सुविधा बनी असुविधा: DTC बसों का नहीं कोई भरोसा, पांच से 10 बसें रोज हो रहीं खराब... लगता है जाम; यात्री परेशान
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस रोजाना पांच से 10 बसों के खराब होने से जाम लगने की सूचना एक्स पर देती है। खराब बस को हटाने में 30 से 40 मिनट लग जाते हैं। यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में देरी के साथ ही अन्य वाहनों को जाम का सामना करना पड़ता है।
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राजधानी में रोजाना 40 लाख से अधिक लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने वाली डीटीसी और क्लस्टर बसों की सुविधा कम असुविधा ज्यादा बन गई है। यह बसें बीच सड़क पर खराब हो रही हैं। ऐसे में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में देरी तो होती ही है साथ में सड़क पर अन्य वाहनों को जाम का सामना भी करना पड़ रहा है। यह बसें अपनी उम्र कई वर्ष पहले ही पूरी कर चुकी हैं, ऐसे में भीषण गर्मी के कारण ओवरहीट होने पर उनमें खराबी आ रही है।
डीटीसी बसों का नहीं कोई भरोसा
दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के पास जो बसें हैं उनमें से 90 प्रतिशत से अधिक बसें 2022 में ही अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं, लेकिन इन बसों को संचालन अवधि 2025 तक के लिए बढ़ाई गई है। बसें चल तो रही हैं लेकिन कब और कहां खराब हो जाएं यह पता नहीं होता है।
हर दिन 50 बसें हो रही खराब
रोजाना हर रूट पर 50 से अधिक बसें खराब हो रही हैं। इससे न सिर्फ यात्री परेशान हैं बल्कि चालक और परिचालक के साथ ही जाम लगने से सड़कों पर अन्य वाहन चालक भी परेशान हो रहे हैं।
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि खराब बसों में सबसे अधिक उम्र पूरी कर चुकी बसें शामिल हैं। इनमें लो फ्लोर सीएनजी बसों के साथ ई-बसें भी शामिल हैं। सबसे बड़ी परेशानी इन बसों को ठीक करने में आती है। दरअसल, जिस डिपो की बस होती है, उसी डिपो से मैकेनिक को बुलाया जाता है। इससे खराब बस को सड़क किनारे तक पहुंचाने में घंटों का समय लग जाता है।
डीटीसी के चालक दिनेश कुमार ने बसें रास्ते में खराब हो जाती हैं तो पब्लिक हमारे साथ अभद्रता करती है। कई बार गाली गलौज तक की स्थिति बन जाती है। परिचालक दीपक ने कहा कि धौलाकुंआ से नोएडा सेक्टर 62 तक रूट की बस लेकर चलते हैं। बस बहुत ज्यादा पुरानी होने के कारण एसी सही से काम नहीं करता। सवारियों को परेशानी होती है। इसके साथ ही बसें ब्रेकडाउन भी हो जाती हैं।
बसों की हालत सुने चालकों की जुबानी
चालक नौशाद ने बताया कि वह 14 साल से बस चला रहे हैं। बसों में ऐसी इसलिए भी काम नहीं कर रहे हैं क्योंकि सीट से ज्यादा लोग बस में सवार हो जाते हैं। बस आए दिन खराब हो जाती है। इससे इंसेंटिव नहीं मिलता है सिर्फ 816 रुपये दिहाड़ी ही मिलती है।
वहीं डीटीसी में महिला बस चलाक सरिता ने बताया कि वह ड्यूटी पर इसलिए नहीं आ रही हैं क्योंकि रोजाना उनकी बस एक या दो ट्रिप में खराब हो जाती थी। इससे इंसेंटिव नहीं बनता है। कई बार बस ऐसी जगह खराब हो जाती हैं, जहां पर पानी नहीं मिलता। बस छोड़कर जा नहीं सकते हैंद्ध ऐसे में वह परेशान हैं और ड्यूटी पर नहीं आ रही हैं।
2895 पुरानी सीएनजी की बसें हैं डीटीसी के बेडे में
दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम के दौरान बड़ी संख्या में बसें आईं थी। तब भी बसों की कमी थी। दिल्ली सरकार ने 2025 तक दिल्ली की सड़कों पर 10480 बसें चलाने का लक्ष्य रखा हुआ है। इनमें से 8000 हजार इलेक्ट्रिक बसें होंगी बाकी सीएनजी की बसें होंगी। वर्तमान में अभी डीटीसी के बेड़े में 1650 इलेक्ट्रिक और 2895 बसें पुरानी सीएनजी की हैं। अधिकारियों की मानें तो 2025 के अंत तक के लिए बसों को चलाने की अनुमति मिली हुई थी। इसके बाद सभी सीएनजी बसें स्क्रैप कर दी जाएगी।