फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   A resolution was taken in the assembly to always remember the emergency and protect democracy

Delhi NCR News: विधानसभा में आपातकाल को सदैव स्मरण रखने और लोकतंत्र की रक्षा का लिया संकल्प

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Jun 2025 08:32 PM IST
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व उपराष्ट्रपति ने साझा किए अनुभव
विज्ञापन

विशेष बुकलेट ‘आपातकाल@50’ और डॉक्यूमेंट्री की गई लॉन्च
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विधानसभा में शनिवार को आपातकाल को सदैव स्मरण रखने और लोकतंत्र की रक्षा करने का संकल्प लिया गया। विधानसभा में ‘संविधान हत्या दिवस’ विषय पर आयोजित हुई संगोष्ठी में 1975 के आपातकाल के दौर को याद किया गया। ‘भारतीय लोकतंत्र और संविधान का सबसे अंधकारमय युग – न भूलें, न क्षमा करें’ थीम पर आयोजित हुई इस चर्चा में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया, इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने लोकतंत्र पर लगे इस दाग को याद करते हुए नई पीढ़ी को जागरूक किया। एक विशेष बुकलेट ‘आपातकाल@50’ और डॉक्यूमेंट्री भी लॉन्च की गई।

संगोष्ठी में ‘द इमरजेंसी डायरीज’ पुस्तक वितरित की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान और उस दौर की घटनाओं का जिक्र है। पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, संघ के कार्यकर्ता डॉ बजरंग लाल गुप्ता, जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने विडियो संदेश में आपातकाल की तकलीफें सुनाईं। कार्यक्रम में विधायक, पत्रकार, विद्वान और आपातकाल के भुक्तभोगी शामिल हुए। सभी ने संकल्प लिया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संस्थानों को मजबूत किया जाए और आपातकाल जैसे काले अध्याय दोबारा न आएं।
विज्ञापन


तानाशाही की प्रवृत्ति आज भी खतरा : डॉ जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 1975-77 का आपातकाल भारत के हर नागरिक के लिए काला दौर था। मौलिक अधिकार छीने गए, प्रेस पर सेंसरशिप थोपी गई और हजारों लोग बिना मुकदमे जेल में डाल दिए गए। जबरन नसबंदी और तोड़फोड़ ने लोगों का जीवन तहस-नहस कर दिया। उन्होंने 42वें संविधान संशोधन को लोकतंत्र पर हमला बताया। साथ ही चेतावनी दी कि तानाशाही और वंशवाद की प्रवृत्तियां आज भी मौजूद है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आपातकाल की जांच अधूरी, नया आयोग बने : विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आपातकाल के बाद शाह आयोग की जांच अधूरी रह गई। उन्होंने मांग की कि एक नया आयोग गठित हो, जो उस दौर के अत्याचारों की पूरी जांच करे। उन्होंने सवाल उठाया कि संविधान में ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द बिना राष्ट्रीय सहमति के क्यों जोड़े गए? गुप्ता ने कहा कि ऐसी संगोष्ठियां संविधान की रक्षा के लिए जरूरी हैं।

संविधान की आत्मा को ठेस पहुंची : सत्यनारायण जटिया
पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना उसकी आत्मा है, जो ‘जनता द्वारा, जनता के लिए’ की भावना को दर्शाती है। आपातकाल में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तानाशाही अपनाकर संविधान को कमजोर किया, जो ब्रिटिश राज की याद दिलाता है। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतर्क रहने की जरूरत बताई।


17 साल की उम्र में झेली पुलिस की बर्बरता : रजत शर्मा
इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा ने आपातकाल में अपने छात्र जीवन के संघर्ष को याद किया। 17 साल की उम्र में नारे लगाने और ‘मशाल’ पर्चा छापने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। अरुण जेटली और विजय गोयल के साथ मिलकर उन्होंने विरोध किया, लेकिन पुलिस की बर्बरता झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस इतिहास से सीख लेनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed