पार्टियों को देखकर फंडिंग कर रहे हैं कॉरपोरेट
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राजनीतिक दलों को चंदा देने में इस बार कॉरपोरेट जगत काफी सतर्कता बरत रहा
कंपनियां इसके लिए एक साथ पूरी फंडिंग न देकर चुनाव से पहले और चुनाव बाद की स्थिति को देखकर फंडिंग करने की रणनीति पर काम कर रही है। नए कंपनी कानून के सेक्शन-8 के तहत कॉरपोरेट के लिए इलेक्टोरल ट्रस्ट बनाकर फंडिंग करने का प्रावधान किया गया है, जो पुराने कंपनी कानून-1956 के तहत सेक्शन-25 में शामिल था।
नए कानून के तहत टाटा, बिड़ला, बजाज, रिलायंस, महिंद्रा जैसे बड़े कॉरपोरेट घरानों ने पिछले तीन से चार महीने में अपने ट्रस्ट पंजीकृत कराए हैं। इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए कंपनियां किस तरह फंडिंग कर रही हैं ये आप आगे की स्लाइड्स में पढ़ें।
इलेक्टोरल फंड से कंपनियां ऐसे कर रही हैं फंड
इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए कंपनियां किस तरह फंडिंग कर रही हैं, इस पर टाटा संस के प्रवक्ता ने अमर उजाला को बताया कि नए कंपनी कानून के तहत प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट का गठन किया गया है। टाटा संस फंडिंग के समय राष्ट्रीय स्तर कम से कम तीन फीसदी वोट पाने वाले दल को लोकसभा चुनावों के लिए फंड करेगा।
इसी तरह राज्य स्तर पर कम से कम 10 फीसदी वोट पाने वाली पार्टी को फंडिंग की जाएगी। इसके अलावा टाटा संस ने फंडिंग की राशि दो चरणों में जारी करने का फैसला किया है। राजनीतिक दलों की सदन में संख्या के आधार पर 50 फीसदी राशि चुनाव से पहले जारी की गई है।
शेष राशि चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक दलों की सदन में संख्या के आधार पर दी जाएगी। इस मामले पर अमर उजाला ने महिंद्रा, रिलायंस एडीएजी सहित दूसरी प्रमुख कंपनियों से जानकारी मांगी। महिंद्रा ने जहां कोई भी जवाब देने से इंकार कर दिया। रिलायंस एडीएजी ने भी इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
नकद में नहीं दिया जा सकता चंदा
कंपनी मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कॉरपोरेट द्वारा
दी गई फंडिंग की सही तस्वीर उनके द्वारा फाइलिंग किए जाते वक्त पता चलेगी।
कानून के तहत यह प्रावधान है कि कंपनियों को जो भी फंडिंग करनी है, वह
इलेक्शन ट्रस्ट के जरिए कर सकती हैं। इसमें कंपनी को केवल यह बताना होगा कि
उसने ट्रस्ट को कितनी राशि दी है। ट्रस्ट किसी राजनीतिक दलों को कितनी
राशि देता है, उसे डिसक्लोज करने की जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट पर होगी।
इसके
अलावा नए नियमों के तहत ट्रस्ट के जरिए चंदा नकद में नहीं दिया जा सकेगा।
ट्रस्ट के लिए यह भी जरूरी होगा कि वह जिन व्यक्तियों से पूंजी जुटा रहे
हैं, उनके पैन नंबर का विवरण जरूरी है। ट्रस्ट किसी विदेशी कंपनी या नागरिक
से पूंजी नहीं जुटा सकते।
प्रमुख कॉरपोरेट घरानों के इलेक्टोरल ट्रस्ट
टाटा समूह ने जनवरी 2014
में ‘प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के नाम से पंजीकरण कराया है। वहीं
कोलकाता स्थित बिड़ला ग्रुप ने ‘परिवर्तन इलेक्टोरल ट्रस्ट’ जनवरी में ही
पंजीकृत कराया है।
इसी तरह दिसंबर 2013 में ‘महिंद्रा इलेक्टोरल ट्रस्ट’ का
और नवंबर के महीने में रिलायंस एडीए समूह द्वारा ‘पीपुल्स इलेक्टोरल
ट्रस्ट’ के नाम से पंजीकरण कराया जा चुका है। इसके अलावा बजाज समूह ने
बजाज इलेक्टोरल ट्रस्ट का गठन किया है। कंपनी मामलों के मंत्रालय से मिली
जानकारी के मुताबिक अभी तक करीब 14 इलेक्टोरल ट्रस्ट बनाए गए हैं।
अभी तक क्या है पैटर्न
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के अनुसार
राजनीतिक दलों को 75 फीसदी चंदा अज्ञात स्रोतों से आता है। वित्त वर्ष
2004-05 से लेकर 2011-12 के बीच कॉरपोरेट जगत से 378.89 करोड़ रुपये का
चंदा आया है। ऐसे में मंत्रालय का मानना है कि नए नियमों के जरिए पहले से
ज्यादा पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे कॉरपोरेट फंडिंग की राशि में अभी की तुलना
में कहीं ज्यादा बढ़ोतरी होगी।