टिकट न मिलने से भाजपा में बगावत, कई छोड़ेंगे पार्टी!
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भाजपा का टिकट न मिलने से नाराज हबीबुर्रहमान ने फिरोजपुर झिरका व पुन्हाना से दया भडाना ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। यह जानकारी हबीबुर्रहमान व दया भडाना ने अमर उजाला संवाददाता से बातचीत के दौरान दी।
उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही इनेलो छोड भाजपा में शामिल हुए नूंह के पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान फिरोजपुर झिरका से भाजपा का टिकट ना मिलने से नाराज थे इसलिए उन्होंने निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया है।
बताया जाता है कि उनके चुनाव लडने से भाजपा को इस सीट पर काफी नुकसान हो सकता है। आपकों बता दें कि 2005 के विधानसभा चुनाव में हबीबुर्रहमान नूहं विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे।
...तो ये है असली वजह!
इसके बाद वह अभी कुछ दिन पूर्व इनेलो छोड भाजपा में फिरोजपुर झिरका से भाजपा की टिकट पर चुनाव लडने की मंशा से पार्टी में शामिल हो गए थे। लेकिन पार्टी ने उनको दरकिनार करते हुए राव इन्द्रजीत के करीबी हजका छोड़ भाजपा में शामिल हुए आलम मुंडल को टिकट दे दिया।
इसी के चलते वह पार्टी से नाराज हो गए और उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर फिरोजपुर झिरका सीट पर चुनाव लडने का ऐलान कर दिया। वहीं पुन्हाना से बसपा की टिकट पर पिछला विधानसभा चुनाव महज 1350 वोटों चुनाव हारने वाली पूर्व सांसद अवतार सिंह भडाना की छोटी बहन दया भडाना ने भी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का पूरा मन बना लिया है।
उनका कहना है कि पुन्हाना की जनता से मिल रहे अपार जनसमर्थन के चलते वह निर्दलीय चुनाव लडने को तैयार है। हालांकि कई पार्टियों के टिकट के ऑफर की बात उन्होंने स्वाकर करते हुए कहा कि उन्होंने फिलहाल किसी पार्टी का टिकट लेने से इंकार कर दिया है पुन्हाना की जनता जो भी फैसला कर आगे की रणनीति पर विचार करेंगी।
निर्दलीय चुनाव लड़ेगा भाजपा सांसद का बेटा!
सोहना से भाजपा का टिकट पाने से चूके भाजपाई सांसद चौ. सुखबीर सिंह जौनापुरिया के बेटे अशोक जौनापुरिया ने मंगलवार को अपने समर्थकों की पंचायत आमंत्रित की है। जिसमें आगामी चुनावी रणनीति का फैसला लिया जाएगा।
संकेत हैं कि अशोक जौनापुरिया सोहना सीट से निर्दलीय चुनाव लडेंगे। वहीं 24 सितंबर को गुर्जर बाहुल्य गांव अभयपुर में भी एक विशेष समुदाय की पंचायत होगी। जिसमें गुर्जर समुदाय द्वारा बड़ा निर्णय लिए जाने की संभावना है। ऐसा होने से क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण बदलने के काफी आसार हैं। जिसका खामियाजा गुर्जर समाज को उठाना पड सकता हैं।
उल्लेखनीय हैं कि सोहना विधानसभा सीट गुर्जर व मेव बाहुल्य है। जिसमें गुर्जरों की संख्या करीब 30 हजार हैं जबकि मेव वोटर लगभग 40 हजार हैं। गुर्जर समाज के नेतागण राजनीतिक पार्टियों द्वारा टिकट न देने से काफी नाराज हैं तथा उन्होनें बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिऐ हैं।