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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   A confluence of spiritual tunes in Jashn-e-Qawwali

Delhi NCR News: जश्न-ए-कव्वाली में रूहानी सुरों का समागम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 13 Sep 2025 02:29 AM IST
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नई दिल्ली। काली-काली जुल्फों के फंदे न डालो, हमें जिंदा रहने दो ए हुस्न वालों। मंच पर जब नियाजी निजामी ब्रदर्स ने यह गाना पेश किया तो सभागार में बैठे श्रोताओं की सांसें थम-सी गईं। प्रेम और दर्द का यह सूफियाना मेल हर दिल को छू गया। कमानी ऑडियोटोरियम में शुक्रवार शाम विज़ेज़ एंड ब्लेसिंग्स एनजीओ के वार्षिक आयोजन ‘जश्न-ए-क़व्वाली’ के चौथा अध्याय के आयोजन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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कव्वालों ने कमानी ऑडिटोरियम की रौशन शाम को सूफियाना रंगों से सराबोर कर दिया। मानो संगीत ने समय को थाम लिया। कार्यक्रम शुक्रवार को एक ऐसी रूहानी याद बन गया, जिसे श्रोता लंबे समय तक अपने दिल में संजोए रखेंगे। हापुड़ घराने के इन कव्वालों का निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह से जुडाव है। इन्होंने जब सुरों की पहली तार छेड़ी, तो वातावरण में ऐसी तासीर घुली कि हर दिल झूम उठा। इस जश्न के बहाने सिर्फ सुरों की महफिल ही नहीं सजी, बल्कि उन बुजुर्गों के लिए भी उम्मीद जगाई गई जो मन का तिलक वृद्धाश्रम में जीवन बिता रहे हैं। उन्हीं के लिए कार्यक्रम आयोजित हुआ था ताकि मन का तिलक वृद्धाश्रम के लिए स्थायी घर का निर्माण हो सके। सुरों और मोहब्बत से सजे इस जश्न ने न केवल दिलों को महकाया, बल्कि इंसानियत की ख़ुशबू भी फैलायी।
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