22 प्रत्याशियों पर भारी पड़ा नोटा का बटन
पहली बार किसी को वोट न देने के विकल्प के रूप में सामने आया नोटा (नन ऑफ द एबव) फरीदाबाद के 22 प्रत्याशियों पर भारी पड़ा। मतलब यह कि इस बटन को दबाकर शहर के लोगों ने नेताओं के प्रति जबरदस्त गुस्से का इजहार किया।
लोगों को यह बात पच नहीं रही है लेकिन यह कड़वी सच्चाई है। शहर के 3328 लोगों ने इसका प्रयोग किया। समाजवादी पार्टी एवं जनता दल युनाइटेड जैसी पार्टियां भी नोटा के नीचे दबी रहीं।
श्रमिक नेता बेचू गिरी का कहना है कि भ्रष्टाचार और महंगाई का गुस्सा न सिर्फ लोगों ने भाजपा को भारी वोट देकर निकाला बल्कि नोटा पर बटन दबाकर भी नाराजगी जताई।
दिग्गज भी पार न पा पाए नोटा से
इसके छठे स्थान पर होना यह साबित करता है कि किसी भी पार्टी को पसंद न करने वाले भी कम नहीं हैं। सबसे ज्यादा लोगों ने महंगाई, भ्रष्टाचार एवं कांग्रेसी नेताओं के बड़बोलेपन से परेशान होकर ऐसा विकल्प अपनाया।
कहने
को तो फरीदाबाद की सीट पर 27 प्रत्याशी मैदान में थे। लेकिन इन पर यह बटन
भारी पड़ी। छोटी और निर्दलीय पार्टियों को शहर ने नकार दिया।
यहां
तक कि स्वयंभू बड़ा नेता मानने वाले मनधीर सिंह भी नोटा के नीचे ही रहे।
उन्हें 644 एवं उनकी पत्नी सुशीला को 524 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा।