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'मोदी के मंत्री ने रिलायंस को पहुंचाया लाभ'

Fri, 19 Dec 2014 07:43 PM IST
Updated Fri, 19 Dec 2014 07:43 PM IST
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AAP accussed Central minister Ravi Shankar to help Reliance industries grow

आम आदमी पार्टी ने मौजूदा केंद्रीय मंत्री रविशंकर और कांग्रेस के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी पर पदों पर रहते हुए निजी हितों को साधने का आरोप लगाया है।

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आरोप है कि दोनों नेता रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह की एक कंपनी में रिटेनरशिप पर थे। इसके लिए दोनों को लाखों रुपये प्रतिमाह दिया जाता था। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि दोनों ही सरकार में रहते हुए कंपनी को फायदा पहुंचा रहे थे।
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आप नेता प्रशांत भूषण ने कहा कि दोनों नेता ऐसे मंत्रालय संभाल रहे हैं या संभाल चुके है जिनका संबंध रिलायंस कंपनी की कारोबारी गतिविधियों से है।

इससे साफ है कि दोनों ने पद पर रहते हुए उनके लिए काम किया होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसी के कारण सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद भी 4जी घोटाले में उस कंपनी के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। फिलहाल दूरसंचार मंत्रालय रविशंकर ही संभाल रहे हैं।

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इनवॉयस के जरिए 84 लाख की रिश्वत का आरोप

AAP accussed Central minister Ravi Shankar to help Reliance industries grow

प्रशांत भूषण ने रविशंकर पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके पास तीन इनवॉयस हैं, जिनके जरिये रिलायंस समूह की कंपनी फाइन टेक निगम प्राइवेट लिमिटेड से केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने अप्रैल 2013 से मार्च 2014 तक 84 लाख रुपये मांगे थे।

खास बात यह है कि इस कंपनी की पूंजी हिस्सेदारी सिर्फ 1,24,000 रुपये है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि यह फीस कंपनी को राहत देने के बदले मांगी जा रही थी। प्रशांत भूषण ने बताया कि इस कंपनी का कॉरपोरेट दफ्तर कंपनी नवी मुंबई में है। इसमें जो तीन निदेशक हैं, वे रिलायंस की विभिन्न अन्य कंपनियों में भी निदेशक हैं।

हालांकि यह रिटेनरशिप अभी जारी है इसके बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह वर्तमान में है या नहीं इसकी जांच हो। लेकिन यह बात किसी से छुपी नहीं है कि रविशंकर प्रसाद  मार्च 2011 से जेपीसी दूरसंचार और स्पेक्ट्रम के आवंटन लाइसेंस के मूल्य निर्धारण संबंधित मामलों की जांच करने वाली कमेटी के सदस्य रहे हैं।

कांग्रेस के मंत्री मनीष तिवारी पर भी सवाल

AAP accussed Central minister Ravi Shankar to help Reliance industries grow

प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि उनके पास जो दस्तावेज है उसके मुताबिक पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी 2010 से जून 2015 तक रिलायंस कंपनी के रिटेनरशिप पर हैं। इस दौरान वह अक्तूबर 2012 से मई 2014 तक कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में स्वतंत्र प्रभार मंत्री भी रहे।

प्रशांत भूषण ने मनीष तिवारी की लिखी हुए एक चिट्ठी भी जारी की जिसमें मनीष तिवारी ने राज्यसभा सदस्य परिमल नटवानी को पत्र लिखकर जून 2012 में खत्म हो रही रिटेनरशिप को जून 2015 तक बढ़ाने के लिए कहा था। उस समय मनीष तिवारी 6 लाख रुपये महीने ले रहे थे।

प्रशांत भूषण के मुताबिक परिमल रिलायंस के मुख्य कार्यकर्ता के रूप में काम करते हैं। उनके स्वामित्व वाली कंपनी इंफोटेल ब्रांडबैंड सर्विसेज एंड रिलायंस के खिलाफ सीएजी ने भी सवाल खड़े करते हुए 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि कंपनी का शेयर कैपिटल 2 से 2.5 करोड़ के बीच है और यह कंपनी बीड में शामिल होने के योग्य नहीं थी। फिर भी इसे शामिल किया गया। आप नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि यह पूरा मामला निजी हितों व ईमानदारी से काम नहीं करने का है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मंत्री को तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए।

हित साधने के आरोप

रविशंकर प्रसाद  मार्च 2011 से जेपीसी दूरसंचार और स्पेक्ट्रम के आवंटन लाइसेंस के मूल्य निर्धारण संबंधित मामलों की जांच करने वाली कमेटी के सदस्य रहे हैं। प्रशांत भूषण का आरोप है यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद भी 4जी घोटाले में रिलायंस की कंपनी के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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