एक बार फिर दौलताबाद में नजफगढ़ ड्रेन ने मचाई तबाही
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गांव दौलताबाद के आसपास करीब पांच सौ एकड़ जमीन जलमग्न होने से सैकड़ों किसानों की फसल खराब हो गई है। खास बात है कि किसान इसके लिए कुदरत को कम और जिला प्रशासन को अधिक जिम्मेदार बता रहे हैं।
दौलताबाद के ग्राम सरपंच विरेंद्र सिंह बताते हैं कि क्षेत्र से गुजर रही नजफगढ़ ड्रेन हर साल तबाही लाती है। बरसात होने पर न केवल दौलताबाद, बल्कि इसके साथ लगते रावता, गालमपुर, खेड़की माजरा, धनकोट, धर्मपुर, बाढ़सा, चंदु बुढेड़ा समेत एक दर्जन गांवों में कृषि जमीन जलमग्न हो जाती है।
इस बार भी ऐसा ही हुआ है। पिछले दिनों हुई बरसात से 500 एकड़ में लगी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई है।
हर बार बरसात में ड्रेन ढाती है कहर
दौलताबाद क्षेत्र से होकर गुजर रही नहर भी किसानों के लिए अभिशाप बनी है। किसानों ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इस नहर का निर्माण इसलिए कराया था ताकि साबी नदी से आने वाली बाढ़ से किसानों को नुकसान न हो।
वक्त के साथ साबी नदी तो लुप्त हो गई। नहर अभी भी मौजूद है। यह नहर सीधे यमुना नदी से मिल रही है। बरसात के दिनों में नहर उफान पर होती है।
यमुना का जलस्तर न बढ़े, इसके लिए नजफगढ़ के पास ककरोला में नहर पर फट्टे डालकर पानी रोक दिया जाता है। इस कारण पानी ओवरफ्लो होकर खेतों को जलमग्न कर देता है। दो तरफा मार किसानों को संभलने का बिल्कुल मौका नहीं देती।
इतनी बड़ी तबाही पर मुआवजा भी नहीं!
दौलताबाद के किसान भीम सिंह, फतेह सिंह, जिले सिंह नंबरदार और मेहर सिंह ने बताया कि पिछले साल हुए नुकसान का मुआवजा भी अभी तक नहीं मिला है। आर्थिक तंगी के कारण कई किसानों को अपने बच्चों की शादियां तक टालनी पड़ी हैं।
अगर इस बार भी प्रशासन किसानों का दर्द नहीं समझता तो बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों की मानें तो इस मुद्दे पर कई राजनीतिक दलों ने भी समर्थन देने का भरोसा दिलाया है।
पिछले साल किया था बांध बनाने का दावा, लेकिन...
प्रशासन ने पिछले साल फरवरी माह में दावा किया था कि जल्द ही नजफगढ़ ड्रेन पर बांध बनाया जाएगा। बांध बनने के बाद बरसाती पानी खेतों तक नहीं पहुंचेगा। प्रशासन के इस भरोसे पर उन किसानों ने भी फसल की बिजाई कर दी, जिन्होंने बार-बार हो रहे नुकसान के चलते खेती ही छोड़ दी थी।
ग्राम सरपंच ने बताया कि बांध बनाना तो दूर, अभी तक नजफगढ़ ड्रेन की सफाई तक नहीं कराई गई। इसकी दीवारें भी छोटी हैं। ऐसे में बरसात होते ही पानी निकलकर पूरे क्षेत्र में जमा हो गया। जलभराव में गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।