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AIIMS Study: कम डोज में असरदार इलाज, सस्ती इम्यूनोथेरेपी से कैंसर मरीजों को नई उम्मीद; शोध को ICMR का सहयोग

Sun, 29 Mar 2026 02:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली
सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 29 Mar 2026 02:07 AM IST
सार

एक नए शोध में पाया गया है कि महंगी इम्यूनोथेरेपी दवा पेम्ब्रोलिजुमैब को कम डोज में देने पर भी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। इससे इलाज सस्ता होने की उम्मीद है और अधिक मरीज इसका लाभ उठा सकेंगे।

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AIIMS Study: Effective Treatment Even at Low Doses, New Hope for Cancer Patients
demo - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

देश में स्तन कैंसर की सबसे आक्रामक किस्म ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (टीएनबीसी) के मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एक नए शोध में पाया गया है कि महंगी इम्यूनोथेरेपी दवा पेम्ब्रोलिजुमैब को कम डोज में देने पर भी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। इससे इलाज सस्ता होने की उम्मीद है और अधिक मरीज इसका लाभ उठा सकेंगे।

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में किए जा रहे प्लानईटी ट्रायल में यह अहम खोज सामने आई है। इस अध्ययन में स्टेज दो और तीन के उन मरीजों को शामिल किया गया, जिनका पहले कोई इलाज नहीं हुआ था। अब तक 150 से अधिक मरीज इस ट्रायल का हिस्सा बन चुके हैं और कुल 200 से ज्यादा मरीजों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
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शोध के अनुसार, ट्रायल में मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को केवल कीमोथेरेपी दी गई, जबकि दूसरे समूह को कीमोथेरेपी के साथ हर छह हफ्ते में 50 मिलीग्राम की कम डोज में पेम्ब्रोलिजुमैब दी गई। यह डोज सामान्य अंतरराष्ट्रीय इलाज में दी जाने वाली मात्रा से काफी कम है। शोध के नतीजों में सामने आया कि जिन मरीजों को इम्यूनोथेरेपी के साथ इलाज मिला, उनमें पैथोलॉजिकल कम्प्लीट रिस्पॉन्स (पीसीआर) की दर 53.8 प्रतिशत रही।
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इसका मतलब है कि इलाज के बाद शरीर में कैंसर के कोई निशान नहीं बचे। वहीं, केवल कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों में यह दर 40.5 प्रतिशत रही। यानी करीब 13 प्रतिशत का सुधार देखा गया। जिन मरीजों की सर्जरी हुई, उनमें यह अंतर और बढ़कर लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच गया।

कम डोज वाली थेरेपी लगभग सभी प्रकार के मरीजों में असरदार साबित
एम्स के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. अधिप अरोड़ा ने बताया कि पीसीआर हासिल करना मरीजों के लंबे समय तक स्वस्थ रहने की संभावना को बढ़ाता है। खास बात यह भी रही कि कम डोज वाली यह थेरेपी लगभग सभी प्रकार के मरीजों में असरदार साबित हुई। उनके अनुसार, टीएनबीसी देश में स्तन कैंसर के कुल मामलों का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। यह कैंसर तेजी से फैलता है और युवा महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है। अब तक इसका मुख्य इलाज कीमोथेरेपी ही था, लेकिन हाल के वर्षों में इम्यूनोथेरेपी को जोड़ने से बेहतर परिणाम मिलने लगे हैं। समस्या यह थी कि पेम्ब्रोलिजुमैब की पूरी डोज बहुत महंगी होती है, जिसे अधिकांश मरीज वहन नहीं कर पाते।

शोध को आईसीएमआर का सहयोग मिला
शोधकर्ता डॉ. गजल तनसीर के अनुसार, एम्स के डॉक्टरों ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए कम डोज पर आधारित यह ट्रायल शुरू किया। इस अध्ययन को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का सहयोग भी मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि कम डोज में भी समान असर मिलता है, तो यह भारत जैसे देशों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से भी यह इलाज संतोषजनक पाया गया। गंभीर साइड इफेक्ट्स इम्यूनोथेरेपी वाले समूह में लगभग 50 प्रतिशत और केवल कीमोथेरेपी वाले समूह में करीब 59 प्रतिशत रहे। इसके अलावा, आम दुष्प्रभावों में खून की कमी, संक्रमण का खतरा, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याएं शामिल रहीं, जो सामान्य कीमोथेरेपी के अनुरूप ही थीं। मरीजों की जीवन गुणवत्ता पर भी कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ा।


ट्रायल पूरी निगरानी में किया जा रहा
शोधकर्ता डॉ. समीर बख्शी ने स्पष्ट किया कि यह ट्रायल पूरी निगरानी में किया जा रहा है और किसी भी गंभीर दुष्प्रभाव की स्थिति में तुरंत इलाज में बदलाव किया जाता है। अभी इस पर और बड़े स्तर पर अध्ययन की जरूरत है, लेकिन शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक हैं। उनका कहना है कि अगर यह ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो भविष्य में लाखों कैंसर मरीजों को कम खर्च में बेहतर इलाज मिल सकेगा। यह न केवल चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि उन परिवारों के लिए भी राहत लेकर आएगी, जो महंगे इलाज के कारण परेशान रहते हैं।

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