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यहां तो बिना भूकंप के ही गिर चुकी हैं कई इमारतें

Tue, 28 Apr 2015 06:36 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 28 Apr 2015 06:36 PM IST
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Buildings collapsed without earth quake in faridabad

भूकंपीय जोन चार की संवेदनशीलता के बाद भी यहां निर्माणों में कई प्रकार की अनदेखी की जा रही है। इस औद्योगिक शहर में तो भूकंप आए बिना ही कई बार इमारत गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई श्रमिकों की जान जा चुकी है।

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यदि नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लॉनिंग और औद्योगिक सुरक्षा विभाग का रवैया सख्त नहीं हुआ तो ऐसे हादसे बढ़ते रहेंगे। भूकंप आ जाए तो क्या हालत होगी, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।
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इनमें से कुछ इमारतें बनते-बनते गिरीं तो कुछ बनने के बाद। एक तो नामचीन ग्रुप की भी बिल्डिंग जमींदोज हो गई थी। शहर में यदि कोई व्यक्ति अपने मकान की मरम्मत करवा रहा है तो वह नगर निगम और हुडा से अनुमति लेने की जरूरत नहीं समझता।
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आर्किटेक्ट से भी सलाह नहीं लेता। सीधे निर्माण शुरू करता है, जिसका परिणाम कई बार हादसे के रूप में आता है। निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने जैसे कई हादसे शहर देख चुका है।

यह इन निर्माणकर्ताओं के लिए कोई हृदय विदारक घटना नहीं होती। बल्कि त्रासदी उन मजदूरों के परिवार के लिए होती है जो चंद रुपये की दिहाड़ी मजदूरी करते हुए कुछ लोगों की गलती के कारण अपनी जान से हाथ धोने को मजबूर होते हैं।

सूचना अधिकार कार्यकर्ता रविंद्र चावला कहते हैं इन हादसों के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र जिम्मेदार है। चाहे वह जिला प्रशासन हो, नगर निगम हो, टाउन एंड कंट्री प्लॉनिंग, औद्योगिक सुरक्षा या फिर पुलिस।

सबकी मिलीभगत से ही अवैध निर्माण होते हैं। वह गिरते हैं। निर्माण साइटों पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता। भूकंपरोधी निर्माण की तो यहां कोई बात ही नहीं करता।


शहर में बिल्डिंग गिरने के बड़े हादसे
-15 अगस्त 2009: सेक्टर-15 में छत गिरने से तीन की मौत।
-09 सितंबर 2009: एनएच-एक स्थित सिटी मार्केट ढहने से छह की मौत।
-अक्तूबर 2009: सेक्टर 24 में नाल्को स्टील की निर्माणाधीन छत गिरने से एक की मौत।
-वर्ष 2011-श्रीराम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की बिल्डिंग गिरने से आठ मरे।
-24 नवंबर 2012 सरूरपुर में निर्माणाधीन फैक्ट्री की बिल्डिंग गिरने से दो की मौत।
-10 दिसंबर 2012: पाली-मोहब्बताबाद क्रेशर जोन में दीवार गिरने से चार की मौत।
-11 दिसंबर 2012: सेक्टर-88 में स्कूल की बिल्डिंग गिरने से तीन मजदूरों की मौत।
09 फरवरी 2015: सरूरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में निर्माणाधीन इमारत की शटरिंग गिरने से एक की मौत।

‘कुछ लोग सिविल इंजीनियरिंग मानकों एवं आर्किटेक्ट के निर्देशों की परवाह किए बिना भविष्य में हादसों के लिए न्योता दे रहे है। कई लोग इतनी लालच कर लेते हैं कि उनका निर्माण कंपाउंडेबल (जुर्माना देकर वैधता) लायक भी नहीं रहता। नियमों का उल्लंघन भविष्य में उन्हीं के लिए भारी पड़ता है। निर्माण कार्य में जल्दीबाजी ज्यादा खतरनाक है।’

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