{"_id":"5831ab5a4f1c1bbf04b39833","slug":"cab-signaling-system-would-help-prevent-accidents","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेल दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार होगी कैब सिग्नलिंग प्रणाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेल दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार होगी कैब सिग्नलिंग प्रणाली
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 21 Nov 2016 12:55 AM IST
सार
भारतीय रेल ने तीन स्वदेशी कंपनियों के साथ मिलकर ट्रेन प्रोटेक्शन सिग्नलिंग सिस्टम (टीकैस) किया है विकसित
चूक होने पर यह प्रणाली खुद ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकने का करती है काम
प्रधानमंत्री ने तकनीकी सिस्टम का किया बारीकी से अध्ययन
विज्ञापन
ट्रेन प्रोटेक्शन सिग्नलिंग सिस्टम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय रेल ने तीन स्वदेशी कंपनियों के साथ मिलकर ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन युक्त कैब सिग्नलिंग सिस्टम (टिकैस) विकसित किया है। इससे रेलवे दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार साबित हो सकता है। इस सिस्टम का हैदराबाद में ट्रायल भी हो चुका है।
विज्ञापन
इस सिस्टम को लोको पायलट की मदद के लिए तैयार किया गया है। किसी कारण वश यदि पायलट से ब्रेक लगाने में चूक हो जाती है तो इस प्रणाली से ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
रेलवे के डायरेक्टर सिगनल आरडीएसओ ललित मनसुखानी ने अमर उजाला को बताया कि सूरजकुंड में आयोजित तीन दिवसीय रेल विकास शिविर में इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस तकनीक की विस्तार से जानकारी दी गई है।
विज्ञापन
मनसुखानी ने बताया कि हाई स्पीड ट्रेन चालकों को इन ट्रैक साइड सिग्नलों को देखना मुश्किल होता है। ऐसे में पायलट द्वारा सिग्नल जंप करने और ट्रेन दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इनके समाधान के रूप में भारतीय रेल ने तीन स्वदेशी कंपनियों के साथ मिलकर ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन युक्त कैब सिग्नलिंग सिस्टम (टीकैस) विकसित किया है।
इस सिस्टम के जरिये ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने और दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार साबित होगी। इसका उपयोग घने कोहरे और घुमावदार ट्रैक के लिए भी हो सकता है। इसका ट्रायल हैदराबाद के निकट 250 किमी. रेलखंड पर सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
सिस्टम की ऐसी होगी कार्यप्रणाली:
डायरेक्ट सिग्नल मनसुखानी ने बताया कि इस सिस्टम के जरिये सिग्नलिंग संबंधित जमीनी सूचनाएं लोकोमोटिव कैब में पहुंचानी होता है। रेडियो कम्युनिकेशन आधारित इस सिस्टम में लोकोमोटिव यूनिट अपनी लोकेशन, स्पीड, स्टेशनों व अन्य ट्रेनों के लोकोमोटिव को भेजती रहती है।
पायलट को यूजर फ्रेडली मॉनीटर पर यह पता चलता रहता है कि कहां किस स्पीड पर ट्रेन चलानी है और कहां रुकना है। मनसुखानी का दावा है कि इस सिस्टम के जरिये यदि किसी कारण लोको पायलट से ब्रेक लगाने में चूक हो जाती है तो यह ऑटोमैटिक ब्रेक लगाकर ट्रेन को लाल सिग्नल पार होने से रोक देता है। इसमें तकनीक के जरिये स्पीड लिमिट को कंट्रोल करने, ट्रेनों को सुरक्षित तरीके से हाई स्पीड दौड़ाने और लाल सिग्नल को जंप करने से रोकने में मददगार है।
प्रधानमंत्री ने बारीकी से किया अध्ययन:
रविवार को सूरजकुंड पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैब सिग्नलिंग प्रणाली और एडवांस विजन सिस्टम तकनीक की बारीकी से जानकारी ली और रेलमंत्री सुरेश प्रभु से चर्चा कर उक्त सुरक्षा प्रणालियों को रेलवे में अपनाने की संभावना जताई। टाटा पावर एसईडी के अधिकारी शुक्तिजन सिंह राव और मनसुखानी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने दोनों तकनीक की सराहना की और तकनीकों का प्रदर्शन भी देखा।