CBSE पेपर लीक में बड़ा खुलासाः तौफीक ने बच्चों को बेचा था पेपर, हिरासत में चल रही पूछताछ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पेपर लीक के चलते सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की गणित व अर्थशास्त्र की परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा के विरोध में दिल्ली-एनसीआर के छात्रों का प्रदर्शन आज तीसरे दिन भी जारी है। इस बीच आज इस केस में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार तौफीक नाम के एक शख्स ने बवाना के बच्चों को लीक पेपर बेचा था। पुलिस ने तौफीक के साथ ही प्रिंसिपल को भी हिरासत में ले लिया है और पूछताछ कर रही है।
दूसरी ओर सीबीएसई ने बयान जारी किया है कि कक्षा 12वीं के हिंदी (इलेक्टिव) के जिस पेपर के सोशल मीडिया पर लीक होने की बात हो रही है वह फेक पेपर है असली नहीं है।
A fake question paper of Class 12- Hindi (Elective) is being circulated on Social Media platforms like Whatsapp, YouTube etc, it is not the real one: CBSE statement. #CBSEPaperLeak
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) March 31, 2018
वहीं इस बीच दिल्ली पुलिस ने अपनी तीन टीमें स्कूल, परीक्षा केंद्रों और बाहरी दिल्ली में रहने वाले बच्चों के घरों में भेजी गई है। पुलिस का कहना है कि अब तक इस मामले में 60 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और बच्चों व ट्यूटरों के 50 मोबाइल भी जब्त किए जा चुके हैं।
Delhi Police has sent 3 teams to schools, exam centers & residences of students in outer Delhi. More than 60 people have been questioned till now out of which 10 are tutors of coaching centers, more than 50 cell phones of students & tutors have been seized till now#CBSEPaperLeak
शनिवार को छात्र पूर्वी दिल्ली के प्रीत विहार में प्रदर्शन कर रहे हैं जिससे प्रीत विहार और उसके आसपास के इलाकों की सड़कों पर भारी जाम लग गया है।
#CBSEPaperLeak: Students protest outside CBSE office in #Delhi's Preet Vihar, nearby road jammed. pic.twitter.com/EGUuwD8Hcd
— ANI (@ANI) March 31, 2018
CBSE की फूल प्रूफ सिस्टम से दो कदम आगे रहे पेपर लीक करने वाले
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को पर्चों में सेंध लगने का अंदेशा परीक्षाएं शुरू होने से पहले ही लग गया था। बोर्ड को पहले ही जानकारी मिली थी कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर बोर्ड के नाम से फर्जी आईडी (ce.cbse2018@gmail.com) से मेल की जा रही है।
इसके माध्यम से केंद्रों को वेरिफिकेशन के लिए प्रश्न पत्र की कॉपी मेल पर देने को कहा जा रहा था। इस सब जानकारी के बाद भी बोर्ड ने लापरवाही बरती और परीक्षा केंद्रों को महज अलर्ट भेजकर खानापूर्ति कर दी। बोर्ड अपने सिस्टम को फूल प्रूफ मानते हुए संतुष्ट रहा कि पेपर लीक नहीं हो सकता। पेपर लीक करने वाले सीबीएसई से भी दो कदम आगे रहे और पूरे सिस्टम को ही ध्वस्त कर दिया।
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक केके चौधरी की ओर से 4 मार्च को देश व विदेश के सभी परीक्षा केंद्रों को एक अलर्ट जारी किया गया था। ‘अमर उजाला’ को इस अलर्ट की जानकारी मिल गई थी। लिहाजा इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
अलर्ट में परीक्षा केंद्रों को आगाह किया था कि केंद्रों पर बोर्ड के नाम से फर्जी मेल से प्रश्न पत्र की कॉपी साझा करने के लिए कहा जा रहा है। सेंटरों को कहा गया था कि इस तरह के फर्जी मेल पर ध्यान न दें क्योंकि बोर्ड परीक्षा केन्द्रों से प्रश्न पत्र की कॉपियां वेरिफिकेशन के लिए नहीं मांगता है।
इस मेल को किन्हीं शरारती तत्वों की ओछी हरकत बताया गया था। सेंटरों को इस तरह के मेल का जवाब न देने व प्रश्न पत्र की प्रतियों को न भेजने की हिदायत दी गई थी। अब जानकार सवाल उठा रहे हैं कि जब इस तरह के फर्जी ईमेल का परीक्षा शुरू होने से पहले ही पता चल गया था तो बोर्ड ने सजगता क्यों नहीं बरती।
ई-मेल आईडी की पहचान होने के बावजूद उसे गंभीरता से नहीं लिया। न ही मामला दर्ज कराने की जरूरत समझी। कयास हैं कि संभवत: किसी सेंटर पर बोर्ड का अलर्ट देर से मिला हो और वहां से फर्जी ईमेल पर प्रश्न पत्र भेज दिए गए हों।