ऑनलाइन बुकिंग से होगा घर बैठे श्राद्ध, डॉलर में दीजिए दक्षिणा
अभी तक आपने मोबाइल और कपड़े की ऑनलाइन शॉपिंग करते तो सुना होगा, लेकिन अब पितृ पक्ष में श्राद्ध के लिए भी इंटरनेट से बुकिंग हो रही है। जी हां, यूरोप, यूएई समेत पश्चिमी देशों में बसे भारतीय युवा, इंजीनियर भारतीय संस्कृति और आस्था से हाइटेक माध्यम से जुड़े रहे हैं।
ऑनलाइन श्राद्ध पर पंडित की बुकिंग से लेकर मनी ट्रांसफर तक सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। खास बात यह है कि विदेशी युवाओं की पहली पसंद गंगा घाट या फिर फल्गु नदी है, जहां वे वेबकैम के माध्यम से अपने पितरों का सीधे लाइव श्राद्ध करवा रहे हैं।
इंटरनेट के बाद सोशल मीडिया सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। शुरुआत दोस्तों को सर्च करने और चैटिंग से होने के बाद शापिंग और अब श्राद्ध भी इस कतार में शामिल हो गया है।
ऑनलाइन श्राद्ध की बुकिंग और सात समुंदर पार लाइव पिंडदान करवाने में अमेरिका, आस्ट्रेलिया, दुबई, इंग्लैंड, सिंगापुर आदि देशों के युवाओं ने पहल की है।
सोशल मीडिया संग वेबसाइट से पैकेज
सोशल मीडिया पर फ्री, तो ऑनलाइन पिंडदान नाम की वेबसाइट पर श्राद्ध के पैकेज हिट हो रहे हैं। ऑनलाइन पिंडदान में एनआरआई व व्यस्त लोगों के लिए बुकिंग शुरू हुई है, जिसका आंकड़ा अब तक करीब दस हजार पार कर चुका है।
यह सर्विस वाराणसी, गया व इलाहाबाद में दी जा रही हैं, जिसमें ऑनलाइन मृतक से रिश्ता, उम्र, अंतिम तारीख, मृतक की फोटो व पिंडदान करवाने वाले के समुदाय आदि की जानकारी मांगी जा रही है।
इन वेबसाइट में टोल फ्री नंबर के साथ पंडों के नंबर भी दिए गए हैं। जबकि सोशल मीडिया पर आईआईटी, आईआईएम सहित अन्य विश्वविद्यालयों के पास-आउट छात्रों ने फेसबुक पर अपने ग्रुप में ऑनलाइन पिंडदान से सर्विस बुक करायी है।
वेब कैमरे से श्राद्ध का लाइव प्रसारण
विदेश में बसे युवाओं में श्राद्ध को लेकर काफी रुझान देखने को मिल रहा है। जान-पहचान और इंटरनेट पर मंदिरों के नंबरों से लेकर पंडितों के नंबर तक सर्च करने के बाद, युवा पूर्वजों के नाम पर घर बैठे श्राद्ध करवा रहे हैं।
इन युवाओं की उम्र 35 तक हैं, जो ज्यादातर पेशे से इंजीनियर या फिर अन्य तकनीकी स्तर की नौकरी कर रहे हैं। और ऑनलाइन अकाउंट या वेस्टर्न मनी से डॉलर भारतीय करेंसी में ट्रांसफर कर रहे हैं।
विदेशी युवा पारंपरिक विधान के अनुसार, गंगा घाट या फल्गु नदी के तट पर श्राद्ध करवाना पसंद कर रहे हैं। इसमें सामान से लेकर आने-जाने के खर्च के अलावा सौ से हजार डॉलर तक दक्षिणा मिल रही है।
पिंडदान के दौरान वेबकैम से लाइव या फोन के माध्यम से मंत्रोच्चार सुनाए जा रहे हैं। मैंने अब तक करीब दस से पंद्रह ऐसे श्राद्ध करवाए हैं। कई पूर्व छात्रों के अलावा जान-पहचान के लोगों ने भी पंडितों के नंबर के साथ पिंडदान की जानकारी मांगी थी।
पंडित के नंबर मिलने के बाद विदेश में बैठकर पितरों को ऑनलाइन श्राद्ध दे रहे हैं। बेशक यहां न हो पर एनआरआई लोगों में खास क्रेज है। सोशल मीडिया पर भी ग्रुप में श्राद्ध को शेयर किया जा रहा है।