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अरावली न रहती तो रेगिस्तान बन जाता दिल्ली-एनसीआर
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sat, 21 May 2016 02:23 AM IST
सार
- राजस्थान से आने वाली गर्म हवाओं और रेत को रोकती है अरावली
- पसरती रेत प्रतिवर्ष आधा किमी की गति से मरुस्थल को खिसका रही है
- अवैध खनन और पेड़ कटाई से संकट में है अरावली
- अगर मरुस्थल के विस्तार को पौधारोपण से नहीं रोका गया तो बढ़ेगी और तपिश
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विस्तार
प्रदेश सरकार जहां अरावली का सीना चीर कर यहां लोगों को बसाने की कवायद कर रही है, वहीं विशेषज्ञों की मानें तो अरावली न होती तो दिल्ली-एनसीआर रेगिस्तान बन जाता और दिल्ली-एनसीआर का मौजूदा तापमान जानलेवा होता। राजस्थान की तरह यहां भी तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता।
मुख्य वन संरक्षक सत्यभान के मुताबिक अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान से आने वाली झुलसाने और जानलेवा गर्म हवाओं को सीधे आने से रोकती है। विशेषज्ञों की मानें तो इस मरुस्थल का विस्तार पूर्व की ओर जारी है, नागौर और जयपुर के बीच अरावली की दीवार में अंतराल (वायु घाटियां) हैं, जिनसे होकर रेगिस्तान की रेत अरावली की दूसरी ओर (पूर्व की ओर) जा रही है।
अलवर में पसरती रेत प्रतिवर्ष आधा किमी की गति से मरुस्थल को खिसका रही है। अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो हरियाणा व दिल्ली-एनसीआर के सीमा में प्रवेश कर जाएगा और यह मरुस्थल से घिर सकते हैं। अगर मरुस्थल के इस विस्तार को सघन पौधारोपण से नहीं रोका गया, तो आने वाले वक्त में यहां भी तपिश जानलेवा होगा।
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मुख्य संरक्षक अधिकारी का कहना है कि दिल्ली से गुजरात तक फैली अरावली की पहाड़ी प्रचंड और झुलसाती गर्मी और पश्चिम से आती रेगिस्तानी गर्म और जानलेवा हवाओं को दिल्ली-एनसीआर में सीधे आने से सदियों से रोकती आई है। अगर यह नहीं होता तो राजस्थान की तर्ज पर 50 डिग्री को पार कर चुका होता।
अरावली की वजह से एनसीआर का तापमान 6 से 8 डिग्री तक कम रहता है। बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में लगातार तापमान बढ़ रहा है और मई महीने में अधिकतम तापमान 46.7 डिग्री तक पहुंच चुका है। राजस्थान के कई इलाकों में 51 डिग्री तक तापमान पहुंच चुका है।
कैसे रोकती है अरावली
पूर्व मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीएल दत्तू कहते हैं ऊंचे पर्वतों पर धरती की सतह बहुत कम गर्म हो पाती है। धरती की सतह के बहुत कम ऊष्मा प्राप्त करने के कारण उसके द्वारा परावर्तित की जाने वाली ऊर्जा की मात्रा भी कम होती है।
जिससे धरती की सतह से परावर्तित होने वाली दीर्घ तरंगों से ऊंचे पर्वतों का वायुमंडल भी अपेक्षाकृत कम गर्म हो पाता है। अरब सागर से आने वाली गर्मी की मानसून राजस्थान के ऊपर से गुजरती हैं पर नमी के विशाल भंडार को संजोए रखने के कारण यहां से गुजरने वाली हवाओं के तापमान में कमी आ जाती है।
संकट में है अरावली
पर्यावरणविद विवेक कंबोज का कहना है कि अरावली संकट में है। यहां लगातार पेड़ों की कटाई के साथ इसके रकबा को कम करने के लिए व्यवस्था कायम की जा रही है। इसका सीना लगातार छलनी किया जा रहा। गैर मुमकिन पहाड़ को, जिसे की देश की सर्वोच्च न्यालय ने भी धरोहर के तौर पर संरक्षित करने के आदेश राज्य सरकारों को दिए है। इसके बावजूद इसमें हस्तक्षेप किया जा रहा है।
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मुख्य वन संरक्षक सत्यभान के मुताबिक अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान से आने वाली झुलसाने और जानलेवा गर्म हवाओं को सीधे आने से रोकती है। विशेषज्ञों की मानें तो इस मरुस्थल का विस्तार पूर्व की ओर जारी है, नागौर और जयपुर के बीच अरावली की दीवार में अंतराल (वायु घाटियां) हैं, जिनसे होकर रेगिस्तान की रेत अरावली की दूसरी ओर (पूर्व की ओर) जा रही है।
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अलवर में पसरती रेत प्रतिवर्ष आधा किमी की गति से मरुस्थल को खिसका रही है। अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो हरियाणा व दिल्ली-एनसीआर के सीमा में प्रवेश कर जाएगा और यह मरुस्थल से घिर सकते हैं। अगर मरुस्थल के इस विस्तार को सघन पौधारोपण से नहीं रोका गया, तो आने वाले वक्त में यहां भी तपिश जानलेवा होगा।
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मुख्य संरक्षक अधिकारी का कहना है कि दिल्ली से गुजरात तक फैली अरावली की पहाड़ी प्रचंड और झुलसाती गर्मी और पश्चिम से आती रेगिस्तानी गर्म और जानलेवा हवाओं को दिल्ली-एनसीआर में सीधे आने से सदियों से रोकती आई है। अगर यह नहीं होता तो राजस्थान की तर्ज पर 50 डिग्री को पार कर चुका होता।
अरावली की वजह से एनसीआर का तापमान 6 से 8 डिग्री तक कम रहता है। बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में लगातार तापमान बढ़ रहा है और मई महीने में अधिकतम तापमान 46.7 डिग्री तक पहुंच चुका है। राजस्थान के कई इलाकों में 51 डिग्री तक तापमान पहुंच चुका है।
कैसे रोकती है अरावली
पूर्व मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीएल दत्तू कहते हैं ऊंचे पर्वतों पर धरती की सतह बहुत कम गर्म हो पाती है। धरती की सतह के बहुत कम ऊष्मा प्राप्त करने के कारण उसके द्वारा परावर्तित की जाने वाली ऊर्जा की मात्रा भी कम होती है।
जिससे धरती की सतह से परावर्तित होने वाली दीर्घ तरंगों से ऊंचे पर्वतों का वायुमंडल भी अपेक्षाकृत कम गर्म हो पाता है। अरब सागर से आने वाली गर्मी की मानसून राजस्थान के ऊपर से गुजरती हैं पर नमी के विशाल भंडार को संजोए रखने के कारण यहां से गुजरने वाली हवाओं के तापमान में कमी आ जाती है।
संकट में है अरावली
पर्यावरणविद विवेक कंबोज का कहना है कि अरावली संकट में है। यहां लगातार पेड़ों की कटाई के साथ इसके रकबा को कम करने के लिए व्यवस्था कायम की जा रही है। इसका सीना लगातार छलनी किया जा रहा। गैर मुमकिन पहाड़ को, जिसे की देश की सर्वोच्च न्यालय ने भी धरोहर के तौर पर संरक्षित करने के आदेश राज्य सरकारों को दिए है। इसके बावजूद इसमें हस्तक्षेप किया जा रहा है।