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World Rabies Day: कोरोना ने भटकाया रेबीज से ध्यान, मरीजों के साथ दवाओं की भी कमी
Mon, 28 Sep 2020 06:42 PM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 28 Sep 2020 06:42 PM IST
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विश्व रेबीज दिवस 2020
- फोटो : अमर उजाला
विश्व रेबीज दिवस पर पूरी दुनिया में जागरुकता अभियान पर जोर दिया जाता है लेकिन देश की राजधानी में जागरुकता से ज्यादा सरकारी अव्यवस्थाएं हावी हैं। स्थिति यह है कि अस्पतालों में रेबीज के इंजेक्शन पहले से ही उपलब्ध नहीं हैं। वहीं कोरोना वायरस के चलते सरकारी तंत्र का ध्यान भी इस पर नहीं जा रहा है। हालांकि लॉकडाउन और अब कोरोना के दूसरे पीक के चलते रेबीज के मामलों में भी पिछले वर्षों की तुलना में कमी आई है। दिल्ली, केंद्र और नगर निगम तीनों ही तरह के अस्पतालों में इन दिनों रेबीज के इंजेक्शन को लेकर परेशानी है।
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पूर्वी दिल्ली के प्रियदर्शनी विहार निवासी महेश नागपाल का कहना है कि पिछले सप्ताह उनकी बेटी को कुत्ते ने काट लिया था। वह पहले डॉ. हेडगेवार अस्पताल पहुंचे और इसके बाद जीटीबी अस्पताल लेकिन दोनों ही जगहों पर उन्हें उपचार न मिलने की वजह से प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ा। वहीं पूर्वी गुरु अंगद नगर निवासी राकेश गुप्ता का कहना है कि वे अपने भाई के साथ रेबीज इंजेक्शन के लिए आरएमएल अस्पताल पहुंचे थे लेकिन वहां से उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया कि अभी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।
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इसे लेकर जब अमर उजाला ने पड़ताल को आगे बढ़ाया तो दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेबीज इंजेक्शन को लेकर लंबे समय से परेशानी चल रही है। पिछले वर्ष ही दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य को नोटिस देते हुए इसके प्रबंधन का आदेश दिया था। हालांकि इसे बनाने वाली कंपनियां ही आपूर्ति देने से कतरा रही हैं।
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वहीं उत्तरी नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी का यहां तक कहना है कि सामान्य दिनों में रोजाना 100 से 150 रेबीज के मामले उनके क्षेत्र में आते थे लेकिन कोरोना की वजह से यह संख्या 60 फीसदी तक कम हो गई है। उन्होंने बताया कि रेबीज के टीके खरीदने के लिए निगम कई बार ई टेंडर जारी कर चुका है। उन्होंने बताया कि एंटी रेबीज के टीके पुणे और बैंग्लोर की दो से तीन कंपनियां बनाती हैं। करीब 400 रुपये की कीमत में यह टीका उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि दूसरे देशों में यह 1600 तक रुपये में बेच रही हैं। वहीं इनमें से दो कंपनियां ऐसी हैं जो इनदिनों कोरोना की वैक्सीन में व्यस्त हैं।
जानकारी के अनुसार अकेले उत्तरी दिल्ली नगर निगम को ही सालाना 23 हजार टीके की जरूरत पड़ती है। वर्ष 2019 के आंकड़ों पर गौर करें तो दक्षिणी दिल्ली में करीब सात और उत्तरी दिल्ली में 500 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे।
कोविड अस्पताल में नहीं है सुविधा
दिल्ली के सबसे बड़े लोकनायक अस्पताल के एंटी रेबीज क्लीनिक की ओपीडी में रोजाना 100 से 150 रोगियों को पंजीकृत किया जाता था लेकिन इस बार लोकनायक अस्पताल के कोविड विशेष बनने के बाद यहां मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल में भी इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ये वह अस्पताल हैं जो कि रेबीज को लेकर सबसे ज्यादा केस दर्ज करते हैं।
डॉक्टरों की नहीं है लापरवाही
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. विक्रम का कहना है कि अस्पताल में अगर कोई दवा या इंजेक्शन उपलब्ध है तो मरीज को जरूर मिलता है लेकिन अगर वह उपलब्ध नहीं है तो इसमें डॉक्टर की गलती नहीं है। यह प्रबंधन के स्तर पर कमी है। वहीं आरएमएल अस्पताल के डॉ. विवेक का कहना है कि जब तक अस्पताल में स्टॉक होता है मरीजों को बगैर किसी शिकायत के उपलब्ध कराया जाता है।
क्या है देश की स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार रेबीज की वजह से दुनिया में हर साल होने वाली मौतों में 36 फीसदी हिस्सेदारी भारत की है। हर साल रेबीज के 40 फीसदी तक मामले 15 या उससे कम आयु वर्ग के बच्चों में देखने को मिलते हैं। यह स्थिति तब है जब रेबीज के समय पर इलाज से 100 फीसदी तक मरीज को मरने से बचाया जा सकता है। भारत में रेबीज के चलते सालाना औसतन 20 हजार लोगों की मौत हो रही है। इनमें 90 फीसदी से अधिक मामले ऐसे हैं जिन्हें कुत्ते के काटने से रेबीज हुआ।
दिल्ली में सालाना मौतें
वर्ष मौत
2016 03
2017 12
2018 13
2019 15
(लोकसभा में पेश स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ें)
यह कंपनियां बनाती हैं रेबीज का टीका
देश में पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हैदरबाद स्थित ह्यूमन बायोलॉजिकल इंस्टीट्यूट लिमिटेड, अहमदाबाद की कैडिला हेल्थकेयर, हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड और भरूच स्थित चिरोन बेहेरिंग रेबीज का टीका बनाती है लेकिन इनमें से तीन कंपनियां ऐसी हैं जो इस वक्त कोरोना वैक्सीन के परीक्षण और उत्पादन में जुटी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके चलते और भी ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं।