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Delhi NCR News: 15 साल के वंदन ने शतरंज के दिग्गज ग्रैंडमास्टर कार्लसन को हराया
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दिल्ली के 15 वर्षीय वंदन अलंकार सवाई ने ग्रैंडमास्टर कार्लसन को मात दी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली के 15 वर्षीय वंदन अलंकार सवाई ने ऑनलाइन त्वरित शतरंज टूर्नामेंट में नॉर्वे के ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन को हराकर सुर्खियां बटोरी हैं। यह जीत 18 अगस्त को हुए एक मुकाबले में मिली, जहां वंदन ने दुनिया के शीर्ष शतरंज खिलाड़ी को हराया।
18 अगस्त को वंदन ने चार ऑनलाइन शतरंज मुकाबले खेले, जिनमें से तीन में उन्हें जीत मिली। इनमें सबसे महत्वपूर्ण जीत मैग्नस कार्लसन के खिलाफ थी। करीब 30 चालों तक चले इस मुकाबले में कार्लसन से एक बड़ी गलती हुई। वंदन ने इस मौके का फायदा उठाया और बाजी अपने नाम कर ली। वंदन की माता माधुरी अलंकार सवाई ने बताया कि जीत के बाद वंदन अगले कमरे में चले गए। उन्होंने कोई जश्न नहीं मनाया और शांति से सोने चले गए। परिवार को भी शुरुआत में इस बड़ी जीत की जानकारी नहीं थी। बाद में वंदन के पिता ने ऑनलाइन आधिकारिक साइट पर उनकी प्रोफाइल देखी, तब उन्हें पता चला कि तीन जीतों में से एक दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी कार्लसन के खिलाफ थी।
मैग्नस कार्लसन कौन हैं
मैग्नस कार्लसन नॉर्वे के ग्रैंडमास्टर हैं। उन्हें शतरंज के महानतम खिलाड़ियों में गिना जाता है। वह पांच बार विश्व चैंपियन रह चुके हैं। कार्लसन 2011 से लंबे समय तक दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी भी रहे हैं। उनका सर्वोच्च क्लासिकल रेटिंग 2882 है, जो अब तक का सबसे ऊंचा रेटिंग रिकॉर्ड है।
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वंदन का शतरंज का सफर
वंदन सरदार पटेल विद्यालय में कक्षा 10 के छात्र हैं। उन्होंने आठ साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू किया था। वंदन ने एफएम गुरप्रीत पाल सिंह और आईएम रुशागर कृष्णा से प्रशिक्षण लिया है। हाल ही में वह अपनी मां के साथ यूरोप के डेढ़ महीने के शतरंज दौरे से लौटे थे। इस जीत के बाद वंदन का नाम शतरंज की दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली के 15 वर्षीय वंदन अलंकार सवाई ने ऑनलाइन त्वरित शतरंज टूर्नामेंट में नॉर्वे के ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन को हराकर सुर्खियां बटोरी हैं। यह जीत 18 अगस्त को हुए एक मुकाबले में मिली, जहां वंदन ने दुनिया के शीर्ष शतरंज खिलाड़ी को हराया।
18 अगस्त को वंदन ने चार ऑनलाइन शतरंज मुकाबले खेले, जिनमें से तीन में उन्हें जीत मिली। इनमें सबसे महत्वपूर्ण जीत मैग्नस कार्लसन के खिलाफ थी। करीब 30 चालों तक चले इस मुकाबले में कार्लसन से एक बड़ी गलती हुई। वंदन ने इस मौके का फायदा उठाया और बाजी अपने नाम कर ली। वंदन की माता माधुरी अलंकार सवाई ने बताया कि जीत के बाद वंदन अगले कमरे में चले गए। उन्होंने कोई जश्न नहीं मनाया और शांति से सोने चले गए। परिवार को भी शुरुआत में इस बड़ी जीत की जानकारी नहीं थी। बाद में वंदन के पिता ने ऑनलाइन आधिकारिक साइट पर उनकी प्रोफाइल देखी, तब उन्हें पता चला कि तीन जीतों में से एक दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी कार्लसन के खिलाफ थी।
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मैग्नस कार्लसन कौन हैं
मैग्नस कार्लसन नॉर्वे के ग्रैंडमास्टर हैं। उन्हें शतरंज के महानतम खिलाड़ियों में गिना जाता है। वह पांच बार विश्व चैंपियन रह चुके हैं। कार्लसन 2011 से लंबे समय तक दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी भी रहे हैं। उनका सर्वोच्च क्लासिकल रेटिंग 2882 है, जो अब तक का सबसे ऊंचा रेटिंग रिकॉर्ड है।
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वंदन का शतरंज का सफर
वंदन सरदार पटेल विद्यालय में कक्षा 10 के छात्र हैं। उन्होंने आठ साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू किया था। वंदन ने एफएम गुरप्रीत पाल सिंह और आईएम रुशागर कृष्णा से प्रशिक्षण लिया है। हाल ही में वह अपनी मां के साथ यूरोप के डेढ़ महीने के शतरंज दौरे से लौटे थे। इस जीत के बाद वंदन का नाम शतरंज की दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।