पढ़िए, अवतार सिंह भड़ाना के ‘त्यागपत्र’ की पूरी स्क्रिप्ट
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कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं फरीदाबाद के पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना के ‘त्यागपत्र’ की स्क्रिप्ट लोकसभा चुनाव में ही लिख दी गई थी। तीन माह के इंतजार के बाद भी जब 50 भितरघातियों में से किसी पर कार्रवाई नहीं की गई तो उन्होंने कांग्रेस को सलाम नमस्ते कहना उचित समझा।
लोकसभा चुनाव में उन्हें पलवल, एनआईटी, तिगांव एवं बल्लभगढ़ में जबरदस्त भितरघात का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों ने भी उन्हें हराने का काम किया।
इसलिए सीएम को या तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए या फिर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने शिकायत पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी एवं हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी शकील अहमद से की, लेकिन भितरघातियों पर कार्रवाई नहीं हुई।
उल्टे सीएम ने उन लोगों की जनसभाओं में शिरकत की जिन पर भड़ाना दगेबाजी का आरोप लगा रहे थे। भड़ाना ने फिर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा एवं प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर पर भड़ास निकालनी शुरू कर दी। दोनों से इस्तीफा मांगा।
अब इस पार्टी में जा सकते हैं भड़ाना
पूर्व सांसद अवतार भड़ाना अपने बड़बोलेपन के लिए भी जाने जाते हैं। वह हवा के रुख के साथ कभी शैलजा गुट में रहे तो कभी सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ। वह कहते रहे कि या तो केंद्र में गृहमंत्री बनेंगे या फिर हरियाणा में मुख्यमंत्री। लेकिन उनकी दोनों मुराद पूरी नहीं हुई। एक बार तो वह खुलेआम सीएम पद पर दावेदारी जताकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की आंखों की किरकिरी बन गए थे। उसके बाद काफी समय तक दोनों में तल्खी रही।
अवतार भड़ाना इंडियन नेशनल लोकदल का दामन थाम सकते हैं। वर्ष 1988-89 में हरियाणा के मुख्यमंत्री चौ. देवीलाल ने भड़ाना को बिना विधायक बने छह माह के लिए स्थानीय निकाय मंत्री बनाया था। इसलिए वह चौटाला परिवार से जुड़ने में गुरेज नहीं करेंगे।
दिल्ली में अजय चौटाला और अवतार सिंह भड़ाना की कोठी साथ-साथ है। बताया जा रहा है कि भड़ाना अपनी पत्नी ममता भड़ाना और बेटे अर्जुन भड़ाना के लिए विधानसभा टिकट चाहते हैं। ताकि वह दो सीटों पर इन्हें लड़ाकर लोकसभा चुनाव के अपने भितरघातियों का बदला ले सकें।
'हम शहीद हो सकते हैं आत्महत्या नहीं कर सकते'
अवतार सिंह भड़ाना से मंगलवार सुबह हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं चाहता था कि पार्टी में रहकर समस्याओं का समाधान करवाया जाए लेकिन हुआ नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष ने भी सुनवाई नहीं की। हरियाणा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में काम करने को तैयार नहीं है। कई और लोग कांग्रेस छोड़ रहे हैं। हमको इज्जत प्यारी है। हम शहीद हो सकते हैं आत्महत्या नहीं कर सकते। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके कुछ साथी भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।
राजनीतिक कॅरियर:
-17 दिसंबर 1957 में जन्म (गांव अनंगपुर, फरीदाबाद)
-1984 से 86 तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त सचिव
-1987 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन सचिव
-वर्ष 1988-89 में हरियाणा के स्थानीय निकाय मंत्री
-1991 में फरीदाबाद से सांसद
-1999 में मेरठ (उत्तर प्रदेश) से सांसद बने
-2004 व 2009 में फरीदाबाद से लोकसभा पहुंचे