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यहां के कैदी नहीं जाना चाहते घर
मयंक तिवारी, गुड़गांव
Updated Mon, 30 Dec 2013 11:48 AM IST
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मॉडर्न जेल भोंडसी में बंद कैदी पहले बाहरी लोगों से बात करने के लिए तरसते थे, लेकिन आजकल जेल में खुलेआम ‘पीसीओ’ चलाया जा रहा है।
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जेल प्रशासन को इसकी जानकारी मिली तो पूरा स्टाफ आश्चर्यचकित हो गया। मामले का खुलासा होने पर इसकी जांच अपराध शाखा को सौंप दी है।
पुलिस व जेल प्रशासन लगातार छापेमारी करके कैदियों के पास से 49 मोबाइल फोन व 63 सिमकार्ड बरामद कर चुकी है।
साउथ जोन की पुलिस की ओर से जेल अधीक्षक के बयान पर मामला दर्ज होने के बाद जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है।
पहले चरण में हुई छापेमारी के बाद पुलिस को सिम कार्ड डिटेल से पता चला है कि एक-एक सिमकार्ड पर बैरक में रहने वाले 40-50 विचाराधीन कैदियों की लोगों से बात हुई है।
डीसीपी साउथ राहुल शर्मा के अनुसार ज्यादातर मोबाइल व सिम कार्ड सजायाफ्ता कैदियों के हैं। जो अपने मोबाइल रखने का राज छुपाने के लिए बैरक में मौजूद अन्य कैदियों की भी बात करा कर उनको बराबर का आरोपी बना देते हैं।
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बदले में उनसे मोटी रकम बसूली जाती है। अपराध शाखा व साइबर सेल की टीम पूरे मामले की जांच में जुटी है।
जेल में बंद कैदी अपने परिजनों व दोस्तों से मोबाइल पर बात करने के लिए पैसा देने में कभी गुरेज नहीं करते।
जेल में पीसीओ चलाने वाले कैदी प्रति काल का 25 से 50 रुपये वसूलते हैं। इसके अलावा जितनी लंबी कॉल होगी उतना अधिक पैसा होगा। जेल में कैदी के पास मोबाइल पाए जाने पर छह माह की सजा का प्रावधान है।
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सजायाफ्ता कैदी की सजा में अगर छह माह और जुड़ जाता है तो उन पर कोई असर नहीं पड़ता है।
कैसे पहुंचता जेल में मोबाइल?
मोबाइल का अलग-अलग पार्ट बारी-बारी से पेशी पर आने के दौरान भीतर पहुंचता है। दीवार के किनारे फेंक कर भीतर पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। घी, तेल व फल, चप्पल के माध्यम से कैदियों तक पहुंचती है सिम।
डीसीपी साउथ राहुल शर्मा ने बताया कि अब तक की छानबीन में इस बात का खुलासा हुआ है। लेकिन सिम कार्ड धारक कैदी बैरक में अन्य लोगों से भी पीसीओ की तर्ज पर बात करा कर अपराध छुपाने का प्रयास करता है। पुलिस इस समस्या से निपटने का उपाय तलाश रही है।