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उद्योग बंधु की बैठक तय करेगी बोर्ड का एजेंडा, अधिकारी के समक्ष रखे जाएंगे कई प्रस्ताव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Updated Wed, 31 Oct 2018 04:10 PM IST
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लगातार शहर के औद्योगिक स्वरूप बदलता जा रहा है। इस बदलाव को रोकने व निवेश को बढ़ाने के लिए प्राधिकरण बोर्ड बैठक से पहले जिला उद्योग बंधुओं की एक महत्वूपर्ण बैठक होने जा रही है। बैठक में औद्योगिक संस्थाओं द्वारा कई मुद्दों को जिला अधिकारी के समक्ष रखा जाएगा। माना जा रहा है कि यह बैठक ही बोर्ड में रखे जा रहे कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों की दिशा भी तय कर सकता है।
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एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन द्वारा इस बार जिला अधिकारी के समक्ष 20 मुद्दों को रखा जाएगा। जिसमे औद्योगिक सेक्टरों के स्वरूप में हो रहे बदलाव को प्रमुखता से रखा जाएगा। जिसमे औद्योगिक भूखंडो के व्यवसायिक और संस्थागत में बदला गया और बदला जा रहा है। जो कि सहीं नहीं है। इसे रोका जाए यह सिलसिला विगत कई वर्षो से चला रहा है।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नेहाटा ने बताया कि सरकार व प्राधिकरण के अफसरों ने उद्योगों के विकास की बजाए रिहाएशी, व्यवसायिक और संस्थागत क्षेत्रों के विकास के लिए काम करना शुरू कर दिया है। उद्योगों के विकास की लगातार अनदेखी की जा रही है।
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मैन्यूफ्चरिंग यूनिटों को हटाकर उनके स्थान पर व्यवसायिक व संस्थागत काम किया जा रहा है। यह सवाल काफी अहम है। यदि इस मुद्दे पर जिला अधिकारी की तरफ से कोई निर्णय लिया जाता है तो उद्यमियों को काफी फायदा मिलेगा। इस मुद्दे को बोर्ड में प्रस्ताव के रूप में भी रखा जा सकता है।
दरअसल, नोएडा प्राधिकरण किसी भी मसले को बोर्ड बैठक में रखकर उसका अंतिम निर्णय करता है। कई मामलों में यह उचित नहीं होता। नोएडा के औद्योगिक नगरी होने के नाते यहा के उद्यामियों को बोर्ड में प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके अलावा व्यापार कर की सचल दल के अधिकारियों द्वारा जबरन परेशान करना, औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण का सौंदर्यीकरण
औद्योगिक भूखंडो का किया जाए अडिट
जनपद में तीन प्राधिकरण है। तीनों प्राधिकरण एवं यूपीएसआईडीसी में औद्योगिक भूखंडो की अडिट की जाए और इस बात की जानकारी की जाए कि उद्योगों के लिए आवंटित किए गए कितने भूखंडो पर उद्योग चल रहे है। कितने भूखंडो में औद्योगिक इकाईयां नहीं चल रही है। जिन पर उद्योग नहीं चल रहे है उनको जरूरत मंद उद्यमियों को आवंटित किया जाए। इसके साथ ही उद्योगों में काम करने वाले करीब छह लाख श्रमिको की जरूरतों को पूरा किया जाए।