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CBSE: हिमाचल प्रदेश से लीक हुआ था 12वीं के अर्थशास्त्र का पर्चा, केंद्र अधीक्षक समेत तीन गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 07 Apr 2018 09:45 PM IST
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सीबीएसई की12वीं का अर्थशास्त्र का पर्चा लीक करने के आरोपी
- फोटो : हिमांशु सोनी
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दिल्ली पुलिस ने 12वीं कक्षा के हाथ से लिखे व्हाट्स एप पर देशभर में घूम रहे अर्थशास्त्र के लीक पेपर की गुत्थी को पूरी तरह सुलझा लिया है। यह पर्चा हिमाचल प्रदेश के ऊना से लीक हुआ था।
पुलिस ने वहां के डीएवी सेनटेनरी पब्लिक स्कूल के शिक्षक राकेश कुमार, क्लर्क अमित शर्मा और चपरासी अशोक को गिरफ्तार किया है। राकेश कुमार तीन स्कूलों का केंद्र अधीक्षक था। बैंक से पेपर लेने, केंद्र तक पहुंचाने व परीक्षाएं ठीक से कराने की जिम्मेदारी केंद्र अधीक्षक की होती है। इन्होंने अर्थशास्त्र का पेपर तीन दिन पहले लीक कर दिया था।
दिल्ली पुलिस ने तीनों को शनिवार को कोर्ट में पेश कर पांच दिन के रिमांड पर लिया है। अब तक की पूछताछ में पैसे के लिए पेपर लीक करने की बात सामने नहीं आई है।
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अपराध शाखा के विशेष पुलिस आयुक्त आरपी उपाध्याय ने बताया कि सीबीएसई मुख्यालय में 26 मार्च (इस दिन अर्थशास्त्र का पेपर हआ था) को एक लिफाफा आया था। इसमें अर्थशास्त्र के पेपर की हाथ से लिखी हुई चार इमेज थीं। सीबीएसई ने इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस से की।
दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार की देखरेख में एसआईटी बनाई। जांच करनाल व चंडीगढ़ समेत कई शहरों होते हुए ऊना पहुंची। यहां से पुलिस ने डीएवी स्कूल के शिक्षक राकेश कुमार (39) को पकड़ा। उसने बताया कि वह ऊना के पेखुबेला स्थित जवाहर नवोदय पब्लिक स्कूल का केंद्र अधीक्षक है। इस सेंटर के अंदर तीन स्कूल आते हैं।
उसकी ड्यूटी ऊना स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से पेपर लेकर केंद्र तक पहुंचाने व परीक्षा कराने थी। सेंटर में जाने से पहले पेपर बैंकों के लॉकरों में सुरक्षित रखे जाते हैं।
इससे पूछताछ के बाद उसके दो साथियों डीएवी स्कूल के क्लर्क अमित शर्मा व चपरासी अशोक को गिरफ्तार कर लिया गया। ये दोनों राकेश की बैंक से पेपर लाने व सेंटर पहुंचाने आदि कामों में मदद करते थे। अर्थशास्त्र का पेपर व्हाट्स एप के जरिये पूरे देश में लीक हुआ था।
आशंका है कि आरोपियों ने और भी पेपर लीक किए हों। संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि आरोपियों को पिछली रात ही गिरफ्तार किया गया है। अन्य पेपर लीक करने को लेकर भी इनसे पूछताछ की जाएगी।
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पुलिस ने वहां के डीएवी सेनटेनरी पब्लिक स्कूल के शिक्षक राकेश कुमार, क्लर्क अमित शर्मा और चपरासी अशोक को गिरफ्तार किया है। राकेश कुमार तीन स्कूलों का केंद्र अधीक्षक था। बैंक से पेपर लेने, केंद्र तक पहुंचाने व परीक्षाएं ठीक से कराने की जिम्मेदारी केंद्र अधीक्षक की होती है। इन्होंने अर्थशास्त्र का पेपर तीन दिन पहले लीक कर दिया था।
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दिल्ली पुलिस ने तीनों को शनिवार को कोर्ट में पेश कर पांच दिन के रिमांड पर लिया है। अब तक की पूछताछ में पैसे के लिए पेपर लीक करने की बात सामने नहीं आई है।
