हर तरफ से घिरे केजरीवाल, दो तरफा चुनावी टेंश्ान!
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लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में व्यस्त आम आदमी पार्टी के नेताओं पर विरोधियों ने एक के बाद एक निशाने लगाए हैं।
49 दिनों तक दिल्ली में शासन करने वाली आम आदमी पार्टी के संयोजक सभी के निशाने पर हैं। एक ओर जहां बनारस संसदीय सीट पर केजरीवाल के विरोध में पोस्टर वार छिड़ा हुआ है तो वहीं दिल्ली में भी विरोधी खेमा उन्हें घेरे हुए है।
लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने की पूरी उम्मीद है ऐसे में चुनावी व्यस्तता के बीच अपना गढ़ बचाने की जद्दोजहद AAP को करनी होगी।
'सरकार नहीं चला सकते केजरीवाल'
दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और चांदनी चौक लोकसभा से उम्मीदवार डॉ. हर्षवर्धन ने आम आदमी पार्टी को धरना पार्टी करार दिया है।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी विदेशी शक्तियों के इशारों पर भारत को अस्थिर करना चाहती है। सरकार चलाना अरविंद केजरीवाल के बस की बात नहीं हैं। उन्हें सत्याग्रह में अपना समय व्यतीत करना चाहिए।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से धोखा किया है। वे सरकार नहीं चला पाए। इसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
'मोदी के लिए मुख्तार से समझौता'
हर्षवर्धन ने कहा कि केजरीवाल ने बिजली-पानी के मुद्दे पर दिल्ली की जनता को ठगा है। बिजली-पानी के बिना लोगों कि जीना दुश्वार हो गया है यह सब केजरीवाल सरकार के इस्तीफे का ही नतीजा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह जनता के गुस्से का ही परिणाम है कि वह केजरीवाल पर हमले कर रही है।
हर्षवर्धन ने कहा कि केजरीवाल नरेंद्र मोदी को हराने के लिए अपराधी मुख्तार अंसारी से भी हाथ मिलाने को तैयार हैं। लोकसभा चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी को अपनी हैसियत का अंदाजा हो जाएगा। जनता ने इसे सिरे से नकार दिया है।
'दिल्ली में फिर बनेगी AAP की सरकार'
उधर, आम आदमी पार्टी ने भी एक बार फिर कांग्रेस-भाजपा पर निशाना साधा है। AAP ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पार्टियों से दिल्ली में सरकार बनाने के बारे में पूछा था, लेकिन दोनों ने ही गोलमोल जवाब दिया।
कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कांग्रेस व भाजपा ने विधान सभा को निलंबित करने और दोबारा चुनाव न कराने को सही साबित करने की कोशिश की। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि आपसी मिलीभगत से कांग्रेस और भाजपा दिल्ली को चुनी हुई सरकार से महरूम करना चाहती है।
इसकी वजह यह है कि दोनों को पक्का यकीन हो गया है कि नए चुनाव में AAP पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। इसी डर से दोनों पार्टियां विधानसभा चुनाव से भाग रही हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।