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आइसक्रीम कारोबार को ‘निगल’ गया कोरोना, धंधा चौपट, फैक्टरियां बंदी की कगार पर

Sat, 18 Jul 2020 04:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 18 Jul 2020 04:42 AM IST
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Corona swallowed ice cream business many factories on the verge of closure
gold ice cream - फोटो : instagram

कोरोना वायरस की चपेट में आने से आइसक्रीम का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। घाटा इतना है कि लगभग 250 में से 50 फैक्टिरयां बंद होने की कगार पर हैं। एक आकलन के मुताबिक, दिल्ली में सालाना 250 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। 


 

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ice cream

हालांकि, कहने के लिए ही यह कारोबार सालाना होता है, लेकिन गर्मियों के सिर्फ 100 दिन में ही कमाई होती है। कोरोना मारामारी के चलते मार्च के अंतिम सप्ताह से शुरू लॉकडाउन के कारण यह कारोबार सिमटता चला गया। शुक्रवार को चेंबर ऑफ ट्रेड इंडस्ट्री (सीटीआई) के साथ आइसक्रीम के निर्माताओं और व्यावसायियों की इन्हीं मुद्दों पर वीडियो कांफ्रेंसिंग हुई। इसमें आइसक्रीम कारोबारियों ने अपनी व्यथा सुनाई। 

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ice cream
आइसक्रीम उद्यमियों के मीडिया सलाहकार फिरोज नकवी ने बताया कि कोरोना की शुरुआत में ही अफवाह उड़ी कि ठंडी चीजों से कोरोना वायरस का प्रसार होता है। इसके बाद तो आइसक्रीम उद्योग शत-प्रतिशत बंद हो गया। 

 
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दिल्ली के आइसक्रीम निर्माता पुनीत मनचंदा ने बताया कि 70 प्रतिशत आइसक्रीम कारोबार बर्बाद हो गया है। शादी विवाह, होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, पार्टियां बंद हैं, जबकि यहीं पर आइसक्रीम की सबसे ज्यादा मांग होती थी। 

 
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आइसक्रीम निर्माता विजय मल्होत्रा ने कहा कि वो किसानों से दूध लेते हैं, लेकिन इस सीजन में आउटलेट में जो भी माल लिया था सब बर्बाद हो गया। 24 घंटे कोल्ड स्टोरेज के रेफ्रिजरेटर चलने के कारण भारी भरकम बिजली का बिल भी भरना पड़ा। इन समस्याओं को सुनने के बाद सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारियों की परेशानी वह सरकार के सामने उठाएंगे। केंद्र सरकार ने जो भी राहत पैकेज की घोषणा की थी उसमें से आइसक्रीम कारोबारियों को कोई मदद नहीं मिली है।

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