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सारे हथकंडे अपनाए, पर जेल से बच न पाए सीनियर आईएएस राजीव कुमार

Tue, 19 Apr 2016 09:54 AM IST
अरीश रिज़वी/अमर उजाला, गाजियाबाद
अरीश रिज़वी/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Tue, 19 Apr 2016 09:54 AM IST
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besides all tricks Senior IAS could not escape from the jail

सीनियर आईएएस राजीव कुमार ने जेल से बचने के लिए करीब सवा तीन साल तक तमाम हथकंडे अपनाए, मगर बच नहीं पाए। आखिरकार उन्हें जेल जाना पड़ा। 20 नवंबर 2012 को सजा मिलने के बाद उसी दिन जमानत अर्जी डाली, तीन साल सजा होने के कारण सीबीआई कोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई।

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इसके बाद सजा के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज की तो उन पर फिर सरेंडर की तलवार लटक गई। इससे बचने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट चले गए, जहां से उन्हें गिरफ्तारी पर चार हफ्तों की मोहलत ही मिल पाई, जिसकी मियाद 25 अप्रैल को खत्म हो रही थी।
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जेल जाने से पहले राजीव कुमार करीब 10 मिनट कोर्ट के कटघरे में खड़े रहे, उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं। उन्हें डासना जेल के मुलाहिजा बैरक नंबर सात में रखा गया है, जहां 35 बंदी और हैं। जेल सूत्रों का कहना है कि उन्होंने शाम में खाना नहीं खाया।

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राजीव कुमार प्रमुख सचिव (कार्मिक) और मेरठ मंडल के कमिश्नर भी रहे हैं

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राजीव कुमार प्रमुख सचिव (कार्मिक) और मेरठ मंडल के कमिश्नर भी रहे हैं। डासना जेल जाने वाले वह दूसरे सीनियर आईएएस हैं। इससे पहले एनआरएचएम घोटाले में प्रदीप शुक्ला डासना जेल गए थे।

उल्लेखनीय है कि सीबीआई के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने नीरा यादव और तत्कालीन प्रमुख सचिव (कार्मिक) राजीव कुमार को प्लॉट आवंटन के दो मामलों में तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई थी।14 मार्च को नीरा यादव के सरेंडर के बाद ही माना जा रहा था कि अब राजीव कुमार भी कोर्ट में सरेंडर कर सकते हैं।

सोमवार को वह कोर्ट पहुंचे और अधिवक्ता के माध्यम से समर्पण की अर्जी दी। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा केबीच डासना जेल भेज दिया गया। आईएएस राजीव कुमार पर आरोप है कि पहले उन्हें प्लाट संख्या बी-86/51 एलॉट किया गया था। इसे उन्होंने ए-36/44 में कन्वर्ट करा लिया। इसके बाद इसे भी उन्होंने 27/14 ए में कन्वर्ट करा लिया।

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