दिल्ली फतह के लिए केजरीवाल ने बनाया ये प्लान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी को बिजली-पानी का सहारा है। एक अप्रैल से बिजली-पानी की बढ़ाई गई दरों के बीच AAP ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया है।
अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को दिल्ली की हर नुक्कड़ सभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
बिजली-पानी की दरों में छूट देने को AAP सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए बढ़ी कीमतों का ठीकरा कांग्रेस-भाजपा पर फोड़ा। पार्टी का मानना है कि इसके सहारे दिल्ली की चुनावी वैतरणी पार की जा सकती है।
जब खुद मैकेनिक बन गए केजरीवाल
दरअसल, नई-नवेली AAP ने दिल्ली में अपनी सियासी जमीन तैयार करने के लिए बिजली-पानी का सहारा लिया था। केजरीवाल ने इसके लिए बिजली कनेक्शन जोड़ने से लेकर अनशन और बिल जमा न करने का आंदोलन तक छेड़ा था।
चुनाव परिणाम आने के बाद माना गया कि AAP को 28 सीट दिलाने में बिजली-पानी की जंग कारगर रही। यही वजह रही कि सरकार बनने के बाद केजरीवाल सरकार के पहले बड़े फैसलों में एक सीमा के भीतर बिजली की दरें आधी करने, बिजली कंपनियों के सीएजी ऑडिट कराने व तयशुदा सीमा तक मुफ्त पानी देना शामिल रहा।
हालांकि इसके लिए वित्तीय प्रावधान 31 मार्च तक किया गया था। इसी बीच केजरीवाल सरकार ने इस्तीफा दे दिया।
केजरी ने चली सियासी चाल
अब वित्तीय प्रावधान न होने से एक अप्रैल से स्वाभाविक तौर से मुफ्त पानी मिलना बंद होगा तथा बिजली की दरें बढ़ जाएंगी। लिहाजा केजरीवाल फिर से इस बढ़ोत्तरी को मुद्दा बना रहे हैं।
मंगलवार की नुक्कड़ सभाओं में बिजली-पानी का बिल हवा में लहराकर लोगों से हामी भराई कि उनकी सरकार ने यह काम किया था। वहीं, वह यह बताने में भी नहीं चूक रहे कि अगर संसद से सब्सिडी को मंजूरी मिल जाती तो राहत जारी रहती।
केजरीवाल ने हर सभा में आरोप लगाया कि कांग्रेस-भाजपा की आपसी मिलीभगत करके संसद से इसके लिए वित्तीय मंजूरी नहीं दिलाई। लिहाजा इसका बोझ आम दिल्लीवासियों को उठाना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने सुनाई खरी-खरी
हाईकोर्ट ने राजधानी के लोगों को सस्ती बिजली मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है। साथ ही बिजली पर सब्सिडी जारी रखने के लिए सरकार को आदेश देने से भी मना कर दिया। अदालत ने इस मुद्दे पर सरकार को ज्ञापन देने का निर्देश याचिकाकर्ता को दिया।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने कहा कि बिजली और पानी पर सब्सिडी देना या न देना सरकार का नीतिगत मामला है। कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। खंडपीठ ने याची से कहा कि आप लोगों ने जिन नेताओं को चुना है, उनके पास क्यों नहीं जाते।
जनहित याचिका अनुराग केजरीवाल ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने तर्क रखा कि ‘आप’ सरकार ने लोगों को 400 यूनिट तक बिजली खपत पर सब्सिडी देकर काफी राहत दी थी, लेकिन इसके लिए बजट का कोई प्रावधान नहीं किया।
जलबोर्ड ने भी कस ली कमर, भेजेगा बिल
दिल्ली जल बोर्ड ने उपभोक्ताओं से आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल का बिल वसूलने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। बोर्ड मुख्यालय में मंगलवार को इस संबंध में बैठकों का दौर चला।
मीटरों से रीडिंग लेने व बिल भेजने की तिथि को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही बिल जमा कराने की अवधि का भी समय निश्चित किया गया। उपभोक्ताओं को गत वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बिल देना होगा। दिल्ली जल बोर्ड ने एक जनवरी को पानी की दरों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी।
बोर्ड के मुताबिक अब प्रतिमाह मीटर की रीडिंग ली जाएगी और रीडिंग लेने के एक सप्ताह के अंदर बिल उपभोक्ताओं के घर भेजा जाएगा जिसका भुगतान करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा।