बेबस केजरीवाल भी अब लगाने लगे चुनाव की रट!
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दिल्ली में 49 दिनों तक शासन करने वाली आम आदमी पार्टी एक बार फिर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने की जुगत में लग गई है।
एक दिन पहले ही उपराज्यपाल को लिखी चिट्ठी में 'आप' संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रंग बदलते हुए अब विधानसभा भंग न करने की मांग की थी। पार्टी ने दिल्ली में सरकार बनाने के लिए अब एक बार फिर पुराना रास्ता अपनाने की सोची थी।
काफी जोरआजमाइश के बाद किसी भी पार्टी से समर्थन न मिलता देख केजरीवाल ने अब चुनाव में जाने का ऐलान किया है। केजरीवाल ने यह ऐलान बुधवार को पार्टी विधायकों के साथ हुई बैठक के बाद किया है।
दिल्ली की सत्ता में वापसी की तैयारी!
लोकसभा चुनावों में अपने ही गढ़ में करारी हार झेलने वाली आम आदमी पार्टी एक बार फिर दिल्ली की सत्ता पाने की फिराक में लग गई है।
बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों के लिए बड़ी चुनौती बनी दिल्ली की गद्दी के लिए अब जोड़तोड़ शुरू हो चुकी है। हालांकि तीनों की पार्टियों ने जोड़तोड़ से सरकार बनाने से इंकार किया है लेकिन भीतर ही भीतर सारी खिचड़ी पक रही है।
दिल्ली में चुनाव कराने के बजाय दोबारा सरकार बनाने के मुद्दे को तब और हवा मिल गई जब आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल मंगलवार को उपराज्यपाल से मुलाकात करने पहुंचे थे, लेकिन अब केजरीवाल ने सरकार बनाने से मनाकर दिया है।
कांग्रेस के बयान से AAP को झटका
दिल्ली में पुराने विधायकों के साथ नई सरकार के गठन की हवा पर कांग्रेस ने विराम लगाने की कोशिश करते हुए कहा कि वह किसी भी सूरत में आम आदमी पार्टी को समर्थन नहीं देगी।
कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने दो टूक कहा है कि एक बार समर्थन दिया था तो दिल्ली को मझधार में छोड़कर भाग गए। उन्होंने कहा कि उनसे या विधायक दल के नेता से ‘आप’ की तरफ से समर्थन के लिए किसी ने संपर्क भी नहीं किया है।
अरविंदर के साथ कांग्रेस विधायक दल के नेता हारून यूसुफ और मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि ‘आप’ ने लोकसभा चुनाव में भाजपा की 'बी' टीम के तौर पर काम किया। इसका नुकसान सीधे तौर पर सेक्यूलर वोट के बंटवारे से कांग्रेस को उठाना पड़ा।
'केजरीवाल को है सत्ता का लालच'
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अगर सरकार बनी तो कांग्रेस विपक्ष में बैठेगी। जब समर्थन किसी सूरत में नहीं करना है तो प्रस्ताव आने व न आने का कोई सवाल ही नहीं उठता। पार्टी हमेशा संविधान के अनुरूप चुनाव कराए जाने पर उतरने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि पिछली बार कांग्रेस ने सांप्रदायिक ताकत को सत्ता से बाहर रखने केलिए समर्थन दिया था, अब यह पार्टी उन्हीं ताकतों का सहयोग कर रही है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता हारून यूसुफ ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को सत्ता का लालच है। यही वजह है कि उनका पार्टी में भी विरोध शुरू हो गया है।
क्या ये है केजरीवाल का असली दांव?
इस पूरे मामले में अभी तक बीजेपी का रुख साफ नहीं हुआ है। बीजेपी कभी दोबारा चुनाव कराने की बात कहती है तो कभी उपराज्यपाल पर फैसला छोड़ देती है।
दिल्ली में सरकार बनाने के मामले में तीनों पार्टियों ने ऊपरी तौर पर एक ही रुख अपनाया है और दोबारा चुनाव कराने की ही मांग की है।
हालांकि केजरीवाल की उपराज्यपाल से मीटिंग इस बात का संकेत दे रही है कि वह बिना चुनाव कराए दोबारा दिल्ली की सत्ता पर काबिज होकर खोया हुआ जनाधार वापस पाना चाहते हैं।