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आशियाने की चाह में फंसी जीवन भर की पूंजी, 8000 फ्लैट मालिक पेरशान

Tue, 01 Sep 2015 12:33 PM IST
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:33 PM IST
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8000 flats owners waiting for possession in gaziabad

गाजियाबाद के बिल्डर प्रोजेक्ट के करीब 8,000 फ्लैट खरीदारों को अपने घर की चाभी मिलने का इंतजार है। इनका यह इंतजार साढ़े चार साल तक लंबा खिंच गया है।

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मुसीबत यह है कि फ्लैट बुकिंग के समय ऑनटाइम पजेशन के वादे पर गाजियाबाद का कोई बिल्डर खरा नहीं उतर पा रहा है। शहर में पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स में भी बिल्डर्स 3 माह से एक साल की देरी से पजेशन दे पाए हैं।
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रीयल एस्टेट सेक्टर में मंदी के चलते निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में देरी की समयसीमा अब छह माह से दो साल तक आम हो चली है। निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स के अटकने की संख्या भी बढ़ी है।
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हवाहवाई विकास की बुनियाद पर टिका शहर का रीयल एस्टेट सेक्टर बीते दो साल से मंदी से निकल ही नहीं पा रहा है। हालात यह हैं कि शहर में बने हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में हजारों फ्लैट्स खाली पड़े हैं। निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स या तो अटक गए हैं या फिर धीमी गति से चल रहे हैं।

इसका खामियाजा पजेशन में देरी के रूप में प्रोजेक्ट्स के ग्राहकों पर पड़ना तय है। नौकरीपेशा लोगों को मकान के किराए के साथ फ्लैट की ईएमआई भी भुगतनी पड़ रही है, जो उनके बस केबाहर है।

रीयल एस्टेट सेक्टर के जानकारों की मानें तो आर्थिक मंदी, जमीन की ऊंची कीमतों, सर्किल रेट, निर्माण लागत में इजाफा, बैंकों से कर्ज मिलने में परेशानी, सरकारी विभागों से एनओसी में देरी के कारण समय पर पजेशन में समस्या होती है।

गाजियाबाद में समय पर पजेशन सपना

8000 flats owners waiting for possession in gaziabad

कहां बने कितने फ्लैट्स (अनुमानित)
राजनगर एक्सटेंशन35 प्रोजेक्ट्स35000 फ्लैट्स
क्रासिंग्स रिपब्लिक20 प्रोजेक्ट्स25000 फ्लैट्स
वसुंधरा5 प्रोजेक्ट्स3500 फ्लैट्स
इंदिरापुरम8 प्रोजेक्ट्स6000 फ्लैट्स
अन्य जगह20 प्रोजेक्ट्स20,000 फ्लैट्स
पजेशन-पेडिंग फ्लैट्स की संख्या (अनुमानित)
राजनगर एक्सटेंशन 10,000 -5000
क्रासिंग्स रिपब्लिक 22,000-1500
वसुंधरा, इंदिरापुरम 4000 - 750
अन्य जगह 7000 - 750

अटके प्रोजेक्ट्स के फ्लैट्स (अनुमानित)
राजनगर एक्सटेंशन 7 से 8 हजार फ्लैट्स
क्रासिंग्स रिपब्लिक 1500 फ्लैट्स
इंदिरापुरम व अन्य: 2,000 फ्लैट्स

बुकिंग के समय कराएं पजेशन की लिखापढ़ी

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आर्थिक मंदी के कारण डिमांड में आई कमी से रीयल एस्टेट सेक्टर में रेडी टू मूव फ्लैट्स की तादाद अच्छी संख्या में हैं। कई बार अथारिटी द्वारा सड़क, बिजली आदि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेप न करने से बिल्डर प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने में रुचि नहीं लेते हैं। सरकारी विभागों की एनओसी में देरी से पजेशन लेट होता है। -गौरव गुप्ता, ज्वाइंट सेक्रेटरी, क्रेडाई

एओए फेडरेशन के अध्यक्ष कर्नल टीपी त्यागी ने बताया कि पजेशन से पहले ग्राहकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बिल्डर ने प्रोजेक्ट का कंप्लीशन सर्टिफिकेट ले लिया है।

यदि बिल्डर देरी पर पजेशन दे रहा तो उससे पेनाल्टी शुल्क वापस लेना चाहिए। यदि फ्लैट की बुकिंग करा रहे हैं तो पजेशन के निर्धारित समय की भी लिखा-पढ़ी करा लेनी चाहिए।

ग्राहकों की अर्जी पर जीडीए की कार्रवाई

8000 flats owners waiting for possession in gaziabad

पजेशन न देने के मामले में जीडीए की भूमिका बिल्डर प्रोजेक्ट्स के खरीदारों की अर्जी पर निर्भर है। त्यागी के मुताबिक पजेशन का समय बुकिंग के दौरान ग्राहक और बिल्डर के जरिए तय होती है।

यूपी अपार्टमेंट एक्ट के अनुसार यदि बिल्डर बार-बार वादे के बावजूद न तो पजेशन और न ही पेनाल्टी दे रहा तो जीडीए एक्ट की धारा-25 के अनुसार बिल्डर पर एफआईआर दर्ज करा सकता है।

क्रासिंग्स रिपब्लिक के करीब 25 हजार फ्लैट्स में करीब 22 हजार का पजेशन हो चुका है। पजेशन में तीन से छह माह की देरी स्वाभाविक है, जिसके लिए बुकिंग के समय ही ग्राहकों को बता दिया जाता है। फंड की कमी, सरकारी विभागों की एनओसी मिलने समेत कई फैक्टर पजेशन को प्रभावित करते हैं।-विकास पुंडीर, सीएमडी, एसकेबी ग्रुप

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