सरकार की बेरुखी से सपना ही रह जाएगा ओलंपिक
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कुश्ती के प्रति प्रदेश सरकार की बेरुखी से राष्ट्रीय स्तर के पहलवान नाखुश हैं। कारण है जिला गौतमबुद्ध नगर में पहलवानों को मूलभूत सुविधाओं का भी नहीं मिल पाना है। जबकि यहां के अनेक पहलवान राष्ट्रीय स्तर पर अपना दमखम दिखा चुके हैं।
जिले के पहलवानों का भविष्य अभी निजी अखाड़ों पर ही निर्भर है। क्योंकि सरकार की ओर से किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई हैं। जिले में प्रत्येक खेल के लिए कुछ न कुछ व्यवस्थाएं हैं, लेकिन कुश्ती के लिए मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया नहीं कराई गई हैं।
यही कारण है कि पहलवानी गांव तक ही सिमटकर रह गई है। जबकि अनेक पहलवानों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। अकेले सर्फाबाद गांव से दस पहलवान राष्ट्रीय और एक पहलवान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलता है।
हरियाणा में होते तो जिंदगी बन जाती
खिलाड़ी रह चुके पहलवानों ने निजी स्तर पर कुश्ती के लिए व्यवस्थाएं कर रखी हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं। गांव सर्फाबाद स्थित महर्षि दयानंद अखाड़े में कुश्ती के लिए 72 छोटे गद्दों से एक बड़ा गद्दा बनाया गया है। जिस पर एक साथ 20 जोड़े पहलवान अभ्यास कर सकते हैं। इसके अलावा जिम और खाने-पीने की व्यवस्था भी की गईं हैं।
यहां के पहलवान खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वे मानते हैं कि हरियाणा में होते तो जिंदगी बन जाती। कोच भूपेश कहते हैं कि हरियाणा और पंजाब में खेल को रोजगार से जोड़ा गया है। वहां पर पदक लाओ नौकरी पाओ की व्यवस्था है। पहलवान यहां जितना मेहनत करते हैं उतनी हरियाणा में करते तो भविष्य के बारे में सोचना नहीं पड़ता।
नोएडा में जिन पहलवानों ने प्रशिक्षण लिया है उनमें प्रमुख रूप नाम ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार एवं ओलंपिक खेल चुके अनुज चौधरी (डीएसपी) का है। एशियाड खिलाड़ी सुबोध यादव के अलावा बलराज, आदेश, शेरपाल, अर्जुन, अमित, विष्णु पहलवान राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं।
क्या कहते हैं पहलवान:
प्रदेश से धीरे-धीरे कुश्ती खत्म हो रही है। सरकार कुश्ती के लिए ज्यादा नहीं तो कम से कम मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए। साथ ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले पहलवानों को रोजगार दिए जाएं।
- खलीफा सुखवीर पहलवान (सेना केनेशनल चैंपियन)
सरकार की ओर से कभी कोई सुविधा नहीं मिली। पिछले दस सालों में सरकार ने खेल कोटे की भर्तियां तक नहीं निकाली हैं।
- सुबोध यादव, अंतरराष्ट्रीय पहलवान।
राष्ट्रीय स्तर पर कई बार पदक जीते लेकिन हाल वही रहा। जहां हरियाणा सरकार नौकरी दे देती है वहीं प्रदेश सरकार मूलभूत सुविधाएं भी नहीं दे रही।
- बलराज, राष्ट्रीय खिलाड़ी।
सरकार को प्रदेश के अच्छे पहलवानों का चयन कर प्रशिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए। उनको विशेष सुविधाएं भी दी जानी चाहिए। ताकि अधिक से अधिक लोग कुश्ती से जुड़ें।
-शेरपाल यादव, राष्ट्रीय स्तर के पहलवान।
कुश्ती का विकास तभी हो सकता है जब सरकार इस और ध्यान दे। निजी स्तर पर प्रशिक्षण लेना और उसकी व्यवस्था करना काफी महंगा पड़ता है। इस वजह से कई पहलवान बीच में ही अभ्यास छोड़ देते हैं।
- विष्णु सिंह, पहलवान।