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तो इस वजह से माकन का त्यागपत्र हुआ मंजूर, कांग्रेस की लोकसभा में सीटें बढ़ाने की रणनीति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 06 Jan 2019 04:59 AM IST
ajay maken
ajay maken - फोटो : फाइल फोटो
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से अजय माकन के त्यागपत्र देने के बाद पार्टी में इस्तीफे से होने वाले नफा-नुकसान और नए अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। भले ही अजय माकन अपने त्यागपत्र का कारण स्वास्थ्य को बता रहे हैं लेकिन स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस-आप के बीच संभावित गठबंधन की बाधा दूर करने के लिए ही उनका इस्तीफा मंजूर किया गया है। 
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माकन शुरू से ही गठबंधन के खिलाफ थे। वह आप से गठबंधन को कांग्रेस के लिए आत्मघाती कदम मानते थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार माकन ने आलाकमान को यह समझाने का काफी प्रयास किया कि दिल्ली में कांग्रेस का ग्राफ बढ़ रहा है और आने वाले चुनावों में वह बेहतर प्रदर्शन करेगी। गठबंधन से कांग्रेस से ज्यादा आप को फायदा होगा। इतना ही नहीं माकन ने तो यहां तक मानते थे कि यदि दिल्ली में यही हालत रहे तो कांग्रेस जल्द ही पुन: सत्ता में वापसी कर सकती है। 

सूत्रों की माने तो माकन आलाकमान को पूरी तरह से समझाने में कामयाब नहीं हुए। दरअसल आप से गठबंधन की तरफदारी करने वाले गुट का मानना था कि जिस प्रकार कांग्रेस मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में लंबे अरसे तक बाहर रही उसी तरह का इंतजार अब दिल्ली में नहीं किया जा सकता। इसके अलावा इस गुट का मानना है कि लोकसभा में कांग्रेस की सीटे बढ़नी चाहिए और दिल्ली में भले ही कांग्रेस सत्ता में न आए लेकिन राज्य स्तर पर गठबंधन के जरिये कांग्रेस को हर हाल में लोकसभा में अपना संख्या बल बढ़ाना चाहिए।  

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने माना कि कांग्रेस हाईकमान के लिए वर्तमान में लोकसभा चुनाव अहम है और जिस प्रकार यूपी में उसे अहमियत नहीं मिली उससे कांग्रेस पर गठबंधन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना होगा। लोकसभा में यदि कांग्रेस की हालत न सुधरी तो उसके लिए भविष्य में काफी परेशानी आ सकती है। आखिर नफा नुकसान में माकन का सुझाव कहीं नहीं ठहरा और आलाकमान ने गठबंधन का रास्ता साफ करने के लिए उनका त्यागपत्र मंजूर कर लिया। 

गठबंधन पर माकन ने साधी चुप्पी
शनिवार को अजय माकन ने कहा कि उन्होंने सितंबर में ही त्यागपत्र दे दिया था और परसों राहुल गांधी से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप कर बताया कि वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हैं। माकन ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष को 100 प्रतिशत फिट रहना चाहिए बल्कि इससे भी ज्यादा फिट होना चाहिए। यदि प्रदेश अध्यक्ष फिट नहीं होगा तो वह कार्यकर्ताओं को कैसे आगे लेकर जा सकता है। अब मैं एक साधारण कार्यकर्ता हूं और रहूंगा। वहीं आप से गठबंधन के सवाल पर कहा कि सार्वजनिक रूप से वह राय नहीं दे सकते। यह काम आलाकमान का है और जो तय होगा सबके सामने होगा। 

शीला का नाम सर्वमान्य लेकिन उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता 
प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर शीला दीक्षित का नाम सबसे ऊपर है लेकिन उनकी उम्र व स्वास्थ्य आड़े आ रहा है। तीन बार सफलतापूर्वक मुख्यमंत्री का दायित्व निभा चुकी शीला दीक्षित पार्टी आलाकमान के काफी नजदीक मानी जाती हैं। यदि शीला को कमान दी जाती है तो सबसे ज्यादा चिंता इस बात की बताई जा रही है कि आगामी लोकसभा चुनावों में क्या वह पूरी तरह से भागदौड़ कर पाएंगी। बताया जा रहा है कि यदि शीला प्रदेश अध्यक्ष बनती हैं तो आलाकमान कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी किसी की नियुक्ति कर सकता है। 
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