Delhi: नेशनल मेडिकल कमीशन का चेयरमैन बनाने के नाम पर ठगा, पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
आरोपियों ने पीड़ित को बकायदा एक फर्जी नियुक्ति पत्र भी पीड़ित को दे दिया था। इसकी जांच होने पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव ने मामले की शिकायत पुलिस से की। छानबीन के बाद पुलिस ने खत्री इकबाल को वडोदरा गुजरात और हिमांशु को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया।
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कई मंत्रालयों, आयोगों में बड़े-बड़े पद पर नियुक्ति करवाने का झांसा देकर लोगों को ठगने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खुलासा किया है। गिरोह के दो आरोपी गुजरात निवासी खत्री इकबाल अहमद (50) और कुशी नगर, हाता, यूपी निवासी हिमांशु पांडेय (35) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी मोटी रकम लेकर गुजरात मेडिकल काउंसिल के सदस्य को नेशनल मेडिकल कमीशन का चेयरमैन बनवाने का झांसा दे रहे थे।
आरोपियों ने पीड़ित को बकायदा एक फर्जी नियुक्ति पत्र भी पीड़ित को दे दिया था। इसकी जांच होने पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव ने मामले की शिकायत पुलिस से की। छानबीन के बाद पुलिस ने खत्री इकबाल को वडोदरा गुजरात और हिमांशु को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया।
जांच में पता चला है कि इसी तरह के अपराध में राजकोट, गुजरात क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपियों को वर्ष 2021 में गिरफ्तार किया था। दिसंबर 2022 में जेल से बाहर आने के बाद दोनों फिर सक्रिय हो गए। पुलिस ने इनसे वारदात में इस्तेमाल चार मोबाइल फोन व अन्य सामान बरामद किया है। इनसे पूछताछ की जा रही है।
अपराध शाखा के विशेष आयुक्त रविंद्र सिंह यादव ने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव चंदन कुमार ने पिछले दिनों अपराध शाखा को एक शिकायत देते हुए एक फर्जी आदेश की कॉपी भी पुलिस को सौंपी थी। फर्जी पत्र में लिखा था कि नेशनल मेडिकल कमीशन के चेयरमैन सुरेश चंद्र शर्मा का कार्यकाल वर्ष 2023 के जनवरी में खत्म हो रहा है और गुजरात मेडिकल काउंसिल के सदस्य डॉ. सुरेश के पटेल को नेशनल मेडिकल कमीशन का नया चेयरमैन नियुक्त किया जाता है। जबकि मंत्रालय के रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। इसके बाद पुलिस उपायुक्त विचित्र वीर, एसीपी राकेश कुमार शर्मा व अन्य की टीम ने जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
हाईप्रोफाइल लोगों से ही करते थे ठगी
आरोपी बेहद हाईप्रोफाइल लोगों से ही ठगी करते थे। शुरुआत में हिमांशु ने कोलकाता के रहने वाले राजू के साथ मिलकर ठगी शुरू की थी। राजू ने ही उसे ठगी के तरीके और फर्जी नियुक्ति पत्र बनाना सिखाया था। राजू की मौत के बाद उसने खत्री इकबाल को अपने साथ मिला लिया। वह दूसरे लोगों के नाम पर मोबाइल सिमकार्ड निकलवाकर उसे कुछ समय के लिए इस्तेमाल कर फेंक देते थे। आरोपियों से उनके शिकार रहे अन्य पीड़ितों की जानकारी ली जा रही है।
पेशे से वकील है हिमांशु पांडेय
ठग हिमांशु पांडेय के पिता कुशी नगर के कॉलेज में लेक्चरर हैं, वहीं इसका बड़ा भाई अमेरिका के लॉस एंजेलिस यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ वैज्ञानिक है। खुद हिमांशु ने वकालत की पढ़ाई की है। कई साल पहले परिवार ने उसे दिल्ली यूपीएससी की पढ़ाई के लिए भी भेजा था। लेकिन यहां वह अपराध की दुनिया में आ गया। परिजन भी हिमांशु की हरकतों से परेशान है।
वर्क फ्रॉम होम के नाम पर महिला से ठगी
उत्तर पूर्वी जिला साइबर सेल ने साढ़े तीन करोड़ की ठगी करने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपी वर्क फ्रॉम होम में पार्ट टाइम जॉब का झांसा देकर ठगी कर रहे थे। पुलिस पकड़े गए जालसाजों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन व दस्तावेज बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अजय (33) और मुकेश (37) के रूप में हुई है। नंद नगरी की रहने वाले संगीता ने साइबर सेल थाने में ठगी में शिकायत देते हुए बताया था कि उनके पास एक नंबर से वर्क फ्रॉम होम जॉब के लिए फोन आया। आरोपी ने यूट्यूब लिंक को शेयर व लाइक करने पर कैश बैक देने की बात कही। इसके बाद उन्हें टेलीग्राम ऐप जोड़ लिया गया। झांसे में लेकर उसने 45 हजार रुपये निवेश कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें कैश बैक देना बंद कर दिया और उसका नंबर ब्लॉक कर दिया। इस पर संगीता ने साइबर पुलिस को जानकारी दी।