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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Tomatoes are priced at a pittance in the market, skyrocketing by the time they reach the kitchen

Delhi NCR News: मंडी में कौड़ियों के भाव, रसोई तक आते-आते आसमान छू रहे टमाटर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 09:03 PM IST
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-बंगलूरू, हिमाचल और महाराष्ट्र से बढ़ी आवक ने गिराए थोक भाव, टमाटर के खुदरा दाम बढ़कर
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40 से 60 रुपये प्रति किलो पहुंचा

सनी सिंह
नई दिल्ली। सब्जी खरीदने निकले लोगों को टमाटर की कीमत सुनकर राहत नहीं मिल रही, जबकि मांग से ज्यादा टमाटर दिल्ली की मंडियों में आ रहा है। बावजूद इसके यही टमाटर थोक कारोबारियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। बंगलूरू, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र से लगातार बढ़ रही आवक के कारण मंडियों में टमाटर का सरप्लस हो गया है। मांग के मुकाबले माल ज्यादा होने से थोक भाव तेजी से नीचे आए हैं। स्थिति यह है कि करीब 25 रुपये प्रति किलो की लागत वाला टमाटर व्यापारियों को 15 रुपये प्रति किलो तक में बेचना पड़ रहा है।

मंडी में 15, बाजार में 40 से 60 रुपये प्रति किलो दाम
इस पूरे खेल का सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ रहा है। मंडी में टमाटर की कीमत गिरने के बावजूद खुदरा बाजार में लोगों को 40 से 60 रुपये किलो तक कीमत चुकानी पड़ रही है। यानी जिस टमाटर को व्यापारी लागत से कम कीमत पर बेचने को मजबूर है, वही टमाटर घर की रसोई तक पहुंचते-पहुंचते तीन से चार गुना महंगा हो जा रहा है।
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शकरपुर निवासी कविता ने बताया कि टमाटर रोजमर्रा की जरूरत है। ऑनलाइन रेट चेक करो तो मंडी में कीमत कम होने की बात पता चलती है, लेकिन खुदरा दुकानों पर टमाटर 40 से 60 रुपये प्रति किलो मिल रहा है।
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गाजीपुर मंडी में टमाटर का कारोबार करने वाले तनु ने बताया कि टमाटर की खरीद कीमत के साथ दिल्ली तक ढुलाई, मजदूरी, छंटाई और अन्य खर्च जुड़ते हैं। ऐसे में उनकी वास्तविक लागत करीब 25 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। लेकिन मंडी में मांग से ज्यादा माल पहुंचने पर खरीदार कम पड़ रहे हैं। टमाटर जल्दी खराब होने वाली सब्जी है। इसलिए व्यापारी इसे रोककर रखने का जोखिम भी नहीं उठा सकते। इसके चलते लागत से नीचे भी माल बेचना पड़ रहा है।

दिल्ली के टमाटर कारोबारी राजेश अग्रवाल ने बताया कि हिमांचल प्रदेश, बैंगलुरू व महाराष्ट्र से लगातार टमाटर आने के कारण मंडी में माल इतना ज्यादा है कि अगर एक दिन में नहीं बिका तो खराब हो सकता है। 25 रुपये की लागत वाला माल 15 से 20 रुपये में निकालना पड़ रहा है।


ज्यादा आवक ने बिगाड़ा पूरा गणित
टमाटर व्यापारी अनिल गर्ग ने बताया कि बंगलूरू, हिमाचल और महाराष्ट्र से आने वाले टमाटर की खेपों से दिल्ली के बाजार में टमाटर सरप्लस हो गया है। मांग के मुकाबले माल ज्यादा होने से थोक भाव दबाव में हैं। फिलहाल व्यापारी चाहते हैं कि आवक और मांग के बीच संतुलन बने, ताकि उन्हें लागत से नीचे माल न बेचना पड़े और थोक बाजार में कीमत गिरने का फायदा खुदरा बाजार के जरिए आम उपभोक्ता तक भी पहुंचे।
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