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Delhi NCR News: हल्दी, कुमकुम और चंदन के संग गणेशोत्सव का स्वागत, पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की मांग तेज
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पूर्वी दिल्ली में गणेश मूर्तियों के दाम 10 प्रतिशत बढ़े
प्रथम चौहान
पूर्वी दिल्ली। कृष्ण जन्मोत्सव के बाद अब पूर्वी दिल्ली में भगवान गणेश के आगमन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। दुर्गापुरी, गोकुलपुरी, शाहदरा और खजूरी जैसे इलाकों में गणेश मूर्तियां बिकनी शुरू हो गई हैं। इस साल मूर्तियों के दाम पिछले वर्ष से 10 प्रतिशत बढ़ गए हैं।
बाजारों में एक हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं। दुकानदार बताते हैं कि सफेद मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी दो तरह की मूर्तियां हैं। मिट्टी की मूर्तियां पानी में जल्दी घुल जाती हैं, जबकि पीओपी की मूर्तियों को अधिक समय लगता है। गोकुलपुरी के एक दुकानदार के अनुसार, एक फुट से लेकर 12 फीट तक की मूर्तियां बिक रही हैं। इस बार केदारनाथ धाम और नंदी महाराज पर विराजे गणेश की मूर्तियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं। मूर्ति विक्रेता निखिल ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की मांग कई गुना बढ़ी है।
पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की बढ़ती लोकप्रियता
लोनी रोड के दुकानदार महाराष्ट्र और कोलकाता से मिट्टी लाकर मूर्तियां बनाते हैं। ये मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय प्राकृतिक मिट्टी से तैयार होती हैं। इन्हें रंगने के लिए हल्दी, कुमकुम, चंदन और प्राकृतिक सब्जियों के रंगों का उपयोग होता है। इससे पानी में जहरीले रसायन नहीं मिलते। घर पर विसर्जन करने वाले लोग छोटे आकार की पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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प्रथम चौहान
पूर्वी दिल्ली। कृष्ण जन्मोत्सव के बाद अब पूर्वी दिल्ली में भगवान गणेश के आगमन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। दुर्गापुरी, गोकुलपुरी, शाहदरा और खजूरी जैसे इलाकों में गणेश मूर्तियां बिकनी शुरू हो गई हैं। इस साल मूर्तियों के दाम पिछले वर्ष से 10 प्रतिशत बढ़ गए हैं।
बाजारों में एक हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं। दुकानदार बताते हैं कि सफेद मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी दो तरह की मूर्तियां हैं। मिट्टी की मूर्तियां पानी में जल्दी घुल जाती हैं, जबकि पीओपी की मूर्तियों को अधिक समय लगता है। गोकुलपुरी के एक दुकानदार के अनुसार, एक फुट से लेकर 12 फीट तक की मूर्तियां बिक रही हैं। इस बार केदारनाथ धाम और नंदी महाराज पर विराजे गणेश की मूर्तियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं। मूर्ति विक्रेता निखिल ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की मांग कई गुना बढ़ी है।
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पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की बढ़ती लोकप्रियता
लोनी रोड के दुकानदार महाराष्ट्र और कोलकाता से मिट्टी लाकर मूर्तियां बनाते हैं। ये मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय प्राकृतिक मिट्टी से तैयार होती हैं। इन्हें रंगने के लिए हल्दी, कुमकुम, चंदन और प्राकृतिक सब्जियों के रंगों का उपयोग होता है। इससे पानी में जहरीले रसायन नहीं मिलते। घर पर विसर्जन करने वाले लोग छोटे आकार की पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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