फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   akhilesh yadav government does not care about wrestlers

सरकार की बेरुखी से सपना ही रह जाएगा ओलंपिक

Fri, 18 Jul 2014 03:16 AM IST
Updated Fri, 18 Jul 2014 03:16 AM IST
विज्ञापन
akhilesh yadav government does not care about wrestlers

कुश्ती के प्रति प्रदेश सरकार की बेरुखी से राष्ट्रीय स्तर के पहलवान नाखुश हैं। कारण है जिला गौतमबुद्ध नगर में पहलवानों को मूलभूत सुविधाओं का भी नहीं मिल पाना है। जबकि यहां के अनेक पहलवान राष्ट्रीय स्तर पर अपना दमखम दिखा चुके हैं।

विज्ञापन


जिले के पहलवानों का भविष्य अभी निजी अखाड़ों पर ही निर्भर है। क्योंकि सरकार की ओर से किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई हैं। जिले में प्रत्येक खेल के लिए कुछ न कुछ व्यवस्थाएं हैं, लेकिन कुश्ती के लिए मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया नहीं कराई गई हैं।
विज्ञापन


यही कारण है कि पहलवानी गांव तक ही सिमटकर रह गई है। जबकि अनेक पहलवानों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। अकेले सर्फाबाद गांव से दस पहलवान राष्ट्रीय और एक पहलवान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

हरियाणा में होते तो जिंदगी बन जाती

akhilesh yadav government does not care about wrestlers

खिलाड़ी रह चुके पहलवानों ने निजी स्तर पर कुश्ती के लिए व्यवस्थाएं कर रखी हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं। गांव सर्फाबाद स्थित महर्षि दयानंद अखाड़े में कुश्ती के लिए 72 छोटे गद्दों से एक बड़ा गद्दा बनाया गया है। जिस पर एक साथ 20 जोड़े पहलवान अभ्यास कर सकते हैं। इसके अलावा जिम और खाने-पीने की व्यवस्था भी की गईं हैं।

यहां के पहलवान खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वे मानते हैं कि हरियाणा में होते तो जिंदगी बन जाती। कोच भूपेश कहते हैं कि हरियाणा और पंजाब में खेल को रोजगार से जोड़ा गया है। वहां पर पदक लाओ नौकरी पाओ की व्यवस्था है। पहलवान यहां जितना मेहनत करते हैं उतनी हरियाणा में करते तो भविष्य के बारे में सोचना नहीं पड़ता।

नोएडा में जिन पहलवानों ने प्रशिक्षण लिया है उनमें प्रमुख रूप नाम ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार एवं ओलंपिक खेल चुके अनुज चौधरी (डीएसपी) का है। एशियाड खिलाड़ी सुबोध यादव के अलावा बलराज, आदेश, शेरपाल, अर्जुन, अमित, विष्णु पहलवान राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं।

क्या कहते हैं पहलवान:

akhilesh yadav government does not care about wrestlers

प्रदेश से धीरे-धीरे कुश्ती खत्म हो रही है। सरकार कुश्ती के लिए ज्यादा नहीं तो कम से कम मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए। साथ ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले पहलवानों को रोजगार दिए जाएं।
- खलीफा सुखवीर पहलवान (सेना केनेशनल चैंपियन)

सरकार की ओर से कभी कोई सुविधा नहीं मिली। पिछले दस सालों में सरकार ने खेल कोटे की भर्तियां तक नहीं निकाली हैं।
- सुबोध यादव, अंतरराष्ट्रीय पहलवान।

राष्ट्रीय स्तर पर कई बार पदक जीते लेकिन हाल वही रहा। जहां हरियाणा सरकार नौकरी दे देती है वहीं प्रदेश सरकार मूलभूत सुविधाएं भी नहीं दे रही।
- बलराज, राष्ट्रीय खिलाड़ी।

सरकार को प्रदेश के अच्छे पहलवानों का चयन कर प्रशिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए। उनको विशेष सुविधाएं भी दी जानी चाहिए। ताकि अधिक से अधिक लोग कुश्ती से जुड़ें।
-शेरपाल यादव, राष्ट्रीय स्तर के पहलवान।

कुश्ती का विकास तभी हो सकता है जब सरकार इस और ध्यान दे। निजी स्तर पर प्रशिक्षण लेना और उसकी व्यवस्था करना काफी महंगा पड़ता है। इस वजह से कई पहलवान बीच में ही अभ्यास छोड़ देते हैं।
- विष्णु सिंह, पहलवान।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed