अन्ना आंदोलन में फडणवीस पर किसान ने फेंका जूता, सरकार ने मानी शर्त तो अनशन खत्म
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अन्ना की रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर जूता फेंका गया है। आज अन्ना की रैली में उन पर जूता फेंकने की कोशिश हुई। हालांकि जूता फडणवीस को लगा नहीं उनके बगल में जा गिरा। फडणवीस इस हमले में बाल-बाल बचे। वह इस दौरान सभा में लोगों को संबोधित कर रहे थे तभी एक किसान ने उन पर ये हमला किया।
#WATCH Shoe hurled at stage while Maharashtra CM Devendra Fadnavis addressed farmers' protest lead by Anna Hazare at Delhi's Ramlila Maidan pic.twitter.com/BmYVWPKazG
— ANI (@ANI) March 29, 2018विज्ञापन
उधर सरकार से अपनी मांगों को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे का चल रहा अनशन आज आंदोलन के सातवें दिन खत्म हो गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दिल्ली के रामलीला मैदान पर पहुंचे और अन्ना का अनशन खत्म करवाया। बता दें कि अन्ना के साथियों ने दावा किया है कि सरकार ने उनकी साभी मांगें मान ली हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अन्ना हजारे को जूस पिला कर अनशन तुड़वाया।
अनशन खत्म करते हुए अन्ना हजारे ने बताया कि लोकपाल नियुक्त नहीं हुआ है सरकार ने कहा है कि जल्दी ही इसको नियुक्त करेंगे। लोकपाल कानून को जो धारा कमजोर करती है सरकार उसको भी वापस ले लेगी। सरकार किसानों को खर्च के आधार पर 1.5 गुना दाम देने को राजी हो गई है।
Delhi: Anna Hazare ends hunger strike after talks with Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis and Union Minister of State for Agriculture Gajendra Singh Shekhawat pic.twitter.com/S1gtclNuoc
— ANI (@ANI) March 29, 2018
अन्ना हजारे की तबीयत नाजुक, घटा 5.5 kg वजन
रामलीला मैदान में सक्षम किसान, सशक्त लोकपाल और चुनाव सुधार की मांगों को लेकर छह दिन से अनशन कर रहे समाजसेवी अन्ना हजारे की तबीयत बुधवार को बेहद नाजुक हो गई थी। छह दिन में उनका साढ़े पांच किलो वजन घट गया था।
बोलने में दिक्कत के चलते वह शाम को समर्थकों को संबोधित भी नहीं कर पाए थे। डॉक्टरों की टीम ने अन्ना को आराम कक्ष में रहने की सलाह दी थी। केंद्र सरकार का कोई नुमाइंदा या संदेश रामलीला मैदान नहीं पहुंचा था।
बुधवार सुबह करीब 10 बजे अन्ना ने समर्थकों और प्रेस को सरकार के ड्राफ्ट की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने 15 पृष्ठीय अस्पष्ट ड्राफ्ट भेजकर उन्हें गुमराह करने की कोशिश की है।
सरकार ने किसानों को खर्च पर डेढ़ गुना अधिक राशि देने की शर्त मानी, लेकिन यह नहीं बताया कि राशि किस तरीके से दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान को निर्धारित से कम दाम मिलता है तो सरकार भरपाई सुनिश्चित करे।
मसौदे में कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के बारे में भी कोई स्पष्ट बात नहीं कही गई है। ड्राफ्ट में लोकपाल और लोकायुक्त नियुक्ति की मांग चुनाव आयोग के पास भेजने की बात कही गई है, लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं दिया गया है।