उपाय है कि दिल्ली सरकार पेंशन प्रदान करने की जिम्मेदारी स्वयं उठाए।