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ऐसे चल रहा है कोठों पर रहने वाली महिलाओं के बच्चों का स्कूल, बुनियादी सुविधाओं का है संकट

Tue, 20 Oct 2020 07:47 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 20 Oct 2020 07:47 PM IST
सार

स्कूल में दो साल से लेकर 12-14 साल तक के बच्चे रहते हैं। 2100 से अधिक बच्चे यहां से पढ़कर आगे जा चुके हैं। कई बच्चे, लॉ, मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं...

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Childrens of the women prostitutes studying in the schools dont have food and proper infrastructure
GB Road School - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

'यह जीबी रोड है, इसे दिल्ली का रेड लाइट एरिया कहा जाता है। खैर, अब तो कोरोना संक्रमण की वजह से यहां कामधंधा खत्म सा हो गया है। इक्का-दुक्का स्थायी ग्राहक ही आते हैं। रोटी का बड़ा संकट है। मैं इन्हें यौन कर्मी आदि नहीं कहती, ये वेश्याएं हैं। वे चाहती हैं कि इसी शब्द से उन्हें बुलाया जाए। कोठों के बीच में इनके बच्चों का स्कूल है। इस पर मैं चर्चा नहीं करूंगी कि इनकी मां करीब होकर भी दूर क्यों हैं। स्कूल में 50 बच्चे हैं, इनके लिए अभी तक सामाजिक संगठनों से कुछ न कुछ मिलता रहा है। पता नहीं, आगे क्या होगा। दूध और पढ़ाई का संकट है। हालांकि हम ऐसे संकट से जूझने के लिए जी जान लगा देंगे, मगर वेश्याओं के बच्चों को जीवन में कुछ बनाकर ही दम लेंगे। बड़े होने पर उनके नाम के आगे पीछे कुछ भी लगे, मगर हमारा मकसद उन्हें सक्षम बनाना है।'

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जीबी रोड के कोठों पर अभी करीब 14 सौ वेश्याएं

ये कहना है ललिता एस.ए. का जो पिछले तीस वर्षों से एसपीआईडी-एसएमएस सेंटर (एनजीओ) की मदद से इस इलाके में स्कूल या डे-बोर्डिंग को चला रही हैं। ललिता जी बताती हैं कि जीबी रोड के कोठों पर अभी करीब 14 सौ वेश्याएं हैं। इनमें से कई महिलाएं अपने गांव चली गई थीं। अब वे दोबारा कामधंधा शुरू होने की उम्मीद में वापस लौट रही हैं। इनके बच्चे स्कूल में रोजाना आ रहे हैं। मां को सप्ताह में एक-दो बार ही मिलने दिया जाता है। स्वयंसेवी संगठनों की मदद से अभी तक सभी बच्चों को नियमित तौर पर दूध मिल रहा है। केवल बच्चों को ही नहीं, हम कोठों में जाकर उन महिलाओं तक भी दूध के पैकेट पहुंचा कर आते हैं, जो गर्भ से हैं। वैसे ये बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि कोरोना संक्रमण के दौरान सरकार की ओर से कोठों में रहने वाली महिलाओं के लिए कोई भी मदद नहीं दी गई। इस संकट की घड़ी में सभी वर्गों को सरकार की तरफ से कुछ न कुछ राहत मिली है, मगर इन वेश्याओं की झोली खाली रही। दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम 29 जून को आए थे। बतौर ललिता, हम उन्हें कोठों के भीतर तक ले गए थे। वहां की स्थितियां मंत्री को दिखाई गई। हमने मांग रखी थी कि इन महिलाओं को वह राशन कार्ड जारी किया जाए, जिस पर इन्हें निशुल्क राशन मिल सके।

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वेश्याओं को सरकार से नहीं मिली एक पैसे की मदद: ललिता  

ललिता बताती हैं कि मंत्री ने हमारी बातों को सुना और मदद का भरोसा दिया। अभी कुछ नहीं मिला है। विभिन्न संगठनों की मदद से कोठों में चावल, दाल, चीनी और आटा पहुंचाया जा रहा है। पीड़ा के साथ यह बात कहनी पड़ती है कि इन महिलाओं को सरकार की तरफ से एक पैसे की मदद नहीं मिली है। संस्था के सचिव अवधेश यादव कहते हैं कि कोरोना के बाद हमनें कोठों पर रहने वाली महिलाओं को मदद पहुंचाई है। पुलिस से भी मदद मिलती है। हालांकि अब थोड़ा मुश्किल हो रहा है। ये पता नहीं कि सूखा राशन कब तक जारी रहेगा। अगर जल्द ही सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली तो यहां जीवन का संकट खड़ा हो जाएगा।

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बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे...

स्कूल में 50 बच्चे हैं। ललिता के मुताबिक, अभी नए बच्चों को डे स्कॉलर के तौर पर नहीं ले रहे हैं। ज्यादातर स्थाई हैं। नया बच्चा आता है तो उसे क्वारंटीन में भेजा जाता है। बच्चों को नियमित योगा कराया जा रहा है। विज्ञान और गणित की ऑनलाइन क्लास लगती है। कई बार ऑनलाइन माध्यम के जरिए ही स्टोरी सुनाई जाती है। दिक्कत ये है कि इन बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए उतने संसाधन नहीं हैं, जितने होने चाहिए। स्कूल में दो साल से लेकर 12-14 साल तक के बच्चे रहते हैं। 2100 से अधिक बच्चे यहां से पढ़कर आगे जा चुके हैं। कई बच्चे, लॉ, मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल की बिल्डिंग देखेंगे तो संसाधनों की कमी का अहसास आपको खुद ही जाएगा। कम संसाधनों के बीच सभी बच्चों को उनकी पसंद का खाना देते हैं।

जब ये बच्चे 14 साल के होते हैं तो इन्हें चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के हस्तक्षेप से सरकारी होम में दाखिल करा दिया जाता है। इस स्कूल की नई बिल्डिंग और नियमित फंड का इंतजाम होना बहुत जरूरी है। इसके लिए सरकार से कुछ मदद मिल जाए तो वेश्याओं के बच्चों को अपने पैरों पर खड़े होने में बड़ी मदद मिल सकेगी।

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