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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर खास: मजदूरों की ये 5 समस्याएं दूर हों तो बने बात

Mon, 01 May 2017 09:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 01 May 2017 09:44 PM IST
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5 bog problems of labours in noida
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर आयोजित सेमिनार में सोमवार को श्रमिकों की पांच बड़ी समस्याएं सामने आईं। श्रमिकों ने कहा कि यदि उनकी पांच समस्याएं दूर हो जाएं तो उनके परिवार खुशहाल हो जाएंगे और देश के विकास में सहभागिता अच्छे से निभा सकेंगे। अफसरों ने भी श्रमिकों की इन  समस्याओं को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। इनमें श्रमिकों की ओर से ईएसआई अस्पताल, पीएफ, आवास, बच्चों के लिए स्कूल और  भोजन आदि शामिल हैं।
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1- श्रमिकों को मिले पीएफ 
जिले में संगठित और असंगठित श्रमिकों का कंपनियां पीएफ काट लेती हैं। मगर उनको जमा नहीं करती हैं। इसके अलावा यदि कोई श्रमिक अपना पीएफ निकालना चाहे तो उसे परेशान किया जाता है। पीएफ निकालने की व्यवस्था को अफसर गंभीरता से लें और बिना परेशान किए ही पीएफ को निकलवाने का काम करें।
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अनिल अली, श्रमिक
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2- ईएसआई अस्पताल
जिले में 8 से 9 लाख श्रमिक हैं लेकिन ईएसआई अस्पताल केवल एक है और डिस्पेंसरी चार हैं। हर रोज बीमार इलाज कराने के लिए जाते हैं लेकिन वहां पर दवा लेने के चक्कर में और बीमार हो जाते हैं। पूरे दिन लाइन में लगने के बाद भी दवा नहीं मिल पाती है। जिससे व्यक्ति अच्छा होने के लिए जाता है मगर और ज्यादा बीमार होकर लौटता है। छुट्टी अलग से होती है और एक दिन का पैसा भी कट जाता है।
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शहनवाज
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3- रहने के लिए हो छत
श्रमिकों को 6 से 10 हजार रुपये पगार के रूप में मिलते हैं लेकिन इससे वह परिवार का पेट भी नहीं भर पाते हैं। ऐसे में एक कमरे का मकान भी ऐसा सपना है तो कभी पूरा नहीं किया जा सकता है। सरकार को श्रमिकों के लिए ऐसी योजना लानी चाहिए जो बेहद कम किस्तों पर दिया जा सके। इससे श्रमिक अपने परिवार को सिर ढांकने के लिए कम से कम एक छत तो दे सकें।
गिरिराज सिंह
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4-  बच्चों को मिले शिक्षा
श्रमिकों के बच्चों को सरकार शिक्षित करने का भरपूर प्रयास कर रही है। मगर स्थानीय स्तर पर अफसर उतना काम नहीं कर पाते हैं। ले देकर श्रमिकों के बच्चों को साइट पर स्कूल खोल दिया जाता है या फिर सरकारी स्कूल में बड़ी मुश्किल से दाखिला हो पाता है। मगर वहां पर भी शिक्षा के नाम पर कुछ नहीं मिलता है। इसलिए सरकार को उनके बच्चों के लिए ऐसे स्कूल चलाने चाहिए जिससे उनके बच्चे भी पढ़ लिखकर लायक बन सकें।
कैलाश
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5- भरपेट मिले भोजन
श्रमिकों का कम वेतन होने के कारण परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल होता है। राशन डीलर उनके लिए आने वाले अनाज को डकार जाते हैं। श्रमिकों को कुछ नहीं दिया जाता है। इसलिए सरकार को श्रमिकों के लिए ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे राशन डीलर की तर्ज पर श्रमिकों को ही दुकान आवंटित करनी चाहिए व राशन पर सब्सिडी मिले। इससे श्रमिकों के परिवार को भोजन मिल सकेगा।
सरफराज श्रमिक
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श्रमिक और कंपनी एक दूसरे के पूरक
नोएडा। श्रम विभाग की ओर से सेक्टर-24 स्थित वीवी गिरी श्रम संस्थान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें अध्यक्षता करते हुए एडीएम प्रशासन कुमार विनीत ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं को प्राथमिकता से अफसर और कंपनी मालिक मिलकर दूर करें। उन्होंने कहा कि कंपनी और श्रमिक एक दूसरे के पूरक हैं और देश के विकास में इनका अहम स्थान है। श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता पर रखा जाए। श्रम विभाग सेवा योजकों और श्रमिकों के बीच अच्छा समन्वय बनाकर रखें। इस मौके पर सहायक श्रमायुक्त डॉ. हरिश्चंद्र, उपश्रमायुक्त बीके राय, महावीर जैन, वीरेंद्र सिंह सिरोही, समेत श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

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अग्निशमन अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग
नोएडा। हिंद मजदूर सभा और अन्य मजदूर संगठनों की ओर से सोमवार को मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में जुलूस निकाला गया। सेक्टर-3 टी सीरीज पार्क में एक सभा का आयोजन किया गया। एमएमएस के महामंत्री आरपी सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद श्रमिकों पर हमलों की संख्या बढ़ी है। इससे औद्योगिक इकाइयां बद होने के कगार पर पहुंच रही हैं। उद्योग पति श्रमिक के प्रति गैर जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हैं और सरकार मूक दर्शक बनी हुई है। कुछ रुपये बचाने के लिए मजदूरों की सुरक्षा ताक पर रख दी जाती है। इसका जीता जागता उदाहरण सेक्टर-11 की कंपनी में आग से मारे गए श्रमिक हैं। अभी तक मृतकों के परिजनों और घायलों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। साथ ही अग्निशमन अधिकारी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। इस मौके पर रितेश कुमार झा, ललित कुमार, तनुज सोलंकी, बालेश्वर समेत अन्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। 
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