Delhi : सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई का दावा- नई आबकारी नीति बनाने में केजरीवाल के इशारे पर हुए सभी अहम फैसले
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि दिल्ली की नई आबकारी नीति बनाने के लिए सभी महत्वपूर्ण फैसले सीएम अरविंद केजरीवाल के कहने पर किए गए थे। इसमें तत्कालीन उपमुख्यमंत्री व आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया की भी मिलीभगत थी।
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि दिल्ली की नई आबकारी नीति बनाने के लिए सभी महत्वपूर्ण फैसले सीएम अरविंद केजरीवाल के कहने पर किए गए थे। इसमें तत्कालीन उपमुख्यमंत्री व आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया की भी मिलीभगत थी।
जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ के समक्ष हलफनामा दाखिल कर सीबीआई ने गिरफ्तारी को चुनौती देने व जमानत मांगने वाली केजरीवाल की याचिकाओं का विरोध किया। सीबीआई ने कहा कि अंतरिम जमानत मिलने पर वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और घोटाले की जांच में बाधा डाल सकते हैं। पीठ ने जवाब के लिए केजरीवाल को दो दिन का समय दिया है। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दिल्ली हाईकोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर एक और हलफनामे के लिए समय मांगा। कोर्ट ने इस आग्रह को मान लिया और सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की है।
राजनीतिक रूप से सनसनीखेज बना रहे मामला
सीबीआई ने कहा कि केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामले को राजनीतिक रूप से सनसनीखेज बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि विभिन्न अदालतों की ओर से बार-बार पारित आदेशों में प्रथम दृष्टया अपराधों के होने की पुष्टि की गई है। सीबीआई ने कहा, केजरीवाल ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आबकारी नीति 2021-22 में हेरफेर किया और गोवा में आम आदमी पार्टी के चुनाव संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए साउथ ग्रुप से 100 करोड़ रुपये की अवैध रिश्वत के बदले बिना किसी तर्क के थोक विक्रेताओं के लाभ मार्जिन को 5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया।
- सीबीआई ने कहा कि भले ही केजरीवाल के पास आबकारी समेत कोई भी मंत्री पद नहीं था, पर सरकार व पार्टी के सभी फैसले उनकी सहमति व निर्देशों पर किए जाते थे। उन्हीं की अध्यक्षता में कैबिनेट ने आबकारी नीति के खुदरा व थोक मॉडल में बदलाव के लिए मंत्री समूह का गठन किया। सिसोदिया आबकारी मंत्री के तौर पर इस समूह का नेतृत्व कर रहे थे।
गोवा चुनाव में खर्च से जुड़े सवालों से बच रहे केजरीवाल : सीबीआई
दिल्ली शराब नीति मामले में गिरफ्तारी को चुनौती देने और जमानत मांगने वाली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिकाओं का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कहा कि केजरीवाल गोवा चुनाव में आम आदमी पार्टी के खर्च से जुड़े सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं।
जांच एजेंसी ने हलफनामे में दावा किया कि केजरीवाल ने 2021-22 के गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान अपनी पार्टी के लगभग 44.54 करोड़ रुपये के अवैध धन हस्तांतरण और इस्तेमाल के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देने से परहेज किया। सीबीआई ने कहा, आबकारी नीति 25 मई, 2021 को अधिसूचित की गई। सह-आरोपी बुच्चीबाबू गोरंटला, अभिषेक बोइनपल्ली और अरुण आर पिल्लई 20 मई, 2021 को चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली आए थे और 21 मई, 2021 को उत्तम गैल्वा कंपनी के गेस्ट हाउस में आरोपी विजय नायर, सरकारी गवाह दिनेश अरोड़ा और दिल्ली के कुछ शराब व्यवसायी के साथ बैठक की थी। यह भी आरोप लगाया गया है कि उक्त गेस्ट हाउस याचिकाकर्ता के पीए बिभव कुमार ने बुक कराया था।
सीएम पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मिली
सीबीआई ने शुक्रवार को अदालत को बताया कि उसने कथित आबकारी घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप विधायक दुर्गेश पाठक पर मुकदमा चलाने की मंजूरी हासिल कर ली है।
राउज एवन्यू कोर्ट की विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा के समक्ष यह दलील दी गई, जिन्होंने मामले की सुनवाई 27 अगस्त के लिए तय की है। इस मामले में केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 27 अगस्त को खत्म होने वाली है। अदालत ने 12 को सीबीआई को मामले में केजरीवाल और पाठक पर मुकदमा चलाने के लिए जरूरी मंजूरी हासिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया था।