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ये क्या, केजरीवाल ने रचा एक और इतिहास
राकेश भट्ट/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 21 Jan 2014 01:12 PM IST
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दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के पूर्व से लेकर उसके 23 दिन के कार्यकाल के अद्भुत होने का सिलसिला जारी है।
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दिल्ली के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि मुख्यमंत्री अपनी कैबिनेट के साथ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। सीएम के धरने पर बैठने से कड़ाके की ठंड के बावजूद राजधानी का सियासी पारा चढ़ गया है।
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विपक्षी दलों ने दिल्ली के कानून मंत्री को निशाने पर ले लिया है, वहीं ‘आप’ ने पूरी दिल्ली को धरने में बुलाकर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा दांव खेल दिया है। दिल्ली सरकार के आंदोलनरत होने के दौरान भाजपा व कांग्रेस भी आक्रामक हो गई हैं।
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इस सियासी ड्रामे में हर दल मर्यादा की सीमा लांघ रहा है। मुख्यमंत्री केजरीवाल के गृहमंत्री व पुलिस कमिश्नर पर वसूली कराने के आरोप लगाने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने भी कह दिया कि ‘आप’ की ब्लैकमेलिंग से घबराकर पुलिस ने कानून मंत्री को नामजद न कर अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया।
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एक दूसरे पर जहर उगलने का यह सिलसिला अभी जारी है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की अब सड़कों पर उतरकर यह पूछने की तैयारी है कि मंत्रियों की मनमानी पर पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग व राजधानी के अपराधों को लेकर सरकार अगर सरकार धरना देगी तो सरकार कौन चलाएगा।
कानून मंत्री के सुबूतों से छेड़छाड़ के मामले में भाजपा पहले ही बार काउंसिल से उनका लाइसेंस रद्द करने को लेकर शिकायत कर चुकी है। इस कड़ी में उसका भी धरने-प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू होने वाला है। डॉ. हर्षवर्धन ने धरने के नाम पर इसे केरजीवाल सरकार की अराजकता बताया है। भाजपा ने 27 फरवरी से कानून मंत्री के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दे दी है।
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दरअसल, दोनों ही दलों के मुख्य निशाने पर कानून मंत्री सोमनाथ भारती ही हैं। इसके अलावा कांग्रेस बिजली-पानी की किल्लत व धरने के चलते कांग्रेस पूछेगी कि अगर सरकार धरना देगी तो सरकार कौन चलाएगा। दूसरी ओर ‘आप’ ने दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अधीन करने का अपना चुनावी मुद्दा जनता के बीच पहुंचा दिया है।
धरने में सिर्फ कैबिनेट के शामिल होने की बात करने वाले केजरीवाल ने गृह मंत्रालय की तरफ न बढ़ने देने पर धरना रेल भवन पर शुरू कर दिया और पूरी दिल्ली को धरने में आने का आह्वान कर जनता के मुद्दे से जुड़ाव का नया दांव खेला है। बहरहाल यह तय है अगले एक पखवाड़े तक राजधानी की राजनीति में गरमाहट रहने वाली है, इसमें कोई दल इसलिए पीछे भी नहीं रहना चाहता क्योंकि मिशन 2014 साधना सभी का लक्ष्य है।