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Ghaziabad: उपहार में जीडीए की जमीन देने के मामले में आईएएस समेत छह पर केस दर्ज, कोरोड़ों के बंटरबांट की ऐसे लगी भनक

Sun, 22 May 2022 06:33 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, मसूरी (गाजियाबाद)
संवाद न्यूज एजेंसी, मसूरी (गाजियाबाद) Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 22 May 2022 06:33 PM IST
सार

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की गोविंदपुरम डी. ब्लॉक में स्थित 625 वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन इंद्रगढ़ी गांव के फारुख को उपहार में देने के मामले में आईएएस अधिकारी डीपी सिंह समेत छह लोगों पर मसूरी थाना में केस दर्ज हुआ है। 10 साल पहले उपहार में जमीन दी गई थी। डीपी सिंह के जीडीए में ओएसडी रहने के दौरान जमीन देने का यह मामला है।

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Case filed against six including ias officer for giving gda land as gift
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) रहे आईएएस अधिकारी डीपी सिंह समेत छह लोगों के खिलाफ मसूरी थाना में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। डीपी सिंह फिलहाल नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ( एनडीएमसी ) में निदेशक हैं। उन पर जीडीए की गोविंदपुरम डी. ब्लॉक में स्थित 625 वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन इंद्रगढ़ी गांव के फारुख को उपहार में देने का आरोप है।

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मामले को लेकर इलाके के फारुख को गांव के लोगों ने कब्रिस्तान में जीडीए की सड़क न बनने देने के लिए पैरोकार बनाया था। उसने 2012 में जमीन को लेकर पैरोकारी नहीं की और ग्रामीण केस हार गए। सूचना का अधिकार (आरटीआई) से जमीन उपहार में देने की जानकारी मिलने पर खुलासा हुआ कि यह सब गैर कानूनी तरीके से किया गया। जिसमें फिर इंद्रगढ़ी के हसरत अली और अब्दुल रहमान ने केस दर्ज कराया। इसमें डीपी सिंह, फारुख, आमना, मिशकिना, वाजिद अली और जाहिद अली नामजद हैं। डीपी सिंह को छोड़ अन्य आरोपी फारूख के परिवार के ही हैं।
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हसरत अली ने बताया 1994 में जीडीए इंद्रगढ़ी के कब्रिस्तान के बीच से सड़क बनाना चाहता था। मुस्लिम समाज के लोग इसके विरोध में थे। उन्होंने जीडीए के खिलाफ कोर्ट में केस दायर कर दिया। गांव के ही फारुख को इसका पैरोकार बनाया गया। इस विवाद से कुछ समय पहले कब्रिस्तान के पास ही जीडीए ने फारुख की जमीन अधिग्रहीत की थी। उसने जीडीए के अफसरों से सांठगांठ कर ली। तत्कालीन ओएसडी ने उसे प्लॉट दिला दिया। इसके बदले उसने पैरवी नहीं की जिससे जीडीए केस जीत गया और कब्रिस्तान में सड़क बन गई।

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झूठ बोलकर किया जमीन का खेल
हसरत अली ने बताया कि फारुख को जमीन देने के बारे में पूछे जाने पर जीडीए के अफसरों ने कहा कि उसकी जो जमीन अधिग्रहीत की गई है, उसके बदले में उसे गोविंदपुरम में प्लॉट दिया गया है। इसे पुनर्वास योजना के तहत जमीन की अदला-बदली बता दिया गया। इस पर गांव के लोग चुप बैठ गए।

आरटीआई से खुली धोखाधड़ी की पोल
प्राधिकरण के अफसरों की बात ग्रामीणों के गले नहीं उतर रही थी। कारण यह था कि फारुख की जिस जमीन का अधिग्रहण हुआ, वह कब्रिस्तान के पास और सिर्फ 150 वर्ग मीटर थी। उसे जो जमीन दी गई, वह महंगे इलाके गोविंदपुरम में थी और चार गुना से ज्यादा ( 625 वर्ग मीटर ) थी। इस पर गांव के लोगों ने प्राधिकरण में आरटीआई लगाकर पूछा कि फारुख को उसकी जमीन का मुआवजा मिला था या नहीं। छह फरवरी 2014 को जवाब आया, उसे मुआवजा दिया गया था। इसी से पोल खुल गई। जिस जमीन का मुआवजा मिल चुका था, उसके बदले में जमीन कैसे दी जा सकती है।

केस दर्ज होने में लगे सात महीने
आरटीआई में मिले जवाब को आधार बनाकर अब्दुल रहमान ने एसपी देहात को शिकायती पत्र 27 अक्तूबर 2021 को दिया। सीओ से इसकी जांच कराई गई। इसमें सात महीने लग गए। जांच रिपोर्ट मिल जाने पर एसपी देहात ने केस दर्ज करने के निर्देश मसूरी थाना पुलिस को दिए। अब एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच थाना पुलिस करेगी।

केस दर्ज होने से पहले क्लीन चिट
एसपी देहात डॉ. ईरज रजा का कहना है कि शिकायती पत्र की जांच में साफ हो गया है कि धोखाधड़ी के इस मामले में जीडीए के किसी अधिकारी या कर्मचारी की कोई भूमिका नहीं मिली है। तहरीर के आधार पर केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन आगे की जांच में फारुख और उसके परिवार के लोगों को ही आरोपी मानकर कार्रवाई होगी।

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