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डोला हिमालय लेकिन इस भारतीय को नहीं आइ आंच

Thu, 30 Apr 2015 12:41 PM IST
Updated Thu, 30 Apr 2015 12:41 PM IST
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Ankur bahal rescued from himalayan tragedy

साइबर सिटी के 54 वर्षीय पर्वतारोही अंकुर बहल भले ही एवरेस्ट फतह में कामयाब नहीं हुए हो, लेकिन नेपाल में भूकंप के बाद हिमालय की बर्बादी के बीच जिंदगी की जंग जीतने में कामयाब रहे हैं।

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हिमालय की चोटी से उतर कर अब नेपाल के लुकला शहर में पहुंच गए है। हालांकि नेपाल में हो रही बारिश अंकुर को वतन लौटने में बाधा पैदा कर रही है।

बारिश की वजह से लुकला के तेंजिंग हिलेरी हवाई अड्डा से सेवा ठप है। जिससे लुकला से काठमांडू और फिर वहां से दिल्ली बुधवार शाम तक नहीं पहुंच पाए।

बुधवार दोपहर करीब एक बजे अंकुर ने अपनी पत्नी संगीता बहल को फोन का अपनी खैरियत और वहां के हालात बताए। पर्वतारोही पत्नी संगीता कहती है टीवी और सोशल साइट्स पर हिमालय और नेपाल के वीडियो देखकर दिल दहल रहा है।
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चढ़ाई के दौरान हिलने लगा पहाड़

Ankur bahal rescued from himalayan tragedy

बात होने के बाद थोड़ी राहत तो है, लेकिन घर वापस लौटने तक बेचैनी बनी रहेगी। बकौल संगीता, शनिवार को भूकंप वाले दिन अंकुर अपने पांच सदस्यीय टीम के साथ करीब 20 हजार फीट की चढ़ाई के लिए कैंप-1 से निकलकर कैंप-2 गए थे।

तभी भूकंप से पहाड़ हिलने लगा। चढ़ाई के दौरान हल्का पहाड़ हिलना आम बात है, लेकिन पहाड़ हिले ही जा रहा था। तभी अचानक बेस कैंप-2 से थोड़ी दूर पर हिमस्खलन दिखाई दिया। हम लोग जहां थे, थोड़े देर के लिए रूक गए। लेकिन, टीम लीडर ने आगे बढ़ने को कहा।

अंकुर नेपाल से फोन पर बताते है कि धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। आगे बढ़ने पर लगा कि फंस रहे है, लेकिन चढ़ाई से जान बच गई। जब हिमालय हिलना बंद हुआ, तब हमलोग किसी तरह कैंप-1 में पहुंचे।

पहाड़ दूसरी तरफ टूट कर गिर रहे थे। कैंप-1 से नीचे जाने का कोई रास्ता नहीं था। वहां पर अलग-अलग ग्रुप के 64 लोग थे। जब भी कुछ चट्टान दिखता तो भय लगता था कि कहीं गिर न जाए।

आंख के सामने दो ने गंवाई जान

Ankur bahal rescued from himalayan tragedy

जान बचाने के लिए जबान पर दुआ थी। बाद में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ और 32 बार में हेलीकॉप्टर ने 64 लोगों को निकाला। सबसे सुरक्षित बेस कैंप का बुरा हाल था। हिमस्खलन की गुजरी चट्टाने बर्बादी के निशान छोड़गई थी। यहां मौजूद एक डॉक्टर और फोटोग्राफर की इस हादसे में मौत हो गई। सब सामान बिखरे थे।

पर्वतरोही के पासपोर्ट नहीं मिल रहे। जिसको जो सामान मिला, वो लेकर सोमवार रात गोरक शेक पहुंचे। फिर यहां से हेलीकॉप्टर के जरिए पांचों सदस्य लुकला पहुंचे। सड़क से जाना मुश्किल है। रास्ते है ही नहीं। हालांकि अब हिमालय से लोगों को निकाल लिया गया। सेना ने रेस्क्यू बंद कर दिया।

नेपाल का मंजर सुनकर सुनीता भी भयभीत है। सुनीता कहती है, लुकला से अब काठमांडू के लिए फ्लाइट के जरिए आएंगे। मंगलवार रात को काठमांडू आने के लिए नंबर लगाए थे। सुबह 06 बजे लुकला के हवाई अड्डे पर पहुंचे थे। चौथे स्थान पर होने के बावजूद अब तक नहीं पहुंचे। बारिश की वजह से फ्लाइट रद्द हो गई है। अब कब पहुंचेंगे? पता नहीं। चिंता लगी है।

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