किरण बेदी का पार्टी में है भाजपा का प्लान 'B'
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सूत्रों का कहना है कि नेताओं ने जितना सोचा था वैसी भीड़ इस बार रैली में नहीं जुटी। इस रैली में भीड़ पीएम की रैलियों में आने वाली भीड़ से कहीं कम थी। दिल्ली पुलिस के अनुसार रैली में करीब 40000 लोग इकट्ठा हुए थे जबकि बीजेपी को 1 लाख के भीड़ की उम्मीद थी।
यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि रैली में पीएम ने पूरे 38 मिनट बिना नाम लिए आम आदमी पार्टी के बारे में बोला। यही नहीं मोदी ने आप के चुनावी वादों को भी दोहराया था।
इस पूरे भाषण में मोदी ने 38 बार गरीब बोला था जो लोग हमेशा से आप की प्रमुखता में रहे हैं। इसके साथ ही मोदी ने सस्ती बिजली देने का भी वादा किया जो केजरीवाल का सबसे अहम वादा रहा है।
दिसंबर से ही फेल चल रहा है बीजेपी का हर दांव
रामलीला मैदान की रैली के असफल होने से पहले ही पूरे शीतकालीन संसद अधिवेशन के दौरान भाजपा के सभी सांसद दिल्ली में दम-खम दिखा चुके थे। देशभर से करीब 120 सांसदों ने दिल्ली में बसे प्रवासी लोगों को आकर्षित करने के लिए कई नुक्कड़ सभाएं की पर उनमें भीड़ नहीं जुटी।
इसके साथ ही साध्वी निरंजन ज्योति और साक्षी महाराज जैसे सांसदों के बयानों ने पार्टी को शर्मसार करने और क्षवि खराब करने का काम जरूर किया। बीजेपी में किस तरह सांसदों से नुक्कड़ सभाएं करवाई गईं इसकी बानगी एक बीजेपी सांसद का कथन है।
इसके अनुसार वह संसद में बैठे थे तब उन्हें एक नुक्कड़ सभा को संबोधिक करने को कहा गया। सांसद का कहना है कि तब तक उन्हें ये भी नहीं पता था कि उन्हें किसे और कहां संबोधित करना है। वहां मात्र 50 लोगों की भीड़ थी।
किरण को पार्टी में लाकर बीजेपी ने सुधारी भूल
बीजेपी में किरण बेदी के आने और उनके खिलाफ हो रहे विरोध के चलते हो सकता है आपको पता न चला हो, लेकिन यह सब केवल बीजेपी की भूल सुधार है। यहां तक कि बेदी को सीएम पद का दावेदार बनाया जाना अपने आप में गलती को सुधारना है।
भाजपा का बेदी को पार्टी में लाना पार्टी के टेस्ट किए हुए फॉर्मूले के फेल हो जाने के कारण हुआ। ऐसा नहीं है कि पार्टी अपनी खुशी से बेदी को पार्टी में लाई है या उसके पास ये पहला और आखिरी विकल्प था।
जब भाजपा का अचूक और हर राज्य में आजमाया हुआ फॉर्मूला दिल्ली में काम करता नजर नहीं आया तो बीजेपी को प्लान बी के तहत किरण बेदी को पार्टी में लाना पड़ा और सीएम पद का उम्मीदवार बनाना पड़ा।
मोदी नहीं बन सके दिल्ली भाजपा का चेहरा
सूत्र कहते हैं कि जनवरी के शुरूआत तक बीजेपी की स्ट्रेटजी थी कि जैसे महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में मोदी को चेहरा बनाकर सफलता पाई वही दिल्ली में भी करेंगे।
एक नेता के अनुसार पार्टी ने अपने पुरानी स्ट्रेटजी पर ही काम करने को सोचा था, जिसमें सीएम पद का कोई उम्मीदवार नहीं होगा। कैंपेन का चेहरा पीएम मोदी होंगे। लेकिन अचानक ही बेदी पार्टी में शामिल हो गईं और सबकी बॉस बन गईं।
सूत्रों का कहना है कि पुरानी स्ट्रेटजी से पीछे हटने की दो वजहें हो सकती हैं। पहली तो ये कि 10 जनवरी को रामलीला मैदान में हुई पीएम की रैली में अपेक्षित भीड़ का न जुटना। दूसरा बीजेपी के लगभग सभी 282 सांसदों द्वारा आयोजित की गई नुक्कड़ सभाओं में लोगों का न आना।
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता का कहना है कि पीएम की रामलीला मैदान वाली रैली इसलिए की गई थी क्योंकि केजरीवाल ने इस मैदान में कई रैलियां की हैं और इससे जनता में संदेश जाए कि इस बार बीजेपी को कोई रोक नहीं सकता।