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अपराध शाखा के विशेष पुलिस आयुक्त आरपी उपाध्याय ने बताया कि सीबीएसई मुख्यालय में 26 मार्च (इस दिन अर्थशास्त्र का पेपर हआ था) को एक लिफाफा आया था। इसमें अर्थशास्त्र के पेपर की हाथ से लिखी हुई चार इमेज थीं। सीबीएसई ने इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस से की।
दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार की देखरेख में एसआईटी बनाई। जांच करनाल व चंडीगढ़ समेत कई शहरों होते हुए ऊना पहुंची। यहां से पुलिस ने डीएवी स्कूल के शिक्षक राकेश कुमार (39) को पकड़ा। उसने बताया कि वह ऊना के पेखुबेला स्थित जवाहर नवोदय पब्लिक स्कूल का केंद्र अधीक्षक है। इस सेंटर के अंदर तीन स्कूल आते हैं।
उसकी ड्यूटी ऊना स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से पेपर लेकर केंद्र तक पहुंचाने व परीक्षा कराने थी। सेंटर में जाने से पहले पेपर बैंकों के लॉकरों में सुरक्षित रखे जाते हैं।
इससे पूछताछ के बाद उसके दो साथियों डीएवी स्कूल के क्लर्क अमित शर्मा व चपरासी अशोक को गिरफ्तार कर लिया गया। ये दोनों राकेश की बैंक से पेपर लाने व सेंटर पहुंचाने आदि कामों में मदद करते थे। अर्थशास्त्र का पेपर व्हाट्स एप के जरिये पूरे देश में लीक हुआ था।
आशंका है कि आरोपियों ने और भी पेपर लीक किए हों। संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि आरोपियों को पिछली रात ही गिरफ्तार किया गया है। अन्य पेपर लीक करने को लेकर भी इनसे पूछताछ की जाएगी।
ऐसे लीक किया था पेपर
सीबीएसई की12वीं का अर्थशास्त्र का पर्चा लीक करने के आरोपी
- फोटो : हिमांशु सोनी
विशेष पुलिस आयुक्त आरपी उपाध्याय ने बताया कि केंद्र अधीक्षक राकेश कुमार 23 मार्च (इस दिन कंप्यूटर साइंस का पेपर हुआ था) को अमित शर्मा व अशोक के साथ ऊना स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में कंप्यूटर साइंस का पेपर लेने गया था।
तभी उसने अर्थशास्त्र के पेपर का एक बंडल निकाल लिया था। बैंक से बाहर आकर इसने बंडल अमित शर्मा व अशोक को दे दिया। दोनों बंडल लेकर डीएवी स्कूल चले गए, जबकि राकेश कुमार कंयूटर साइंस का पेपर लेकर सेंटर चला गया । अमित शर्मा व अशोक ने अर्थशास्त्र के पेपर के बंडल को सावधानीपूर्वक खोला और उसमें एक पेपर निकाल लिया।
इसके बाद पेपर की फोटो खींचकर राकेश कुमार को भेज दिया। राकेश कुमार ने ये पेपर अपनी एक छात्रा को दिया। राकेश इस छात्रा को ट्यूशन पढ़ाता था। छात्रा ने हाथ से पेपर को कागज पर लिख लिया। राकेश कुमार ने अमित शर्मा व अशोक से बंडल लेकर अपने पास रख लिया। राकेश कुमार जब 26 मार्च (इस दिन अर्थशास्त्र का पेपर हुआ था) को बैंक में अर्थशास्त्र का पेपर लेने गया तो उसने बंडल को अन्य बंडलों में मिला दिया था।
राकेश कुमार ने अपने मोबाइल से ओरिजनल पेपर की कॉपी डिलीट कर दी थी और छात्रा के हाथ से लिखे गए पेपर की मोबाइल से फोटो खींच ली थी। इसके बाद उसने पेपर चंडीगढ़ में रहने वाली महिला रिश्तेदार के पास भेज दिया। महिला रिश्तेदार का बेटा भी 12वीं कक्षा के पेपर दे रहा है। महिला रिश्तेदार ने इस पेपर को आगे अपने रिश्तेदारों के पास भेज दिया। इस तरह यह पेपर व्हाट्स एप के जरिए पूरे देश में फैल गया।
पैसे की बात से किया इनकार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राकेश कुमार ने शुरुआती पूछताछ में बताया है कि उसकी छात्रा अर्थशास्त्र में कमजोर थी। इस कारण उसने अर्थशास्त्र के पेपर को बंडल से निकाला था। हालांकि पुलिस छात्रा को अर्थशास्त्र के पेपर देने को लेकर राकेश कुमार व छात्रा की दोस्ती के बिंदु से भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच में राकेश कुमार ने पैसे के लिए पेपर देने की बात से इंकार किया है।