दिल्ली को दिल खोलकर नहीं मिला टैक्स, खर्च करनी पड़ी जमा पूंजी
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आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार को जनता ने खत्म हुए वित्त वर्ष 2016-17 में दिल खोलकर टैक्स नहीं दिया। योजनागत मद के संशोधित अनुमान से भी 15 फीसदी और गैर योजना मद में आठ फीसदी कम खर्च के बावजूद सरकार को पिछले वित्त वर्ष की जमा पूंजी में से 1008 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े हैं।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की तरफ से अक्सर दिए जाने वाले बयान की जनता दिल खोलकर अच्छा काम करने के लिए टैक्स दे रही है, उसे झटका लगा है। बजट पेश करते समय मनीष सिसोदिया ने 20, 600 करोड़ रुपये योजना मद समेत 46, 600 रुपये खर्च करके दिल्ली संवारने का ऐलान किया था।
इसमें 36, 525 करोड़ रुपये कर वसूली से जुटाने थे लेकिन समाप्त हुए वित्त वर्ष में 31 मार्च, 2017 तक खजाने में महज 31, 140 करोड़ रुपये ही आए हैं। हालांकि संशोधित अनुमान में सरकार ने वसूली लक्ष्य 32, 430 करोड़ रुपये का कर लिया था, उससे भी 1290 करोड़ रुपये कम मिले हैं।
सूत्र बताते हैं कि चुनावी साल के बावजूद वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार 20, 600 करोड़ रुपये के योजनामद की राशि में महज 14, 075 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई जो पिछले वित्त वर्ष से भी पौने छह फीसदी कम है। यहां तक की संशोधित अनुमान से भी 15 फीसदी कम खर्च किए।
गैर योजना मद के खर्च में सरकार ने 26 हजार करोड़ रुपये की 23, 116 करोड़ रुपये में खर्च सीमित करके 2884 करोड़ रुपये बचाए हैं। इन सबके बावजूद कर वसूली में 21 फीसदी की जगह महज 3 फीसदी वृद्धि मिलने की वजह से पिछले साल के खजाने में जमा 3645 करोड़ रुपये में से 1008 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े हैं।
प्रॉपर्टी बाजार से बिगाड़ी खजाने की सेहत
दिल्ली में नोटबंदी का असर कहें या प्रॉपर्टी बाजार की गिरावट, सरकार के खजाने की सेहत सबसे ज्यादा यहीं बिगड़ी है। पिछले चार साल में प्रॉपर्टी से सरकार को मिलने वाले राजस्व की इतनी खराब हालात कभी नहीं रही।
दिल्ली सरकार ने जमीन जायदाद खरीद फरोख्त से 4000 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य रखा था जिसमें महज 3146 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि ना सिर्फ वित्तवर्ष 2015-16 से 8 फीसदी कम है बल्कि पिछले सालों में इतनी खराब हालात कभी नहीं रही। पिछले वित्तवर्ष में प्रॉपर्टी से सरकार का राजस्व 21 फीसदी बढ़ा था और इस बार 16 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य रखा था।
वैट में भी कुछ ऐसा ही रहा है। वैट में सरकार ने 24, 500 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा था जबकि मिला 21, 144 करोड़ है। यहां तक सरकार ने संशोधित अनुमान 22 हजार करोड़ रुपये का किया था, उससे भी कम वसूली हुई है। आबकारी कर से सरकार ने 52,00 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था जिसे घटाकर 4700 किया गया। लेकिन 4251 करोड़ रुपये ही मिले जो पिछले साल से 0.32 फीसदी अधिक है।
सूत्रों के अनुसार जमा पूंजी से 1008 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद सरकार के खजाने में 2636 करोड़ की राशि बची हुई है। ऐसे में आप सरकार बेवजह स्मॉल सेविंग स्कीम (छोटी बचत योजना) की केन्द्र सरकार से मिलने वाली राशि में 1200 करोड़ रुपये का चैक वापस कर दिया। तर्क है कि सरकार बेवजह ब्याज क्यों भरे।
क्या कहते हैं आंकड़े?
बजट में लक्ष्य रखा 36,525 करोड़
संशोधित अनुमान 32, 430 करोड़
मार्च, 2018 तक आया 31, 140 करोड़
वित्त वर्ष में कर राजस्व, गैर कर राजस्व व केन्द्र से मिली राशि 36, 183 करोड़
वित्त वर्ष में खर्च 37, 192 करोड़
सरकार के खजाने में थी जमापूंजी 3645 करोड़
जमा पूंजी में से खर्च 1008 करोड़ रुपये