{"_id":"540ec88ecaf5d7e1a443304b365aece7","slug":"all-barriers-broken-down-voters-flown-in-modi-wave","type":"story","status":"publish","title_hn":"जाति, धर्म का फंडा फेल, चारों ओर नमो-नमो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जाति, धर्म का फंडा फेल, चारों ओर नमो-नमो
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 17 May 2014 10:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहा जाता है कि चुनावों में जातीय समीकरण काफी अहम होते हैं। लेकिन फरीदाबाद में यह बात गलत साबित हो गई।
विज्ञापन
मोदी की लहर में यहां जाति और धर्म का फंडा फेल हो गया। इसके नाम पर वोट मांगने वाले नेताओं को इस बार करारा जवाब मिला है।
सभी राजनीतिक दलों ने जाति के आधार पर ही इस सीट से प्रत्याशी उतारे थे। इस बार कांग्रेस और भाजपा दोनों ने गुर्जर प्रत्याशी उतारे, जबकि इनेलो ने पंजाबी कार्ड खेला।
बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत राजेंद्र शर्मा को मैदान में उतारा था। आम आदमी पार्टी ने जाटों की अच्छी संख्या को देखते हुए पुरुषोत्तम डागर पर दांव खेला था।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: फरीदाबाद के गुर्जर भवन में पत्रकारों का हंगामा
विज्ञापन
इनेलो, कांग्रेस एवं बसपा ने मुस्लिमों को गोलबंद करने की कोशिश की। लेकिन इस बार ये सारे समीकरण धरे के धरे रह गए। मतदाता किसी भी क्षेत्र में जातीय आधार पर बंटते नहीं दिखे। उन्होंने वोट राष्ट्रीय दल और स्थायी सरकार देने वाले को दिया।
उद्योगपति श्रीराम अग्रवाल का कहना है कि महंगाई और भ्रष्टाचार से जनता त्रस्त थी। युवा वर्ग बेरोजगारी से त्रस्त था। इसलिए लोगों ने संकुचित बातों से ऊपर उठकर मतदान किया।
भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश भाटिया के मुताबिक अब धर्म और जाति के आधार पर राजनीति करने के दिन लदने वाले हैं। इस चुनाव से तो यही संकेत मिला है।