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नीचे सड़क, ऊपर मेट्रो: बवाना के डबल-डेक स्टेशन को एनएचएआई की हरी झंडी का इंतजार, जानें क्या है पूरा प्लान
Tue, 25 Aug 2026 10:23 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Tue, 25 Aug 2026 10:23 PM IST
सार
बवाना इंडस्ट्रियल एरिया सेक्टर-3, 4 में मेट्रो स्टेशन सड़क के ऊपर बनाने की योजना है। डीएमआरसी यहां 185 मीटर लंबे एलिवेटेड रोड और मेट्रो को एकीकृत कर डबल-डेक ढांचा तैयार करेगा। एनएचएआई की मंजूरी नहीं मिली तो सामान्य स्टेशन बनाया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : AI
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विस्तार
बवाना इंडस्ट्रियल एरिया सेक्टर-3, 4 में बनने वाला दिल्ली मेट्रो स्टेशन सामान्य नहीं होगा। यहां नीचे सड़क और उसके ऊपर मेट्रो चलाने के लिए एकीकृत डबल-डेक ढांचा बनाने की योजना है। खास बात यह है कि इस स्टेशन की लंपसम लागत में ही 185 मीटर लंबे एलिवेटेड रोड स्ट्रक्चर को शामिल किया गया है। हालांकि, इस डबल-डेक योजना को जमीन पर उतारने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की मंजूरी अहम कड़ी है। हालांकि डीएमआरसी के दस्तावेज में कहा गया है कि एनएचएआई से डबल-डेक स्ट्रक्चर को मंजूरी नहीं मिली तो यहां सामान्य मेट्रो स्टेशन बनाया जाएगा।
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रिठाला-कुंडली कॉरिडोर के पैकेज में बवाना इंडस्ट्रियल एरिया सेक्टर-3,4 स्टेशन को डबल-डेक स्ट्रक्चर के हिस्से के रूप में रखा गया है। यह पूरा पैकेज करीब 11.299 किलोमीटर लंबा है और इसमें दस एलिवेटेड स्टेशन शामिल हैं। डबल-डेक योजना के तहत सड़क के लिए अलग एलिवेटेड रोड और मेट्रो के लिए अलग ढांचा खड़ा करने के बजाय दोनों को एकीकृत करने की योजना है। यानी सड़क यातायात के लिए प्रस्तावित 185 मीटर का एलिवेटेड हिस्सा नीचे रहेगा और उसके ऊपर मेट्रो स्टेशन का ढांचा होगा।
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मंजूरी नहीं मिली तो बदल जाएगा स्टेशन का ढांचा
डीएमआरसी ने संभावित स्थिति को अपने दस्तावेज में पहले ही दर्ज कर दिया है। दस्तावेज के मुताबिक, यदि एनएचएआई से डबल-डेक स्ट्रक्चर को मंजूरी नहीं मिलती है तो बवाना सेक्टर-3,4 में टिपिकल यानी सामान्य स्टेशन बनाया जाएगा। ऐसी स्थिति में मौजूदा लंपसम मद में बदलाव होगा और मुख्य स्टेशन ढांचे के साथ फुटओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा।
डीएमआरसी ने संभावित स्थिति को अपने दस्तावेज में पहले ही दर्ज कर दिया है। दस्तावेज के मुताबिक, यदि एनएचएआई से डबल-डेक स्ट्रक्चर को मंजूरी नहीं मिलती है तो बवाना सेक्टर-3,4 में टिपिकल यानी सामान्य स्टेशन बनाया जाएगा। ऐसी स्थिति में मौजूदा लंपसम मद में बदलाव होगा और मुख्य स्टेशन ढांचे के साथ फुटओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा।
पूरे पैकेज में 11.3 किमी का काम
डीएमआरसी के इस पैकेज में सिर्फ बवाना स्टेशन ही नहीं बनाना है इसमें यूईआर-दो से बवाना इंडस्ट्रियल एरिया सेक्टर-1, 2 तक करीब 11,299 मीटर का एलिवेटेड निर्माण शामिल है। इसके तहत रोहिणी सेक्टर-25, 26, 31, 28, 29-30, 35, बरवाला, रोहिणी सेक्टर-34 और बवाना इंडस्ट्रियल एरिया के दो स्टेशनों समेत कुल दस स्टेशन बनाए जाने हैं। परियोजना के तहत डिजाइन से लेकर निर्माण, परीक्षण समेत अन्य पूरी प्रक्रिया को 36 महीने की कुल अवधि में पूरा करना होगा।
डीएमआरसी के इस पैकेज में सिर्फ बवाना स्टेशन ही नहीं बनाना है इसमें यूईआर-दो से बवाना इंडस्ट्रियल एरिया सेक्टर-1, 2 तक करीब 11,299 मीटर का एलिवेटेड निर्माण शामिल है। इसके तहत रोहिणी सेक्टर-25, 26, 31, 28, 29-30, 35, बरवाला, रोहिणी सेक्टर-34 और बवाना इंडस्ट्रियल एरिया के दो स्टेशनों समेत कुल दस स्टेशन बनाए जाने हैं। परियोजना के तहत डिजाइन से लेकर निर्माण, परीक्षण समेत अन्य पूरी प्रक्रिया को 36 महीने की कुल अवधि में पूरा करना होगा।
सात साल बाद बदले मार्ग के लिए फिर जांची गई जमीन
रिठाला-बवाना-नरेला मेट्रो मार्ग के लिए पहले 2017 में जमीन की जांच कराई गई थी। इसके बाद बदले हुए मार्ग के लिए दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच दोबारा जमीन की जांच की गई। इस दौरान 20 जगहों पर 40 मीटर तक गहराई में जाकर मिट्टी की जांच की गई। जमीन के नीचे पानी की स्थिति भी देखी गई। जांच में अलग-अलग जगहों पर 6 से 14 मीटर की गहराई पर पानी मिला। साथ ही भूकंप के दौरान जमीन के कमजोर पड़ने की आशंका भी जांची गई।
रिठाला-बवाना-नरेला मेट्रो मार्ग के लिए पहले 2017 में जमीन की जांच कराई गई थी। इसके बाद बदले हुए मार्ग के लिए दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच दोबारा जमीन की जांच की गई। इस दौरान 20 जगहों पर 40 मीटर तक गहराई में जाकर मिट्टी की जांच की गई। जमीन के नीचे पानी की स्थिति भी देखी गई। जांच में अलग-अलग जगहों पर 6 से 14 मीटर की गहराई पर पानी मिला। साथ ही भूकंप के दौरान जमीन के कमजोर पड़ने की आशंका भी जांची गई।