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JNU विवाद बना रोड़ा, बस्सी नहीं बनेंगे सूचना आयुक्त

Fri, 19 Feb 2016 01:38 PM IST
Updated Fri, 19 Feb 2016 01:38 PM IST
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bassi name withdrawn from information commissioners list due to jnu row

हमेशा विवादों से घिरे रहने वाले दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी का नाम सूचना आयुक्त पद से वापस ले लिया गया है। बता दें कि अगले महीने बीएस बस्सी दिल्ली के कमिश्नर पद से रिटायर हो रहे हैं, जिसके बाद उन्हें सूचना आयुक्त बनाया जाना था।

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बता दें कि सरकार ने उन्हें सूचना आयोग में रिक्त तीन पदों में से एक पद पर नियुक्त किए जाने के लिए नामांकित हुए थे। जानकारी के अनुसार सूचना आयुक्त की नियुक्ति एक समिति करती है जिसकी अध्यक्षता पीएम करते हैं और इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता भी शामिल रहते हैं।
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कहा जा रहा है कि जेएनयू मामले में दिल्ली पुलिस की भूमिका काफी विवादित रही है और सरकार नहीं चाहती कि बस्सी के सूचना आयुक्त बनने पर केंद्र को कोई नई आलोचना झेलनी पड़े। सूत्रों के अनुसार बजट सत्र आने वाला है ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि बस्सी के नाम को लेकर बजट सत्र में हंगामा हो जिसके चलते बस्सी का नाम सूचना आयुक्त की लिस्ट से हटा दिया गया।

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RTI कार्यकर्ताओं ने पीएम को पत्र लिख बस्सी को पद ना देने को कहा था

bassi name withdrawn from information commissioners list due to jnu row

दिल्ली पुलिस क‌मिश्नर बीएस बस्सी को सूचना आयुक्त की रेस से बाहर किए जाने की एक वजह तो बजट सत्र में विपक्ष के हंगामे का डर है। वहीं दूसरी बड़ी वजह ये भी है कि आरटीआई कार्यकर्ताओं के एक समूह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बस्सी के सूचना आयुक्त बनाए जाने का विरोध जताया।

बस्सी के सूचना आयुक्त बनने का विरोध जिन आरटीआई कार्यकर्ताओं ने किया उनमें अरुणा रॉय, निखिल डे, अंजली भारद्वाज, शेखर सिंह, अमृता जौहर शामिल हैं। इन सामाजिक कार्यकर्ताओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने 19 फरवरी को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और निवेदन किया कि बस्सी को सूचना आयुक्त न बनाया जाए।

आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने आरोप लगाया कि जेएनयू के अध्यक्ष कन्हैया के मामले में दिल्ली पुलिस ने केंद्र सरकार का नुमाइंदा बनकर काम किया। यही वजह है कि पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया समेत पत्रकारों पर हमला हुआ।

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