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जानिए इस परिवार ने कैसे किया मौत का कारोबार

Sun, 10 May 2015 10:41 AM IST
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 10 May 2015 10:41 AM IST
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A family played a bad game behind the truth of death

मृत लोगों की संपत्ति हड़पने के लिए फर्जीवाड़ा आम बात है। लेकिन मृतक की मौत के मुआवजे के लिए फर्जीवाड़ा किसी ने शायद ही सुना हो। दूसरी बार मुआवजा लेने के लिए उसकी मां ने अपना नाम बदलकर याचिका दायर की।

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यह परिवार यूपी के गोंडा में मृतक की मौत का मुआवजा अदालत से ले चुका है। फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद अदालत ने बीमा कंपनी केे चेयरमैन को नोटिस जारी कर जांच व रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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तीस हजारी अदालत के एमएसीटी जज आरपीएस तेजी ने कहा कि रिकॉर्ड देखने से साफ है कि याची रूपा ने केस के अहम तथ्य कोर्ट व पुलिस से छिपाए। पुलिस ने मृतक के वारिसों की जांच करने में उचित कदम नहीं उठाए।
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पेश मामले में हरी शंकर की दिल्ली के विकासपुरी इलाके में 2013 में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसका परिवार मूल रूप से गोंडा, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। गोंडा की अदालत में उसकी बेटी संगीता ने 2013 में मुआवजा याचिका दायर की थी।

पहले भी ले चुके थे मुआवजा

A family played a bad game behind the truth of death

इसमें मृतक की मां का नाम फुलेसरा बताया गया था। गोंडा की अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद 28 जनवरी 2015 को मुआवजा देने का निर्देश दिया था। इसमें फुलेसरा को 1.50 लाख रुपये का मुआवजा मिला था।

फुलेसरा ने रूपा नाम से मुआवजा दावा तीस हजारी कोर्ट में दायर किया था। सुनवाई के दौरान उसके फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। अदालत ने कहा कि रूपा व बीमा कंपनी के नोडल अधिकारी ने केस के तथ्य कोर्ट से छिपाए हैं।

बीमा कंपनी के वकीलों ने भी उक्त तथ्य को छिपाया और बीमा कंपनी ने भी। अदालत ने मामले की जांच के लिए बीमा कंपनी के चेयरमैन को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों और कैसे दोबारा मुआवजा याचिका दायर करने का तथ्य उनकी जानकारी में नहीं आया।

नोडल अधिकारी ने दोबारा मुआवजा याचिका दायर होने की बात कोर्ट से क्यों छिपाई। अदालत ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अदालत ने जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर व थाना विकासपुरी के एसएचओ को संबंधित डीसीपी के जरिये नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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