गाजियाबाद: छेड़छाड़ के मामले में लापरवाही बरतने वाला दरोगा लाइन हाजिर, पहले भी आ चुकी हैं शिकायतें
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कविनगर थानाक्षेत्र में छेड़छाड़ के विरोध पर महिला को बीच सड़क मारपीट कर बेहोश करने के मामले में एसएसपी ने बुधवार को शास्त्रीनगर चौकी इंचार्ज हरेंद्र कुमार जादौन को लाइन हाजिर कर दिया है। चौकी इंचार्ज पर आरोप है कि उसने छेड़छाड़ के मामले को मारपीट की धाराओं में दर्ज कराया और आरोपी की गिरफ्तारी भी नहीं की।
महिला के साथ हुई घटना में आरोपी के खिलाफ अब हत्या की कोशिश की धारा भी बढ़ा दी गई है। कविनगर थाना क्षेत्र के गांव में रहने वाली एक महिला बीते शनिवार शाम को दुकान से सामान लेने के लिए घर से निकली थी। रास्ते में उसपर पड़ोसी सुनील चौधरी ने अश्लील टिप्पणी की थी।
पत्नी से शिकायत करने पर आरोपी ने पीड़ित महिला के साथ मारपीट की थी। उसने लोहे की कुर्सी से महिला पर कई वार भी किए, जिससे वह बेहोश हो गई थी। घटना के दिन ही पीड़ित परिवार ने सुनील चौधरी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने छेड़छाड़ के मामले को महज मारपीट की धाराओं में दर्ज कर केस को हल्का करने की कोशिश की। मंगलवार को घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल होने पर आरोपी को आनन-फानन में गिरफ्तार किया गया।
अभी और भी बढ़ सकती हैं धाराएं
घटना के फुटेज में आरोपी की क्रूरता देख आला अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लेते हुए केस में धाराएं बढ़ाने के निर्देश दिए। एसएचओ नागेंद्र चौबे ने बताया कि मामले में आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और हत्या की कोशिश की धारा भी बढ़ाई गई है। महिला की मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर भी केस में धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।
जीपीए सचिव के मामले में भी लगे थे गंभीर आरोप
शास्त्रीनगर चौकी इंचार्ज हरेंद्र कुमार जादौन पर गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन के सचिव अनिल सिंह के घर में बिना वारंट के तलाशी लेने का आरोप भी लगा था। चौकी इंचार्ज ने अनिल सिंह की लाइसेंसी पिस्टल व उनकी पत्नी का मोबाइल भी छीन लिया था।
हालांकि, बाद में पुलिस को पिस्टल लौटानी पड़ी थी। इस मामले में भी जीपीए के पदाधिकारियों ने एसपी सिटी को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी।
लापरवाही पर की गई कार्रवाई
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि शास्त्रीनगर चौकी इंचार्ज की पूर्व में भी कई शिकायतें मिली हैं। महिला से मारपीट मामले में भी लापरवाही मिलने पर चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर किया गया है।
बोले पूर्व पुलिस अफसर...
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी अरविंद जैन ने कहा कि पुलिस को सही धाराओं में पहले ही मुकदमा दर्ज करना चाहिए था। अगर ऐसा नहीं किया है तो वह गलत है। डीजीपी के संज्ञान में आने के बाद ही सही कार्रवाई हो, यह चिंताजनक है। ऐसे प्रकरणों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
छेड़छाड़ के विरोध पर अगर महिला से मारपीट की गई है तो वह और भी जघन्य है। स्थानीय अधिकारियों को पहले ही इसे देखना चाहिए था। छेड़छाड़ की घटना गंभीर घटना मानी जाती है। ऐसे में कम से कम सीओ या इंस्पेक्टर को मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए थी। ऐसे मामलों में त्वरित और सही कार्रवाई न करने पर पूरे पुलिस महकमे को बदनामी झेलनी पड़ती है।
पूर्व डीआईजी नवनीत राणा ने कहा कि पुलिस को किसी दबाव में आए बिना कार्रवाई करनी चाहिए थी। किसी भी बड़ी घटना में यह देखना जरूरी है कि अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर जांच की गई है या नहीं।
अगर गंभीर मामले में अधिकारी मौके पर जाकर पड़ताल करेंगे तो बेशक निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई होगी। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो यह दुखद है। किसी राजनीति या रसूख के दबाव में आकर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
संस्कारों की जरूरत, लैंगिक संवेदना के प्रति पुलिस को किया जाए दक्ष
वीएमएलजी पीजी कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मीना शुक्ला का कहना है कि महिलाओं के प्रति लोगों की संवेदनशीलता खत्म होती जा रही है। एक महिला को सार्वजनिक तौर पर पीटना संस्कारहीनता का उदाहरण है। घटना के वक्त मूकदर्शक बनकर खड़े रहना सामाजिक मूल्यों में आई कमी को दर्शाता है। ऐसे में समाज को संस्कारों की सख्त जरूरत है।
घरों में बच्चों व युवाओं को महिला का सम्मान करना सिखाना चाहिए। स्कूल लेवल से बच्चों को नैतिक शिक्षा का ज्ञान देना जरूरी है। लोगों को अपने बच्चों व परिवार के सदस्य को सामने रखकर दूसरों की मदद करनी चाहिए। साथ ही पुलिस को अपनी जिम्मेदारी संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ निभाने की जरूरत है। इससे अपराधियों के मन में डर पैदा होगा।
समाजशास्त्रियों के सुझाव:
- स्कूल और घर में पढ़ाया जाए नैतिक मूल्यों और संस्कार का पाठ
- भारतीय संस्कृति और सर्वधर्म समभाव की दी जाए सीख
- सामाजिक हस्तक्षेप खत्म होना खतरनाक, उठाएं आवाज
- लैंगिक संवेदना के प्रति पुलिस को किया जाए दक्ष
- ईमानदारी, सतर्कता व संवेदनशीलता के साथ पुलिस करें ड्यूटी, बढ़ेगा कानून का डर