{"_id":"6a8dafa49180df27840f7bc0","slug":"state-to-decide-on-the-challenge-to-the-biometric-attendance-system-for-public-prosecutors-high-court-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-152065-2026-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोक अभियोजकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली की चुनौती पर राज्य करे फैसला : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोक अभियोजकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली की चुनौती पर राज्य करे फैसला : हाईकोर्ट
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह लोक अभियोजकों (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर्स) द्वारा आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर चार सप्ताह के भीतर फैसला करे। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर यह आदेश पारित किया। एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार के उन परिपत्रों को रद्द करने की मांग की थी, जिनमें सार्वजनिक अभियोजकों के लिए आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का आदेश दिया था। याचिका में कहा कि सार्वजनिक अभियोजक न्यायालय के अधिकारी होते हैं और उन्हें अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान विभिन्न अदालतों, पुलिस स्टेशनों तथा अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है। इसलिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अव्यावहारिक है। उनकी उपस्थिति अदालती रिकॉर्ड और कार्यवाही में दर्ज रहती है। एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने उनके पिछले प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखे बिना यह प्रणाली लागू कर दी।
वैकल्पिक रूप से एसोसिएशन ने अभियोजकों के काम की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अदालत-केंद्रित उपस्थिति तंत्र लागू करने की मांग की थी। न्यायालय ने याचिका को दिल्ली सरकार के संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रतिनिधित्व मानते हुए राज्य को चार सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया। आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देते हुए फैसला सुनाया जाए और इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दी जाए।
विज्ञापन
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह लोक अभियोजकों (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर्स) द्वारा आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर चार सप्ताह के भीतर फैसला करे। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर यह आदेश पारित किया। एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार के उन परिपत्रों को रद्द करने की मांग की थी, जिनमें सार्वजनिक अभियोजकों के लिए आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का आदेश दिया था। याचिका में कहा कि सार्वजनिक अभियोजक न्यायालय के अधिकारी होते हैं और उन्हें अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान विभिन्न अदालतों, पुलिस स्टेशनों तथा अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है। इसलिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अव्यावहारिक है। उनकी उपस्थिति अदालती रिकॉर्ड और कार्यवाही में दर्ज रहती है। एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने उनके पिछले प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखे बिना यह प्रणाली लागू कर दी।
वैकल्पिक रूप से एसोसिएशन ने अभियोजकों के काम की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अदालत-केंद्रित उपस्थिति तंत्र लागू करने की मांग की थी। न्यायालय ने याचिका को दिल्ली सरकार के संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रतिनिधित्व मानते हुए राज्य को चार सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया। आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देते हुए फैसला सुनाया जाए और इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दी जाए।
विज्ञापन