को-लोकेशन घोटाला मामला: अदालत ने कहा- हर कैदी एक जैसा, वीआईपी कैदी तो सब कुछ चाहते हैं
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा वीआईपी कैदी सब कुछ चाहते हैं। हर कैदी एक जैसा होता है। उन्होंने कहा कि वह जो रही है, उसके कारण उसके साथ अलग व्यवहार करने की जरूरत नहीं है।
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अदालत ने को-लोकेशन घोटाला मामले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने जेल में कुछ सुविधाएं प्रदान करने संबंधी उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जेल में अलग से सुविधा प्रदान नहीं की जा सकती। विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने आदेश दिया कि रामकृष्ण को अगले 28 मार्च को अदालत में पेश किया जाए। अदालत ने जेल में उनके वकील के घर का खाना खाने के अनुरोध को खारिज कर दिया। अदालत ने वकील की उस याचिका को भी ठुकरा दिया, जिसमें उसने आरोपी को मास्क ले जाने की अनुमति मांगी थी।
अदालत ने रामकृष्ण को जेल के अंदर चश्मा, प्रार्थना पुस्तक और दवाओं को ले जानकी मंजूरी प्रदान कर दी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोपी को उसकी 7 दिन की हिरासत की समाप्ति पर अदालत के समक्ष पेश किया और अदालत से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आग्रह किया। सीबीआई के वकील ने कहा कि मामले में जांच जारी है और रामकृष्ण टालमटोल करने वाले और असहयोगी होने के साथ-साथ बेहद प्रभावशाली व्यक्ति भी हैं। अदालत ने सवाल किया क्या आपने पाया है कि वह मास्टरमाइंड है या कोई कठपुतली मास्टर है। सीबीआई के वकील ने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी। जांच अधिकारी ने कहा आरोपी का विभिन्न लोगों से सामना करवाया जा चुका है।
रामकृष्ण के वकील ने कहा कि वह जमानत अर्जी दाखिल कर रहे हैं। इस पर अदालत ने सवाल किया कि क्या यह बहुत जल्दी नहीं है। आपकी अग्रिम जमानत कुछ दिन पहले खारिज कर दी गई थी। क्या यह थोड़ा जल्दी नहीं है? हालांकि उन्होंने कहा जमानत अर्जी दाखिल करना संवैधानिक अधिकार है और यह आरोपी पर निर्भर है। अदालत ने मामले में आरोपी आनंद सुब्रमण्यम की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा हुआ है। पूर्व समूह संचालन अधिकारी (जीओओ) आनंद सुब्रमण्यम द्वारा जमानत आवेदन का विरोध करते हुए सीबीआई ने कहा था कि उन्होंने एक हिमालयी योगी के रूप में प्रतिरूपण किया और रामकृष्ण के निर्णय लेने को प्रभावित किया।
सीबीआई ने रामकृष्ण की अग्रिम जमानत याचिका को अदालत द्वारा खारिज किए जाने के एक दिन बाद 6 मार्च को उन्हें गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने हाल ही में इस मामले में रामकृष्ण से पूछताछ की थी। आयकर विभाग ने इससे पहले मुंबई और चेन्नई में उससे जुड़े विभिन्न परिसरों पर छापा मारा था। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में अनियमितताओं के ताजा खुलासे के बीच को-लोकेशन घोटाले से संबंधित मामले में गिरफ्तारी की गई थी, जिसके लिए मई 2018 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सीबीआई मार्केट एक्सचेंजों के कंप्यूटर सर्वर से स्टॉक ब्रोकरों को सूचना के कथित अनुचित प्रसार की जांच कर रही है।