मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुट हुए विरोधी!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आम आदमी पार्टी (आप), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) समेत जन आंदोलनों से जुड़े कई अन्य संगठनों ने सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने का विरोध किया है।
अपनी मांगों को लेकर बुधवार सुबह को मेधा पाटकर के साथ महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के किसानों व आदिवासियों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत से मुलाकात की।
वहीं, दोपहर बाद प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, निखिल डे के साथ पाटकर ने जंतर-मंतर पर धरना दिया और मीडिया से बात की।
'केंद्र सरकार का फैसला असंवैधानिक'
मेधा पाटकर ने कहा कि बांध की ऊंचाई बढ़ाने का केंद्र सरकार का फैसला असंवैधानिक है। पाटकर ने दावा किया कि सरकार सरोवर बांध की मौजूदा 122 मीटर ऊंचाई से जमा होने वाले पानी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है।
इससे 18 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होनी थी, लेकिन अभी तक सिर्फ दो लाख हेक्टेयर जमीन की ही सिंचाई हो रही है। अब सरकार ने ऊंचाई बढ़ाकर 138.68 मीटर करने का फैसला किया है।
पाटकर ने कहा कि फिलहाल हमारी कोशिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की है। उन्होंने साफ किया कि अगर ऊंचाई बढ़ाने के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया जाता तो नर्मदा घाटी एक बार फिर बड़े आंदोलन की गवाह बनेगी।
'सरकार की मंशा ठीक नहीं'
उन्होंने कहा कि माकपा की वृंदा करात ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। इसके अलावा दूसरे कई संगठन भी लगातार साथ जुड़ रहे हैं।
इस दौरान प्रशांत भूषण ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बगैर विस्थापितों के पुनर्वास के बांध की ऊंचाई नहीं बढ़ाई जा सकती है। वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार के शुरुआती फैसले सरकार की मंशा की तरफ इशारा करते हैं।