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बच्चों की देखरेख वाली संस्थाओं पर सरकार सख्त, जनता से मांगा सहयोग

Sun, 13 Mar 2016 07:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 13 Mar 2016 07:46 PM IST
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Child care institutions, the government desperately sought cooperation from the public
Arvind Kejriwal

दिल्ली सरकार गोद लेने-देने वाली एजेंसियों, बाल-बालिका गृह और बाल निरीक्षण गृह पर सख्ती करने जा रही है। बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए काम करने वाली सभी संस्थाओं को मान्यता देने और पंजीकरण का काम किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 में जरूरी किया गया है।

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महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी एजेंसियों को अगले 15 दिन में आवेदन के लिए कहा है। ऐसा नहीं करने व गैर पंजीकृत संस्था चलाते पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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आवेदन की एक प्रति जिला किशोर कल्याण परिषद के कार्यालय में भी जमा करानी है। महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक ने सार्वजनिक सूचना जारी कर जनता से भी इसमें सहयोग मांगा है। नागरिकों से कहा गया है कि बच्चों की देखरेख या गोद लेने-देने वाली संस्था कोई बिना पंजीकरण या मान्यता के पाई जाती है, तो उसकी सूचना दें।

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पंजीकरण न कराने पर होगी जेल

Child care institutions, the government desperately sought cooperation from the public
Arvind Kejriwal

अगर कोई बाल कल्याण संस्था बिना पंजीकरण के पाई जाती है तो किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा-42 में कार्रवाई की जाएगी, जिसमें एक साल तक जेल या कम से कम एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों किया जा सकता है। ऐसी संस्थाएं जो पुराने अधिनियम में रजिस्टर हैं, उन्हें दुबारा आवेदन की जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि राजधानी में बड़ी संख्या में अनाथ या देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बड़ी संख्या में संस्थाएं चल रही हैं। ये संस्थाएं अलग-अलग जगह से अनुदान लेती हैं, लेकिन सरकार में पंजीकृत नहीं हैं। 

जब कोई घटना इन केंद्रों पर हो जाती है तो सरकार से कोर्ट जवाब तलब करता है। ऐसे ही एक मामले में संपूर्ण बरुआ बनाम भारत के केंद्र शासित प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की संस्थाओं का पंजीकरण नए अधिनियम में दिशा निर्देशों के तहत जानकारी लेकर अनिवार्य किया है।

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